आनंद तेलतुंबड़े को भीमा कोरेगांव मामले में पुणे पुलिस ने तड़के 4 बजे गिरफ़्तार किया: प्रेस रिव्यू

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पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में लेखक, गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट में प्रोफ़ेसर और सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबड़े को गिरफ़्तार किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक पुलिस ने आनंद तेलतुंबड़े को प्रतिबंधित माओवादियों से संबंध रखने के शक के आधार पर शनिवार की सुबह 4 बजे मुंबई से गिरफ़्तार किया है.

एसीपी शिवाजी पवार ने तेलतुंबड़े की गिरफ़्तारी की पुष्टि की और बताया कि उन्हें शनिवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा जहां पुणे पुलिस मामले की आगे की जांच के लिए उनके हिरासत की मांग करेगी.

अख़बार के मुताबिक शुक्रवार को पुणे सेश कोर्ट ने तेलतुंबड़े की अग्रिम ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था. इस दौरान विशेष न्यायाधीश केडी वदाने ने कहा था कि उनके ख़िलाफ़ जांच अधिकारी ने पर्याप्त सबूत पेश किए हैं.

मामले की जांच कर रही पुणे पुलिस ने अगस्त 2018 में देश के अलग-अलग हिस्सों से पांच लोगों को गिरफ़्तार किया था. दरअसल, भीमा कोरेगांव में एक विजय स्तंभ (युद्ध समारक) के नज़दीक इकट्ठा होकर देशभर के दलित समुदाय तीसरे एंगलों-मराठा युद्ध में जीतने वाली महार रेजिमेंट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.

दो साल पहले इसके (तीसरे एंगलों-मराठा युद्ध के) दो सौ साल पूरे होने के मौक़े पर हो रहे जश्न में हिंसा भड़क गई थी. जिसकी चपेट में आस-पास के इलाक़े आए थे. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत के बाद पूरे राज्य में ज़ोरदार प्रदर्शन हुए थे.

BUDGET 2019: कहीं वाह तो कहीं सिर्फ़ आह

शुक्रवार को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अंतरिम बजट पेश किया किए जाने के बाद आज के सभी अख़बारों के पहले पन्ने बजट से जुड़ी ख़बरों से भरे पड़े हैं.

द हिंदू ने इसे SOP OPERA हेडलाइन दी है तो इंडियन एक्सप्रेस ने Directed Benefit Transfer लिखा.

हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- Interim budget, Final pitch. अमर उजाला लिखता है- सियासी स्ट्राइक, चुनाव से पहले याद आया मध्य वर्ग.

हिंदुस्तान ने अपने फ़्रंट पेज पर लिखा है- #किसान #नौकरीपेशा #मजदूर #महिला, बहुमत पर नज़र.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की हेडिंग है- Ahead of polls, NDA woos urban& rural India. यानी चुनाव से पहले एनडीए की शहरी और ग्रामीण भारत को लुभाने की कोशिश.

कौन बनेगा सीबीआई निदेशक?

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ख़बर है कि सीबीआई का नया डायरेक्टर चुनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुई दूसरी बैठक में भी कोई फ़ैसला नहीं लिया जा सका.

इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे. इससे पहले पैनल ने 24 जनवरी को भी एक बैठक की थी लेकिन उसमें सीबीआई निदेशक के नाम पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका था.

वहीं, दूसरी तरफ़ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वो नए सीबीआई निदेशक की तुरंत नियुक्ति करे. फ़िलहाल एम. नागेश्वर राव सीबीआई के अंतरिम निदेशक पद का कार्यभार संभाल रहे हैं.

'बैलट पेपर से नहीं होंगे चुनाव'

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बैलट पेपर से वोटिंग कराए जाने संभावना से साफ़ इनकार किया है.

कई विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम में गड़बड़ी का हवाला देते हुए इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे और बैलट पेपर से मतदान कराए जाने की मांग की थी, जिसे चुनाव आयुक्त ने ख़ारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, ''हम वापस बैलट पेपर की ओर नहीं जा रहे हैं. हमारे देश में पिछले दो दशक से ज़्यादा वक़्त से मतदान के लिए ईवीएम का इस्तेमाल हो रहा है और ये चुनाव आयोग की नीति भी है. मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई बदलाव होने वाला है.''

प्रशासन से मांगी बेटे की बलि की इजाज़त

हिंदुस्तानी टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार बिहार के बेगूसराय ने प्रशासन से नरबलि की इजाज़त मांगी है.

अख़बार लिखता है कि सोशल मीडिया पर तांत्रिक का एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वो कह रहा है कि इंसानों की बलि देना कोई अपराध नहीं है और वो सबसे पहले अपने इंजीनियर बेटे की बलि देगा.

इस व्यक्ति ने बेगूसराय के एसडीओ (सदर) को 29 जनवरी को एक चिट्ठी भी भेजी थी और चिट्ठी में उसने प्रशासन से नरबलि की अनुमति मांगी थी.

सोशल मीडिया पर इस कथित चिट्ठी के स्क्रीनशॉट्स भी मौजूद हैं लेकिन एसडीओ संजीव कुमार चौधरी का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई चिट्ठी नहीं मिली है.

उन्होंने कहा कि नरबलि एक गंभीर अपराध है और इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जाएगी.

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