फ़ारूक़, उमर से मिलने की इजाज़त, पार्टी के 15 नेता करेंगे मुलाक़ात

उमर अब्दुल्ला और फ़ारूक़ अब्दुल्ला

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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को उनके वरिष्ठ नेताओं फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला से मिलने की इजाज़त दे दी है.

5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पार्टी के दोनों शीर्ष नेता नज़रबंद हैं.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अबदुल्ला से पार्टी के 15 नेताओं का शिष्टमंडल रविवार सुबह देवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में मुलाक़ात करेगा.

पार्टी के प्रवक्ता मदन मंटू ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रविवार सुबह ये प्रतिनिधिमंडल मुलाक़ात के लिए निकल जाएगा.

मदन मंटू ने शनिवार को बताया, "नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार 6 अक्तूबर 2019 की सुबह पार्टी अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला से मिलने जम्मू से इंडिगो फ़्लाइट से जाएगा."

जम्मू के शेर-ए-कश्मीर भवन में बुलाई गई एक बैठक के बाद पार्टी के प्रवक्ता ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने अपने वरिष्ठ नेताओं की लगातार नज़रबंदी को लेकर नाराज़गी जताई थी. इसके बाद राज्यपाल से इस मुलाक़ात के बाबत इजाज़त मांगी गई.

प्रवक्ता ने कहा कि अपने वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात के बाद पार्टी आगे की रणनीति पर फ़ैसला करेगी.

फ़ारूक़ अब्दुल्ला

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जहां एक तरफ अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से राज्य के वरिष्ठ नेता महबूबा मुफ़्ती, फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला नज़रबंद हैं वहीं बुधवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जम्मू के लगभग सभी नेताओं की नज़रबंदी ख़त्म कर दी है.

उमर अब्दुल्ला
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नज़रबंदी के तुरंत बाद क्या ट्वीट किया था उमर ने?

5 अगस्त की आधी रात को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने अपने घरों में नज़रबंद किए जाने के बाद कई ट्वीट किए थे.

उमर अब्दुल्ला का पहला ट्वीट था, ''कश्मीर के लोगों से कहना चाहता हूं, हमें नहीं पता कि क्या होने जा रहा है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह ने हमारे लिए जो भी सोचा होगा वह बेहतर होगा. हम भले ही अभी उसे देख ना पा रहे हों, लेकिन हमें उस पर कभी शक नहीं करना चाहिए. सभी को शुभकामनाएं. सभी सुरक्षित रहें और इससे भी बढ़कर सभी संयम में रहें.''

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दूसरे ट्वीट में उमर ने लिखा, ''जिस वक़्त हम सभी का ध्यान कश्मीर की तरफ़ है, मैं कुछ बातें कारगिल, लद्दाख़ और जम्मू के लोगों के लिए कहना चाहता हूं. मुझे कुछ नहीं पता कि हमारे राज्य के साथ क्या होने वाला है लेकिन यह कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा. मैं जानता हूं कि आपमें से बहुत लोगों को यह चीजें निराश कर रही हैं. लेकिन क़ानून को अपने हाथ में मत लीजिए. कृपया शांति बनाए रखें.''

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तीसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''हिंसा सिर्फ़ वे लोग करते हैं जो हमारे राज्य का भला नहीं चाहते. ये वो भारत नहीं था जिसे जम्मू कश्मीर ने चुना था लेकिन मैं अभी भी उम्मीद छोड़ने के लिए तैयार नहीं हूं. भगवान सभी के साथ है."

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अपने एक और ट्वीट में उमर ने लिखा, "मुझे पीर पंजाल और चिनाब घाटी में रहने वाले लोगों की ख़ास चिंता हो रही है. इन इलाक़ों में सांप्रदायिक हिंसा होने की बहुत ज़्यादा आशंका है. मुझे उम्मीद है कि सरकार ने इन इलाक़ों में सही इंतज़ाम कर रखे होंगे."

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