विधान सभा चुनाव 2022: वोट कैसे करें? बस इन बातों का रखिए ध्यान

मतदान की प्रतीकात्मक तस्वीर
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2022 के शुरुआती महीनों में भारत के पांच राज्यों में चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में चुनाव होना हैं.

इन राज्यों में चुनाव में वोट डालते वक़्त आपको यह ध्यान रखना होगा आप की उम्र कितनी है? याद रखें कि वोट देने के लिए आपकी उम्र कम से कम 18 साल ज़रूर होनी चाहिए. अगर वोटर लिस्ट में आपका नाम रजिस्टर हो गया हो तो आप मतदान केंद्र पर जाइए.

आपकी बारी आने पर एक पोलिंग ऑफ़िसर आपकी पहचान की पुष्टि करेगा. आईडी कार्ड के तौर पर आपके पास मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या बैंक पासबुक में से कोई एक चीज़ लेकर जाएं.

आपको वोटर रजिस्टर पर दस्तख़त करने होंगे और इसके बाद दूसरा पोलिंग ऑफ़िसर आपको एक दस्तख़त की गई वोटर पर्ची देगा. इसके बाद एक तीसरा पोलिंग ऑफ़िसर आपकी वोटर पर्ची लेकर बैलट बटन दबाएगा. ये बटन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की कंट्रोल यूनिट पर लगा होता है.

अब आप अपना वोट देने के लिए तैयार हैं. आपको वोटिंग वाले कमरे का रास्ता बताया जाएगा जहां आप वोटिंग के लिए रखी हुई ईवीएम मशीन देखेंगे. यही मशीन आपका वोट दर्ज करेगी.

लोकसभा चुनाव 2019

लेकिन ज़रा इंतज़ार कीजिए.... ये ईवीएम क्या है और इसपर कैसे वोट करना है?

ईवीएम पर बटन दबाते वक़्त क्या ध्यान रखना है?

दरअसल ये एक मशीन है जिस पर बटन के बगल में चुनाव में भाग ले रहे उम्मीदवारों के नाम लिखे होते हैं और साथ ही उनकी पार्टियों के चुनाव चिन्ह छपे होते हैं.

उम्मीदवार का नाम उस इलाके में प्रचलित भाषा में लिखा होता है, जहां वोटिंग हो रही हो.

उम्मीदवार की पहचान के लिए चुनाव चिन्ह दिया जाता है ताकि अनपढ़ मतदाताओं को सहूलियत हो.

जब आप वोट देने के लिए तैयार हो जाएं, अपनी पसंद के उम्मीदवार के बगल वाला नीला बटन प्रेस करें.

रुकिये... थोड़ा ठहर भी जाइए... इसका मतलब ये नहीं हुआ कि आपका वोट दर्ज हो गया है.

ये तभी होगा जब आप बीप की आवाज़ सुन लें और ईवीएम की कंट्रोल यूनिट का इंडिकेटर बंद हो जाए. आपने अपना वोट दे दिया है!

लोकसभा चुनाव 2019

मतदान के बाद मशीन के साथ क्या होता है?

जब पोलिंग ऑफ़िसर ईवीएम मशीन पर मौजूद 'क्लोज़' बटन प्रेस कर देते हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि उस ईवीएम पर और वोट देना बंद.

इसके साथ कोई छेड़छाड़ न हो, इसलिए इसे पुराने तरीक़े से सीलबंद किया जाता है. साथ में चुनाव आयोग की तरफ़ से सुरक्षित स्ट्रिप लगा होता है और साथ में एक सीरियल नंबर होता है.

मतदान के ठीक पहले ईवीएम मशीन को खोला जाता है.

ईवीएम
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मतगणना के दिन क्या होता है?

मतगणना के दिन गिनती शुरू होने से पहले काउंटिंग स्टाफ़ और उम्मीदवारों के एजेंट ईवीएम मशीनों का मुआयना करते हैं.

एक रिटर्निंग ऑफ़िसर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है.

जब रिटर्निंग ऑफ़िसर इस बात से आश्वस्त हो जाता है कि वोटिंग मशीन के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है तो वह ईवीएम पर लगे रिज़ल्ट बटन को प्रेस कर देता है.

रिटर्निंग ऑफ़िसर हरेक उम्मीदवार को कुल पड़े वोटों का हिसाब करता है.

तसल्ली हो जाने के बाद वो रिज़ल्ट के सर्टिफिकेट पर दस्तखत करता है और उसे चुनाव आयोग को सौंप देता है.

इसके बाद चुनाव आयोग अंतिम रिज़ल्ट को अपनी वेबसाइट पर जारी कर देता है.

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