क्या सपा-बसपा के साथ आने से हिल गई है बीजेपी?

मायावती और अखिलेश यादव
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

उत्तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में हुए गठजोड़ के बाद राजनीतिक तौर पर रोचक हो गया है.

समाजवादी पार्टी को कई और दलों का समर्थन भी मिल गया है लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इन दो सीटों पर 'पार्टी उम्मीदवार मजबूत हैं' और उसके समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का कोई सवाल नहीं है.

उपचुनाव में मुक़ाबला कड़ा होता दिख रहा है. वहीं प्रचार के दौरान ज़ुबानी धार भी तल्ख़ होती जा रही है.

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सोमवार को गोरखपुर में जनसभाएं कीं और विरोधी दलों का जमकर उपहास किया.

उन्होंने कहा, "जिस तरह से तूफ़ान आने पर सांप और छछुंदर एक साथ आ जाते हैं, वैसे ही सपा और बसपा राजनीतिक रूप से साफ़ हो जाने के बाद एक-दूसरे के साथ आ गए हैं."

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट योगी आदित्यनाथ के इस्तीफ़े से खाली हुई है.

योगी के हमले

उपचुनाव के लिए सपा और बसपा ने हाथ भले ही मिला लिया हो लेकिन आक्रामक प्रचार के मामले में वो अभी भी सत्तारूढ़ बीजेपी से काफी पीछे दिख रहे हैं.

बीजेपी के चुनाव प्रचार की कमान ख़ुद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने संभाल रखी है. त्रिपुरा और नगालैंड में जीत की चर्चा करते हुए सोमवार को गोरखपुर में उन्होंने सपा और बसपा पर जमकर हमला बोला.

इससे पहले योगी ने रविवार को फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में भी दो जनसभाएं कीं.

योगी ने पहले इलाहाबाद में और फिर गोरखपुर में भी पिछली सरकारों से अपनी सरकार की तुलना कुछ इस तरह की, "पिछली सरकारें कभी अयोध्या में प्रतिबंध लगाकर तो कभी आयोजनों को रोक करके त्योहारों पर प्रतिबंध लगाती थीं. जब से बीजेपी की सरकार है, ऐसा नहीं हुआ. लोग कहते थे कि होली ज़ुमे के दिन पड़ रही है. हमने कहा कि ज़ुमा तो साल में 52 दिन आएगा, होली तो सिर्फ़ एक दिन आएगी. होली में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए."

योगी ने यही बात एक दिन पहले फूलपुर की जनसभाओं में भी की थी और कहा था कि इसी वजह से ज़ुमे का समय दो घंटे बढ़ाना पड़ा. जानकारों का कहना है कि योगी ने इसके ज़रिए चुनावी एजेंडे को भी तय कर दिया है.

बीजेपी का झंडा

हिले हुए हैं योगी?

वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं, "भाजपा और योगी को पता है कि उन्हें वोट कैसे मिलेगा. सपा और बसपा के साथ आने से वो दिखाएं भले ही कि उन्हें फ़िक्र नहीं है लेकिन अंदर से हिले हुए हैं. गोरखपुर में तो ख़ासकर योगी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. ऐसे में अपने समर्पित और कट्टर हिन्दू वोट को खिसकने नहीं देना चाहते."

वहीं बसपा का साथ मिलने के बाद गोरखपुर और फूलपुर में समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय लोकदल ने भी समर्थन देने की घोषणा की है.

निषाद पार्टी और पीस पार्टी तो पहले ही समर्थन दे चुकी हैं.

इस बीच, ख़बर ये भी रही कि कांग्रेस भी दोनों सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने के बावजूद सपा को समर्थन दे सकती है लेकिन कांग्रेस नेता इस ख़बर को कोरी अफ़वाह ही बताते रहे.

कांग्रेस नेता और राज्य सभा सदस्य प्रमोद तिवारी का कहना था कि उपचुनाव में तो नहीं लेकिन आगे ऐसा हो सकता है. उन्होंने कहा, "अब मुश्किल से एक हफ़्ता चुनाव में बचा है. दूसरे हमारे उम्मीदवार बेहद मज़बूत स्थिति में हैं.

इसलिए अभी तो नहीं लेकिन आगे हमारी कोशिश होगी कि भाजपा के विरुद्ध मतों का बंटवारा न होने पाए."

कांग्रेस ने फूलपुर से मनीष मिश्र और गोरखपुर से सुरहिता करीम को अपना उम्मीदवार बनाया है. गोरखपुर सीट आदित्यनाथ योगी के इस्तीफ़े से जबकि फूलपुर सीट से उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के इस्तीफ़े से खाली हुई है.

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