मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर सरकार क्या हासिल करना चाहती है?

मुगलसराय जंक्शन
    • Author, रौशन जायसवाल
    • पदनाम, मुगलसराय से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

एशिया के सबसे बड़े रेलवे मार्शलिंग यार्ड और भारतीय रेलवे का 'क्लास-ए' मुगलसराय स्टेशन एक बार फिर चर्चा में है.

इस बार अपनी व्यापकता के लिए नहीं, बल्कि नाम बदले जाने को लेकर. इसका नाम बदलकर पंडित दीन दयाल स्टेशन रखे जाने का प्रस्ताव है. सरकार के इस फैसले पर मुगलसराय के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है.

बिहार सरकार की शिक्षा विभाग में नौकरी करने वाले मुगलसराय के लालबहादुर ने बीबीसी हिंदी को बताया कि न केवल मुगलसराय स्टेशन का नाम दीन दयाल स्टेशन रखा गया है, बल्कि पालिका परिषद् मुगलसराय का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय रखने पर मुहर कैबिनेट की बैठक में लग गई है.

लालबहादुर मुगलसराय
इमेज कैप्शन, लालबहादुर

उन्होंने कहा, "मुगलसराय स्टेशन का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है. जबकि पंडित दीनदयाल के नाम की लोकप्रियता कम है. किसी पार्टी विशेष की विचारधारा थोपना ग़लत है."

वह आगे कहते हैं, "सरकार अगर बहुमत में है तो इसका मतलब ये नहीं कि वह जो चाहेगी करेगी... बदलाव करना ही है तो खस्ताहाल स्टेशानों का करें. नाम बदलकर मुद्दों से भटकाने की कोशिश की जा रही है."

आजाद कुमार चौहान
इमेज कैप्शन, आजाद कुमार चौहान

मुगलसराय के शिक्षक आजाद कुमार चौहान बीबीसी हिंदी को बताते है कि नाम बदलने से कुछ नहीं होगा. ये फ़ैसला पार्टी की विचारधारा के हित में है, जनता हित में नहीं.

आजाद आगे कहते हैं, "मुगलसराय ऐतिहासिक धरोहर की तरह है. ये हिंदू-मुस्लिम के नाम पर मुद्दों से भटकाने की कोशिश है."

प्रमोद
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मुगलसराय के ही दिव्यांग बच्चों के अध्यापक प्रमोद ने बीबीसी हिंदी को बताया नाम में बदलाव नहीं किया जाए. अगर करना ही है तो लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखा जाए.

इसके पीछे वह तर्क देते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म यहां हुआ था. ऐसा हो तो अच्छा है.

"कभी वाराणसी का हिस्सा रहने वाले मुगलसराय की पहचान अभी तक इससे अलग नहीं हो सकी है. दूसरे नाम से लोग इसे कैसे स्वीकारेंगे?"

तनवीर आलम
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प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले मुगलसराय के तनवीर आलम ने बीबीसी हिंदी को बताया कि यह इलाक़ा देहात से जुड़ा है. नाम बदल दिया गया तो लोगों को परेशानी होगी.

वह कहते हैं कि शेरशाह सूरी के समय सराय अस्तित्व में आया था. मौजूदा समय में तुष्टीकरण की राजनीति हो रही है.

विजय कुमार
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से पीएचडी करने वाले मुगलसराय के विजय कुमार ने कहा, "मुगलसराय स्टेशन का नाम संस्कृति, इतिहास और सभ्यता को दर्शाता है. नाम बदलकर सरकार क्या हासिल करना चाहती है?"

विजय सवालिया लहजे में कहते हैं, "भविष्य में कोई नई सरकार काशी स्टेशन का नाम काबा रख दे तो कैसा लगेगा? अगर किसी महापुरूष को सम्मान देना ही चाहते हैं तो उनके नाम से वजीफा बांटे या उनके नाम पर नई योजना शुरू करें."

नैना सिंह
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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ रही मुगलसराय की छात्रा नैना सिंह कहती हैं, "यहां धर्म की राजनीति हो रही है. मुगलसराय के लोगों को इस नाम से कोई परेशानी नहीं है, सरकार को क्यों हो रही है?"

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