हाफ़िज़ सईद की गिरफ़्तारी का क्रेडिट लिया ट्रंप ने- पढ़ें आज की पांच बड़ी ख़बरें

डोनल्ड ट्रंप

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पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद की गिरफ़्तारी पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ट्वीट कर कहा कि इस मामले में पिछले दो साल से बनाया गया भारी दबाव काम आया.

सईद को मुंबई चरमपंथी हमले का 'तथाकथित मास्टमाइंड' बताते हुए ट्रंप ने लिखा कि 10 साल की तलाश के बाद उसे गिरफ़्तार किया गया है.

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हाफ़िज़ की गिरफ़्तारी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ट्रंप से मुलाक़ात से पहले पाकिस्तान का अमरीका के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश से भी जोड़ कर देखा जा रहा है.

कुमार स्वामी

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कर्नाटकः कुमारस्वामी सरकार के लिए राहत बन कर आये रामालिंगा रेड्डी

कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को विश्वास मत पर फ़ैसला होगा और यह तय होगा कि मौजूदा कुमारस्वामी सरकार रहेगी या जायेगी. लेकिन इस बीच एक बाग़ी विधायक रामालिंगा रेड्डी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए थोड़ी राहत बन कर सामने आये हैं.

कांग्रेस के विधायक रामालिंगा रेड्डी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा से अपना इस्तीफ़ा वापस लेने का फ़ैसला किया है और वह सदन में मतदान के समय कुमारस्वामी के विश्वास मत का समर्थन करेंगे.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फ़ैसला दिया कि बाग़ी 15 विधायकों को सदन की कार्रवाई में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि 15 विधायकों के सदन में जाने और व्हिप को मानने को लेकर कोई दबाव नहीं है.

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14 महीने पुरानी कुमारस्वामी सरकार को विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है. इसमें कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, बसपा के एक और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं.

इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का भी एक मत है. दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी बीजेपी को 107 विधायकों का समर्थन हासिल है.

अब अगर ये 15 बाग़ी विधायक गुरुवार को विश्वासमत के दौरान सदन में मौजूद नहीं रहते हैं तो 225 सदस्यीय विधानसभा में कुमारस्वामी सरकार के लिए बहुमत आंकड़ा 104 हो जायेगा लेकिन उनके गठबंधन के विधायकों की संख्या घटकर 101 हो जाएगी (मनोनीत सदस्य को वोट देने का अधिकार नहीं होता है).

संघ

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संघ के संगठनों की जानकारी इकट्ठा करने के आदेश पर बिहार में सियासी माहौल गरम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके अनुषांगिक संगठनों और उसके अधिकारियों की जानकारी इकट्ठा करने के बिहार पुलिस स्पेशल ब्रांच के एक आदेश के सार्वजनिक होने के बाद से बिहार में सियासी माहौल गरम है.

इस फ़रमान के तूल पकड़ने पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा के लिए यह जानकारी जुटाई जा रही थी.

अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) जेएस गंगवार ने बुधवार को कहा कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों की जानकारियां जुटाई जा रही थी.

गंगवार ने कहा, "आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा आदेश निर्गत हुआ है. उसकी जानकारी किसी भी अन्य वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग को नहीं थी."

उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक ने अपने ही स्तर से पत्र भेजकर समान्य सूचना और जानकारी मांगी है. उन्होंने हालांकि कहा कि जिस तरह यह पत्र निर्गत किया गया, उसकी जांच कराई जाएगी.

इस बीच गृह विभाग ने विशेष शाखा को इस आदेश के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें पूछा गया है कि आख़िर ऐसे पत्रों को जारी करने की ज़रूरत क्यों पड़ी.

इबोला

कांगो में इबोला से हेल्थ इमरजेंसी

कांगो गणराज्य में इबोला के प्रकोप को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया है. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि प्रभावित इलाक़ों की सीमाओं को सील नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे आर्थिक नुक़सान होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये भी कहा है कि क्षेत्र से बाहर इबोला फैलने का ख़तरा कम है.

इबोला से कांगो में 16 सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इसी हफ़्ते गोमा में भी एक मामला सामने आया है, जहां दस लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के जनसंचार अधिकारी डॉक्टर मागर्ट हैरिस ने बीबीसी को बताया कि आपातकाल समिति ने देशों से इस घोषणा पर ओवररिएक्ट ना करने की अपील की है.

उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि पिछली बार इसे ग़लत तरीक़े से ले लिया गया और लोगों में घबराहट फैल गई. और आपातकाल समिति के सदस्यों ने जब अपने बयान में बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. तब उन्होंने ये भी साफ़ किया कि उन्होंने दुनिया के सभी देशों को सुझाव दिया है कि वो ट्रांसपोर्ट बंद ना करें और एकदम से पाबंदियां ना लगाएं. बल्कि मैं दुनिया के दूसरे देशों से कहना चाहता हूं कि घबराएं नहीं, हमारी मदद करें."

एनआईए

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एनआईए संशोधन बिल राज्यसभा में पारित, अब बन जायेगा क़ानून

लोकसभा के बाद बुधवार को 'एनआईए संशोधन विधेयक 2019' को राज्यसभा ने भी मंज़ूरी दे दी.

अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह क़ानून का शक्ल ले लेगा.

इस क़ानून से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भारत से बाहर किसी गंभीर अपराध के संबंध में मामले का पंजीकरण करने और जांच का निर्देश देने का अधिकार मिल जाएगा.

सोमवार को लोकसभा ने इस बिल को मंज़ूरी दे दी थी.

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