जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों ने क्यों किया विवाद?

विरोध प्रदर्शन
    • Author, मीना कोटवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पिछले दो हफ़्तों से कुछ छात्र प्रोफे़सर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

छात्रों का आरोप है कि उनके प्रोफ़ेसर उन पर अभद्र टिप्पणियां करतें हैं. अगर कोई इसका विरोध करने की कोशिश करता है तो वो धमकाने लगते हैं. इनका दावा है कि जो प्रोफ़ेसरों की बात मानता है उसे अच्छे नंबर से पास करते हैं.

ये शिकायतें फाइन आर्ट में अप्लाइड के छात्रों की है. पिछले 14 दिनों से छात्र अप्लाइड आर्ट्स विभाग के विभागाध्यक्ष हफिज़ अहमद के ख़िलाफ़ अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

सोमवार को जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रोक्टर ने बताया की छात्रों की शिकायत पर एचओडी को तीन महीने की छुट्टी पर भेज दिया गया है. तब तक के लिए विभागाध्यक्ष का पद किसी और को सौंपा जाएगा.

जामिया मिलिया इस्लामिया के जनसंपर्क अधिकारी और मीडिया संयोजक अहमद अज़ीम ने बताया कि इस मामले के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर दी गई है, जिसमें छह विभागों के डीन शामिल हैं. कमेटी से आग्रह किया गया है कि वो दो हफ़्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दें.

विरोध कर रहे छात्रों की मांग है कि पहले विभागाध्यक्ष को सस्पेंड किया जाए तब जांच की जाए. एचओडी के पद के साथ इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा सकती.

जामिया के प्रोक्टर

मामला क्या है?

सात फ़रवरी को छात्रों ने प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के लिए एक मार्च निकाला था. इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और प्रोफ़ेसर को बचाने वाले छात्रों के बीच काफ़ी झड़प हुई थी, जिसमें कुछ छात्रों को चोट लगी थी.

उस समय अकांक्षा कौशिक वहीं मौजूद थी, जो एमएएफ की छात्र हैं. उनका कहना है, ''इतने दिनों से शांति से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके छात्रों ने हमें मारने की कोशिश की. इसमें मुझे चोट लगी और दीपिका भट्ट नाम की लड़की को तो हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा.''

अकांक्षा
इमेज कैप्शन, मार्च को आगे बढ़ाती अकांक्षा कौशिक

दीपिका बताती हैं, ''वे पूरे डिपार्टमेंट में इकलौते टीचर हैं और इसलिए वे हिटलरगिरी करते हैं. जैसे सेक्शुअल कॉमेंट्स और मैसेज करना, मार्क्स न देना, सिर्फ़ अपने फेवरेट बच्चों को ही मार्क्स देना.''

''अगर कोई अपना काम समय पर नहीं देता उनसे पूछते हैं कि रात को तीन बजे तक जगकर क्या करती हो. रात भर किससे बात करती हो, एक ही लड़के से बात करती हो या चार लोगों से बात करती हो और अगर तुम दर्द में हो तो सुबह जल्दी आओ मैं तुम्हें योगा या वर्कआउट करना सिखाऊंगा. कुछ लड़कियों को उनकी ही फोटो क्रॉप कर के भेजते हैं.''

विरोध प्रदर्शन

बीबीसी से बात करने पर दीपिका भट्ट कांप रही थीं. दीपिका वही लड़की हैं जिन्हें सात फ़रवरी के दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान चोट लगी थी.

''उस दिन भी हम विभाग में ही मार्च निकाल रहे थे. रजिस्ट्रार ने हमें आश्वासन दिया कि आपके एचओडी को बदल दिया जाएगा. आप जाकर अपनी क्लास लीजिए. इसलिए हम एचओडी से बात करने गए लेकिन उन्होंने हमसे बात ही नहीं की. उनके फेवरेट स्टूडेंट ने मारपीट शुरू कर दी उस दौरान मेरे साथ बतमीजी भी हुई. मुझे धक्का मारकर गिरा दिया गया और गिराने के बाद वे मुझ पर से चलकर गए. थोड़ी देर बाद में बेहोश हो गई और मुझे हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया.''

