ज़मीन में क्यों धंसे बैठे हैं ये किसान?

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जयपुर के निकट नींदड़ गांव में किसानों ने भू समाधि सत्याग्रह शुरू किया है. सरकार के भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने गड्ढे खोदकर खुद को ज़मीन के भीतर गाड़ लिया है. तस्वीरों में देखिए किसानों का यह अनोखा आंदोलन.

किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, किसान पिछले तीन दिन से खुद को इन गड्ढों के भीतर समाहित किये हुए है. गड्ढे में बैठे एक किसान ने गुस्से में कहा, ''एक इंच जमीन भी नहीं देंगे, चाहे मेरी जान चली जाये, सरकार विकास नहीं जमीन का कारोबार करना चाहती है.''
किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, इस आंदोलन में महिलाएं भी शामिल हो गई हैं. वे पिछले दो दिन से आंदोलन में पुरुषों का साथ दे रही हैं. आंदोलन में शामिल एक महिला छोटा बाई कहती हैं, ''उसके परिवार में एक बीघा जमीन है और पांच बेटों का परिवार है, उनकr रोजी-रोटी का और कोई जरिया नहीं है. क्या हम अपने बच्चो को सड़क पर छोड़ दें?
किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, किसानों के मुताबिक सरकार 1300 बीघा ज़मीन का अधिग्रहण करना चाहती है. आंदोलन की जगह पर दिन में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस अनूठे संघर्ष में उतरे किसान बेहोश भी हो रहे हैं.
किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, आंदोलन स्थल पर नींदड़ और उसके आस-पास की ढाणियों के लोग भी जमा हो गए हैं. नींदड़ के किसान बीरबल चौधरी कहते है -सरकार के इस कदम से बीस हजार लोग प्रभावित होंगे, सरकार हमें अपनी जड़ों से उखाड़ रही है पर उसके पास बसाने का कोई ठोस कार्यक्रम नहीं है.
किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, आंदोलन में शामिल न्याति बाई की उम्र 80 साल है पिछले दो दिन से धरती पर खोदा गड्ढा ही उनका बसेरा है. न्याति बाई बहुत गुस्से में कहती हैं, ''ये विकास है या विनाश.''
किसानों का आंदोलन
इमेज कैप्शन, जमीन अधिग्रहण की योजना जयपुर विकास प्राधिकरण ने बनाई है. प्राधिकरण को इससे एक हजार करोड़ रूपये मिलने की उम्मीद है. विवाद बढ़ा तो सरकार और किसानो में बातचीत भी हुई. मगर इसका कोई नतीजा नहीं निकला. इससे पहले हाल में शेखावटी क्षेत्र और उत्तरी राजस्थान में किसानो ने बड़ा आंदोलन किया था. वे किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग कर रहे थे..

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