कैसे लागू होगा जम्मू-कश्मीर में जीएसटी?

कश्मीर में व्यापारियों का विरोध-प्रदर्शन
    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, कश्मीर से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

"अगर जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू नहीं किया गया, तो उस का नतीजा ये होगा कि जम्मू-कश्मीर नए टैक्स शासन का हिस्सा नहीं होगा. और उसका जो भी इनपुट-क्रेडिट है वो यहाँ के व्यापारियों को नहीं मिल पाएगा. दूसरे शब्दों में उनको दोगुनी क़ीमत अदा करनी पड़ेगी."

यह कहना है कश्मीर यूनिवर्सिटी में अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर डॉक्टर निसार अहमद वाणी ने. वाणी आगे कहते हैं, "ऐसी स्थिति में दो रास्ते बचे हैं या तो जम्मू-कश्मीर अपना एक टैक्स क़ानून बनाएगी जिसमें उसकी स्वायत्ता को राजनीतिक तौर पर सुरक्षित रखा जाएगा और दूसरा यह कि राज्य सरकार ख़ुद ही केंद्र की जीएसटी टैक्स और स्टेट जीएसटी टैक्स काटेगी."

जम्मू-कश्मीर राज्य में अभी तक इस बात पर असमंजस बरकरार है कि क्या सरकार राज्य में जीएसटी लागू करने में दूसरे राजनीतिक दलों के साथ सहमति बनाने में कामयाब होगी भी या नहीं और क्या जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू हो भी पाएगा भी या नहीं?

जीएसटी

विपक्ष से लेकर दूसरे राजनीतिक दल समेत सभी कश्मीर में जीएसटी को लागू करने का विरोध कर रहे हैं.

मौजूदा मसौदा मंजूर नहीं

विपक्ष की दलील यह है कि मौजूदा प्रारूप में उन्हें जीएसटी का मसौदा मंजूर नहीं है. विपक्ष का यह भी कहना है कि वो जीएसटी के उस मसौदे का विरोध करेंगे जो राज्य की राजस्व संबंधी और राजनीतिक स्वायत्ता को बदलने की कोशिश करेगा.

राज्य सरकार पहले ही दिन से कहती आ रही है कि जीएसटी राज्य के व्यापारियों के हित में है और राज्य के विशेष दर्जे यानी 370 पर किसी तरह की आंच नहीं आने दी जाएगी.

महबूबा मुफ्ती

जम्मू -कश्मीर में पीडीपी-बीजेपी की गठबंधन सरकार पर दूसरे राजनीतिक दल इस बात का इलज़ाम लगा रहे हैं कि सरकार जीएसटी की लागू करने पर आम लोगों को गुमराह कर रही है.

कश्मीर घाटी में अभी तक जीएसटी के ख़िलाफ़ दो बार व्यापारी संगठनों (व्यापार मंडल) ने कश्मीर बंद बुलाया है.

जीएसटी पर सभी राजनीतिक दलों की सहमति बनाने के लिए चार जुलाई से फिर एक बार विधानसभा का सत्र बुलाया गया है. इससे पहले 17 जून को भी इस मुद्दे पर विधानसभा का सत्र बुलाया गया था.

कोई नुकसान ना हो

कश्मीर में व्यापारियों का विरोध-प्रदर्शन

व्यापार मंडल कश्मीर इकॉनॉमिक एलायन्स के चेयरमैन मोहमद यासीन ख़ान कहते हैं कि अगर उनकी जान भी चली जाएगी, तो वो जीएसटी को मौजूदा प्रारूप में लागू नहीं होने देंगे.

वह कहते हैं, "अब तक 46 संशोधन हो चुके हैं और अब जीएसटी को मौजूदा प्रारूप में लागू कर के 47वां करने जा रहे हैं, जो हम होने नहीं देंगे. चाहे हमारी जान ही क्यों ना चली जाए."

वही कांग्रेस का कहना है कि सरकार हमें जीएसटी का वो मसौदा दिखाए, जो जम्मू-कश्मीर में लागू किया जा रहा है.

राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर कहते हैं, "कांग्रेस ने पहले दिन से ही कहा है कि राज्य में जो पीडीपी और बीजेपी की गठबंधन सरकार है, उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जा के मुताबिक जीएसटी लागू करने की तैयारी की है तो हम वो बिल देखना चाहते हैं. इसके बाद ही हम अपने सुझाव सामने रखेंगे.''

''हमारा मानना है कि इस बिल से राज्य के विशेष दर्जे और आर्थिक हैसियत को कोई नुकसान ना पहुंचे. ये सरकार आम लोगों को गुमराह कर रही है. अगर दोनों दलों के बीच बिल को लेकर कोई सहमति बनी है, तो उसको जनता के सामने रखना चाहिए."

चुनौती

कश्मीर में व्यापारियों का विरोध-प्रदर्शन

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीर के व्यापार मंडल से कहा है कि वो जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू करने में बहुत ही ऐहतियात से काम ले.

राज्य सरकार के लिए जम्मू-कश्मीर में जीएसटी लागू करने का मामला ऐसे समय में फंसा हुआ है जब कश्मीर में ज़मीनी सतह पर हालात बहुत ही अशांत हैं.

आने वाले कुछ दिनों में पिछले साल मारे गए हिज़बुल कमांडर बुरहान वानी की पहली बरसी है. बुरहान वानी को मारे जाने के बाद कश्मीर में छह महीनों तक भारत विरोधी प्रदर्शनों की लहर चली थी जिसमें करीब सौ आम नागरिक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए थे.

बुरहान वानी की पहली बरसी पर सरकार के सामने ये चुनौती है कि कश्मीर के हालात कैसे शांत रहे?

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