दीपिका भट्ट
इमेज कैप्शन, दीपिका भट्ट

दीपिका का दावा हैं कि वो कई बार यहां की इंटरनल कम्पलेंट कमेटी (आईसीसी) के पास गए लेकिन पहले उन्होंने कम्पलेंट लेने से मना कर दिया.

बाद में काफ़ी मशक्कत के बाद आवेदन लिया गया. जो भी शिकायत करने में शामिल हैं उन्हें अलग-अलग अकेले बुलाया जाता है और डराया जाता है कि अगर शिकायत झूठ निकली या प्रूफ नहीं हो पाई तो आपको कॉलेज से निकाला जा सकता है.

बीबीसी ने इस मामले की और जानकारी के लिए जामिया की इंटरनल कम्पलेंट कमिटी (आईसीसी) की सबिहा अंजुम ज़ैदी से बात की लेकिन उन्होंने बात नहीं की और कॉल काट दिया.

'मदद करने पर मिली सज़ा'

छात्रों की शिकायत पर उन तीन छात्रों को अभी निष्कासित कर दिया गया है जिन पर दीपिका, आकांक्षा और अन्य छात्रों ने मारपीट का आरोप लगाया है.

विश्वविद्यालय के बाहर तैनात गार्ड्स और पुलिस

मोहम्मद वासिक़, माज़ और एक अन्य विद्यार्थी को 15 दिन के लिए ससपेंड कर दिया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों के साथ मारपीट की है.

माज़ ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष में हैं जबकि बाकि मास्टर कर रहे हैं. मोहम्मद वासिक़ और अन्य विद्यार्थी का कहना है कि वो एजुकेशन टूर से एक दिन पहले ही लौटे थे और उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता था.

माज़ बताते हैं, ''मैं तो अभी प्रथम वर्ष का ही छात्र हूं. मुझे तो पता भी नहीं क्या हो रहा था. मुझसे मदद मांगी और मैंने कर दी. लेकिन मदद करने की इतनी बड़ी सज़ा दे दी गई कि अब मैं अपने घरवालों के सामने भी नहीं जा पा रहा.''

वासिक़ कहते हैं कि अकांक्षा उनकी दोस्त है पर उन्होंने ऐसी शिकायत क्यों की ये मुझे नहीं पता.

तीसरे छात्र कहते हैं कि वो तो सर से काम से मिलने गया था, लेकिन मिलने नहीं दिया और मैं वहीं फंस गया.

हालांकि तीनों छात्रों का कहना है वो वहां थे और उन्हें गार्ड ने बुलाया था और कहा था कि इस भीड़ से अहमद सर को बाहर निकलने में मदद कर दो.

विरोध प्रदर्शन

प्रोफेसर हफिज़ अहमद का पक्ष

हफिज़ अहमद जामिया मिलिया इस्लामिया में 33 साल से जुड़े हैं. उन्होंने वहीं से पढ़ाई की और अब वे 1993 से वहीं पढ़ा रहे हैं. वो कहते हैं कि किसी समय ये छात्र उनकी ताक़त हुआ करते थे और आज वही ख़िलाफ़ खड़े हैं.

प्रो. अहमद का कहना है, ''इस प्रदर्शन पर प्रशासन की पूरी नज़र है लेकिन मेरे पास किसी भी तरह की कोई कम्पलेंट नहीं आई है. मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है. मुझे विश्वविद्यालय प्रशासन पर पूरा विश्वास है. सच आने में भले ही समय लगे लेकिन वो सामने ज़रूर आता है. झूठ को बार-बार बोलने पर सच नहीं बन सकता.''

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