हरेन पंड्या मामले में नहीं होगी नए सिरे से जांच

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साल 2003 में गुजरात के गृह मंत्री रहे हरेन पंड्या की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की कोर्ट की निगरानी में नए सिरे से जांच की याचिका को खारिज कर दिया है.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 12 अभियुक्तों को हत्या के आरोप से बरी करने के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव किया है. कोर्ट ने सात आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया गया है.
आदेश देते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, ''हम सात अभियुक्तों को बरी करने के पहले के आदेश को बदल रहे हैं.''
एक गैर सरकारी संगठन ने इस मामले की फिर से जांच करने की मांग करते हुए अपील दायर की थी. इस मामले पर बहस के बाद कोर्ट ने 12 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था.
संगठन का कहना था कि इस मामले में नए तथ्य सामने आए हैं लेकिन सरकार ने इसे एक राजनीतिक साजिश बताया था.

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अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने पर इस गैर सरकारी संगठन पर 50,000 रूपए का जुर्माना लगाया और कहा कि इस मामले में अब किसी और याचिका पर विचार नहीं होगा.
हरेन पंड्या की 26 मार्च, 2003 को अहमदाबाद के लॉ गार्डन इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उस समय वह सुबह की सैर पर निकले थे. उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का कट्टर विरोधी माना जाता था.
हरेन के पिता विठ्ठलभाई पंड्या ने अपने बेटे की हत्या के लिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को दोषी बताया था.
कई साल तक इस मामले में शांत रहने के बाद हरेन की पत्नी जागृति पंड्या ने 2007-08 में अपने ससुर विठ्ठलभाई की तरह मोदी और शाह को अपने पति की हत्या के लिए ज़िम्मेदार बताया था. हालांकि, वो खुद बाद में बीजेपी में शामिल हो गई थीं.
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