ज़ायरा वसीम जैसी ही है इनकी भी कहानी

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो
    • Author, भूमिका राय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

ज़ायरा वसीम के साथ एयर विस्तारा की फ़्लाइट में हुई छेड़खानी के मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.

मुंबई पुलिस ने सेक्शन 354 और पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज़ किया है. ज़ायरा के साथ ये घटना दिल्ली से मुंबई जाते समय हुई.

ज़ायरा ने लिखा कि जब वो आधी नींद में थीं तो पीछे बैठा शख़्स अपने पैर से उनकी पीठ और गर्दन छू रहा था.

निश्चित तौर पर मामला बेहद गंभीर है. लेकिन जो ज़ायरा के साथ हुआ है, उससे कई लड़कियां आए दिन दो-चार होती हैं.

कई बार उन्हें मदद मिल जाती है और कई बार खुद कदम उठाना पड़ता है.

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो
इमेज कैप्शन, मीना कोटवाल

किसी ने बस में तो किसी ने मेट्रो में...

दिल्ली में रहने वाली महिला पत्रकार मीना कोटवाल बताती हैं कि वो भी एकबार इस तरह की घटना का शिकार हो चुकी हैं.

वो कहती हैं, "मम्मी-पापा के साथ दिल्ली के उत्तम नगर से बस में सफ़र कर रही थी. बस में ज़्यादा भीड़ तो नहीं थी, लेकिन एक आदमी पास आकर खड़ा हो गया. वो मेरे बहुत क़रीब खड़ा था. मुझे पता चल रहा था कि वो कुछ ग़लत हरकत कर रहा है."

मीना कहती हैं, "बस में मम्मी-पापा थे, लेकिन उन्हें बता नहीं पाई. मेरे पास एक सेफ़्टी पिन थी. मैंने उसे चुभो दी, जिसके बाद वो मुझसे दूर जाकर खड़ा हो गया."

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो
इमेज कैप्शन, प्रज्ञा श्रीवास्तव

रोज़-रोज़ होने वाली...

रोज़ाना मेट्रो में सफ़र करने वाली प्रज्ञा कहती हैं कि हम हर रोज़ ऐसी घटनाओं से दो-चार होते हैं.

एक हालिया घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, "मैं कुछ लोगों के साथ दिल्ली मेट्रो में सफ़र कर रही थी. एक अधेड़ दरवाज़े पर खड़ा था. उसके पास कुछ सामान था. चावड़ी बाज़ार उतरते समय उसने अपना हाथ मेरे प्राइवेट पार्ट पर मारा और बाहर निकल गया."

प्रज्ञा कहती हैं, "ये सब सिर्फ़ कुछ सेकेंड्स में हो गया. इस हरक़त के बाद वो झट से उतर गया. मैं न उसे रोक सकी न कुछ कह ही पाई. रोज़-रोज़ होने वाली इन छेड़खानियों का एक ही जवाब है कि हम बोलें."

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो

गंदी हरकत

दिल्ली में रहने वाले भरत कहते हैं कि हर रोज़ मेट्रो में सफ़र करता हूं. आए दिन ऐसी हरकतें देखता हूं. उस दिन कश्मीरी गेट से शाहदरा जा रहा था.

उन्होंने बताया, "महिला कोच में भीड़ बहुत ज़्यादा थी. एक लड़की जनरल कोच में चढ़ी. एक लड़का उसके पीछे खड़ा था और भीड़ का फ़ायदा उठाते हुए गंदी हरकत कर रहा था."

भरत कहते हैं, "मैंने उसकी तस्वीर ले ली और फिर उसे दिखाया. वो बुरी तरह डर गया और माफ़ी मांगने लगा. उसने माफ़ी मांग ली, लेकिन ये हरक़तें रोज़ होती हैं.

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो

क्या है सेक्सुअल हैरेसमेंट

सेक्शुअल हैरेसमेंट ऐट वर्कप्लेस एक्ट 2013 के अनुसार यदि कोई शख्स इनमें से कोई भी हरक़त या व्यवहार कर रहा तो वह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आएगा.

- अगर कोई शख्स ग़लत तरीके से छू रहा है तो

- अगर कोई शख़्स सेक्शुअल फ़ेवर की डिमांड कर रहा हो तो

- अगर कोई शख़्स सेक्शुअल इशारे कर रहा हो तो

- पोर्नोग्राफ़ी दिखा रहा हो तो

- इसके अलावा कोई भी अवांछित शारीरिक हरकत, बोलचाल या इशारे जिससे सेक्शुअल नेचर का आभास हो

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो

क्या है सज़ा का प्रावधान?

इस बारे में जब हमने महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि किसी को भी ग़लत तरीक़े से छूना, देखना या ग़लत शब्दों का इस्तेमाल करना छेड़खानी है. अगर कोई पीछा कर रहा हो तो भी यह छेड़खानी के दायरे में आता है.

एडवोकेट रेखा अग्रवाल कहती हैं कि छेड़खानी के मामले में आईपीसी की धारा 354 के तहत तीन साल की सज़ा हो सकती है.

वो कहती हैं कि निर्भया केस के बाद जस्टिस वर्मा कमेटी के सुझावों के बाद आईपीसी की धारा 354 के चार सब-क्लॉज़ बना दिए गए हैं. साथ ही सेक्शन 354 की परिभाषा को और बड़ा कर दिया गया है जिसके तहत हाथ से छूना, पांव से छूना, घूरना, अश्लील गाने सुनाना, अश्लील तस्वीर दिखाकर किसी को शर्मिंदा करने की कोशिश करना या फिर किसी का पीछा करना- सबमें इस धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है.

ज़ायरा मामले में पोक्सो लगाया गया है क्योंकि वो नाबालिग हैं. रेखा बताती हैं कि पोक्सो के तहत सबसे बड़ी बात ये है कि आरोपी को संदेह का लाभ नहीं मिलता है.

रेखा शर्मा कहती हैं कि आईपीसी की धारा 354 के अलावा आईपीसी की धारा 509 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है. इसके तहत एक साल की सज़ा हो सकती है.

छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, ज़ायरी वसीम, दंगल, कानून, पॉक्सो

सबसे पहले क्या करना चाहिए?

रेखा शर्मा कहती हैं कि सबसे पहले तो अपने आस-पास मदद खोजनी चाहिए. 100 नंबर डायल करना चाहिए. पुलिस से मदद लेनी चाहिए.

महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम कहती हैं कि सबसे पहले शोर मचाना चाहिए.

पुलिस में शिकायत दर्ज़ करानी चाहिए. वो कहती हैं कि अक्सर ऐसे मामलों में महिलाएं शिकायत नहीं करती हैं जिससे ऐसी चीज़ें बढ़ती जाती हैं.

ज़ायरा वसीम के साथ हुए हादसे का ज़िक्र करते हुए वो कहती हैं कि उस स्थिति में क्रू मेंबर्स को सूचित करना विकल्प है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)