'काबुल के कसाई' से था हिज़बुल का नाता

हिजबुल मुजाहिद्दीन के शीर्ष नेता सैयद सलाहुद्दीन
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अमरीका ने भारत-प्रशासित कश्मीर के सबसे बड़े सशस्त्र समूह हिज़बुल मुजाहिदीन को एक विदेशी चरमपंथी संगठन घोषित कर दिया है.

अमरीका ने इस संगठन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिए हैं और कहा है कि देश में मौजूद संगठन की संपत्ति को ज़ब्त किया जाएगा.

हिज़बुल मुजाहिदीन ने 1989 में भारतीय प्रशासन के ख़िलाफ़ कश्मीर में सशस्त्र विद्रोह छेड़ा था. इस साल के आरंभ में अमरीका ने पाकिस्तान में मौजूद इस संगठन के कमांडर मोहम्मद यूसुफ़ शाह उर्फ़ सैयद सलाहुद्दीन को आतंकवादी घोषित किया था.

भारत पाकिस्तान पर हिज़बुल विद्रोहियों को शस्त्र और प्रशिक्षण देने के आरोप लगाता रहा है, हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

कैसे अस्तित्व में आया हिज़बुल मुजाहिद्दीन

माना जाता है कि हिज़बुल मुजाहिदीन पहला चरमपंथी संगठन है जिसमें अनिवार्य रूप से कश्मीरियों को सदस्य बनाया गया और ज़िम्मेदारियां दी गईं.

इस संगठन को पाकिस्तान समर्थक माना जाता है और 1990 के दशक में कश्मीरी विद्रोहियों का सबसे बड़ा चरमपंथी समूह माना जाता है.

आज भी ये संगठन उन कुछ समूहों में से एक है जो कश्मीर में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है.

1989 में बने इस संगठन के कभी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया सेवा आईएसआई के साथ निकट संबंध हुआ करते थे.

अमरीकी विदेश मंत्रालय

अमरीकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार ये संगठन आधिकारिक तौर पर जम्मू कश्मीर से भारत के अलग हो कर पाकिस्तान में शामिल किए जाने का समर्थन करता है.

अमरीका के अनुसार ये संगठन पाकिस्तान की सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक दल जमाल-ए-इस्लामी की सशस्त्र शाखा है.

मौजूदा दौर में इसका निशाना भारतीय सुरक्षा बल और जम्मू कश्मीर में मौजूद नेता हैं. संगठन ने कश्मीर में विद्रोहियों से मिल कर कई अभियानों को अंजाम दिया है.

गुलबुद्दीन हिकमतयार

'क़ाबुल के कसाई' से नाता

माना जाता है कि इस संगठन का करीबी नाता अफग़ानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री रहे और 80 के दशक में मुजाहिद्दीनों की अगुवाई करने वाले कबायली नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार से भी रहा है (हिकमतियार को बुचर ऑफ़ काबुल यानी काबुल का कसाई भी कहा जाता है).

एक समय में हिज़बुल लड़ाकों को अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद कैंपों में ट्रेनिंग दी जाती थी.

1990 के दशक के आख़िर में, तालिबान ने इन कैंपों को तबाह कर दिया जिसके बाद ये कैंप पाकिस्तान के हज़ारा इलाके और पाकिस्तानी कश्मीर में चले गए.

90 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान में जो गृह युद्ध हुआ उसमें गुलबुद्दीन हिकमतयार की भूमिका बहुत विवादित रही है. ये हिंसा का दौर था जिसमें अफ़ग़ानों ने तालिबान का स्वागत किया था.

गुलबुद्दीन हिकमतयार अलग-थलग पड़ गए और जब तालिबान सत्ता में आई तो उन्हें काबुल से भागना पड़ा.

आईएसआई से नाता

डेविड हेडली

साल 2008 में हुए मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में शिकागो की एक अदालत में सरकारी गवाह डेविड हेडली ने कहा था कि इन हमलों में पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए- तैयबा दोनों का हाथ था.

हेडली का दावा था कि आईएसआई लश्कर, हिज़्बुल मुजाहिदीन और दूसरे चरमपंथी संगठनों को सहायता देता था.

हालांकि हाल में मनोबल टूटने का कारण संगठन पर काफी प्रभाव पड़ा. संगठन को सबसे बड़ा झटका 2001 में लगा जब भारतीय कश्मीर संगठन के शीर्ष क्षेत्र कमांडर माजिद डार ने भारतीय सेना के ख़िलाफ़ एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी.

उनके इस कदम से पाकितान में संगठन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन सकते में थे. इस कारण संगठन में पड़ी दरार बढ़ी और बाद में माजिद डार की हत्या कर दी गई.

हालांकि सैयद सलाहुद्दीन संगठन का नियंत्रण करते हैं, लेकिन संगठन के रैंको में कमी आई है और विद्रोह जारी रखने की उनकी क्षमता पर भी सवाल उठने लगे.

हिज़बुल नेता सैयद सलाहुद्दीन

सैयद सलाहुद्दीन

26 जून को जारी एक विज्ञप्ति में अमरीकी विदेश मंत्रालय ने हिज़बुल नेता सैयद सलाहुद्दीन का नाम अंतरराष्ट्रीय आंतकवादियों की सूची में शामिल किया और उन्हें अमरीकी सुरक्षा और विदेश नीति के लिए ख़तरा माना.

अमरीका के अनुसार सितंबर 2016 में सलाहुद्दीन ने शपथ ली थी कि वो कश्मीर में शांति बहाल करने के किसी प्रस्ताव को सफल नहीं होने देंगे. उन्होंने आतामघाती हमलों के लिए ज़्यादा कश्मीरियों को ट्रेनिंग देने और कश्मीर घाटी को 'भारतीय फ़ौजों की कब्रगाह' बनाने की धमकी दी थी.

भारत सरकार सैयद सलाहुद्दीन को कई आतंकवादी घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार मानती है. भारत के मुताबिक़ सैयद सलाहुद्दीन पाकिस्तान में रहकर कश्मीर में अभियान चला रहे हैं.

सैयद सलाहुद्दीन

सलाहुद्दीन भारत विरोधी बयानों के साथ ही जिहादी समूहों को कश्मीर में आकर कारर्वाई करने के लिए आमंत्रित करने के लिए चर्चा में आते रहे हैं.

भारत ने मई 2011 में पाकिस्तान को 50 मोस्ट वांटेड लोगों की सूची सौंपी थी. इस सूची में सलाहुद्दीन का भी नाम थी.

मौजूदा स्थिति

हिजबुल मुजाहिदीन अब कुछ अलग-अलग जगहों तक ही सीमित है.

कभी गांवों में अपने पैर पसार चुके इस संगठन के कुछ सदस्य अब गांवों की बजाय पहाड़ी ठिकानों पर छिप कर रहते हैं.

ज़ाकिर मूसा

हाल में हिज़बुल मुजाहिदीन से जुड़े ज़ाकिर मूसा (असली नाम ज़ाकिर रशीद भट) ने सशस्त्र संगठन 'अंसार ग़ज़वात-उल-हिंद' की कमान अपने हाथों में ले ली है.

चरमपंथी संगठन अल-कायदा ने भारत प्रशासित कश्मीर में हाल में इस नए जिहादी गुट के गठन की घोषणा की है.

बताया जाता है कि इसी साल 13 मई को मूसा ने हिज़बुल से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे. उनका कहना था कि वो 'एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के लिए अपनी शहादत' नहीं देंगे.

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