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'आप भारत के लिए क्या कर सकते हैं?'

प्रवासी भारतीयों के बारे में बनाई गई समिति के अध्यक्ष रहे डॉक्टर एलएम सिंघवी का कहना है कि उनकी सिफ़ारिशों में प्राथमिकता का सवाल नहीं है क्योंकि सभी ज़रूरी हैं और सब पर अमल होना है.

डॉक्ट सिंघवी प्रवासी भारतीय दिवस की आयोजन समिति के प्रमुख भी हैं.

उन्होंने कहा, “भारत अपने से जुड़े लोगों को याद कर रहा है तो अब मैं प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों से पूछना चाहता हूँ कि आप भारत के लिए क्या करने के लिए तैयार हैं?”

प्रवासी भारतीय दिवस के पीछे की सोच के बारे में उन्होंने कहा कि जब वह 1962 में लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए थे तभी से इसकी शुरुआत हो गई थी.

सिंघवी ने कहा, “मैंने उसी समय कहा था कि भारतवंशियों से देश को संबंध जोड़ना चाहिए. एक ऐसी नीति बने जिससे उन लोगों से मधुर रिश्ते बन सकें.”

उनका कहना था कि इसके पीछे यही मंशा थी कि देश अपने बच्चों को एक बार फिर सीने से लगा सके.

देश और प्रवासी भारतीयों के जुड़ने से एक दूसरे को लाभ के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें केवल फ़ायदे की बात ही नहीं सोचनी चाहिए क्योंकि इससे सांस्कृतिक संवर्द्धन भी होता है.

उन्होंने कहा, “भारत के लोग कहीं भी हों उनके भारत से जुड़ने में एक नया सौहार्द कायम होता है.”

समिति की सिफ़ारिशें

प्रवासी भारतीयों की समिति की सिफ़ारिशों के बारे में उन्होंने कहा कि लगभग 160 सिफ़ारिशें की गई थीं और उसमें से दोहरी नागरिकता के बारे में इस सरकार ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके ऐतिहासिक काम किया है.

उनकी सिफ़ारिशों पर जिस गति से काम हो रहा है सिंघवी उससे संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि इन सिफ़ारिशों पर विचार के बाद एक नई तरह की सोच निकलेगी और नई तरह की नीतियाँ बनेंगी.