लॉकडाउन के चितेरे

रायु
जापान

रायु
जापान



नौ बरस का रायु रग्बी खेलने का शौक़ीन है. उसने ख़ुद को ही अपनी ड्रॉइंग में उकेरा है. एक ऐसे रग्बी खिलाड़ी के तौर पर जो कोरोना वायरस को किक मार कर भगा रहा है.
रायु को सबसे ज़्यादा याद आती है अपने स्कूल के दोस्तों की. उनके साथ स्कूल के मैदान में खेलना उसे बहुत पसंद है.

लेकिन अब लॉकडाउन में रायु अपनी ही मंद रफ़्तार से नई चीज़ें सीख रहा है. इस काम में उसके माता पिता भी मदद कर रहे हैं. उन्होंने रायु के रोज़ के होम वर्क में खेल कूद को भी शामिल कर रखा है.
रायु कहता है, "मैं अपने घर के भीतर ही अपनी रग्बी की गेंद इस्तेमाल करता हूं."
रायु के बनाए चित्रों से साफ़ है कि वो जल्द से जल्द इस वायरस को किक और पंच से हरा कर अपने स्कूल वापस जाना चाहता है.






नौ बरस का रायु रग्बी खेलने का शौक़ीन है. उसने ख़ुद को ही अपनी ड्रॉइंग में उकेरा है. एक ऐसे रग्बी खिलाड़ी के तौर पर जो कोरोना वायरस को किक मार कर भगा रहा है.
रायु को सबसे ज़्यादा याद आती है अपने स्कूल के दोस्तों की. उनके साथ स्कूल के मैदान में खेलना उसे बहुत पसंद है.

लेकिन अब लॉकडाउन में रायु अपनी ही मंद रफ़्तार से नई चीज़ें सीख रहा है. इस काम में उसके माता पिता भी मदद कर रहे हैं. उन्होंने रायु के रोज़ के होम वर्क में खेलकूद को भी शामिल कर रखा है.
रायु कहता है, "मैं अपने घर के भीतर ही अपनी रग्बी की गेंद इस्तेमाल करता हूं."
रायु के बनाए चित्रों से साफ़ है कि वो जल्द से जल्द इस वायरस को किक और पंच से हरा कर अपने स्कूल वापस जाना चाहता है.


हेली
हॉन्गकॉन्ग

हेली
हॉन्गकॉन्ग


नौ बरस की हेली को विज्ञान पर बहुत भरोसा है. हेली ने एक ऐसी मशीन की ड्रॉइंग बनाई है, जो ज़्यादा से ज़्यादा दवाएं बना सकती है.
हेली कहती हैं, "मैं ने जो मशीन बनाई है, उससे पूरी दुनिया अपने इस्तेमाल के लिए दवा ले सकती है."
हेली को उम्मीद है कि इस मशीन की मदद से वो कोरोना वायरस को दुनिया से भगाने में कामयाब होगी.
हेली कहती है, "इसीलिए मैंने आसमान का चित्र बनाया है, वो भी सितारों के साथ."


जियोन-वू
साउथ कोरिया

जियोन-वू
साउथ कोरिया


11 बरस के जियोन वू कहते हैं, "मेरे चित्र असल में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग का एलान हैं."

"जब मैं इस वायरस से संक्रमित लोगों को देखता हूं, तो मैं भी डर जाता हूं."

लेकिन, जियोन-वू को इस समय घर में रहना अच्छा लग रहा है.
वो कहता है, "मैं अपनी ममा के साथ बोर्ड गेम खेलता हूं. वो फिल्में देखता हूं, जिन्हें मैं काफ़ी समय से देखना चाहता था. और मैं किताबें भी पढ़ता हूं."




11 बरस के जियोन वू का कहना है, "मेरे चित्र असल में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग का एलान हैं."


"जब मैं इस वायरस से संक्रमित लोगों को देखता हूं, तो मैं भी डर जाता हूं."

लेकिन, जियोन-वू को इस समय घर में रहना अच्छा लग रहा है.
वो कहता है, "मैं अपनी ममा के साथ बोर्ड गेम खेलता हूं. वो फिल्में देखता हूं, जिन्हें मैं काफ़ी समय से देखना चाहता था. और मैं किताबें भी पढ़ता हूं."

अलेसांद्रा
इटली


13 साल की अलेसांद्रा कहती है, "मैंने कल्पना नहीं की थी कि कभी रोम शहर ऐसा भी होगा. आज हवा कम प्रदूषित है क्योंकि सड़कों पर गाड़ियां कम हैं. शहर बहुत ख़ामोश है."
हफ़्ते के पांच दिन, अलेसांद्रा रोज़ पांच घंटे ऑनलाइन क्लास में पढ़ती है. हर घंटे बाद दस मिनट का ब्रेक मिलता है.

अलेसांद्रा बताती है, "हमारी तो फिजिकल एक्सरसाइज़ की कक्षाएं भी ऑनलाइन हो रही हैं. हम अपने कैमरे ऑन कर लेते हैं और फिर जैसा टीचर करती हैं, वैसे वैसे हम भी करते जाते हैं. मै वर्ज़िश की क्लास के वक़्त अपनी मेज़ और कुर्सी हटा देती हूं. क्योंकि एक बार मैं गिर गई थी."
अलेसांद्रा ने लॉकडाउन में जो तस्वीर बनाई है, उसमें उनकी मेज़ दिखाई देती है. अलेसांद्रा के मुताबिक़, क्वारंटीन के दिनों में ये टेबल ही उनकी ज़िंदगी का केंद्र है.
अलेसांद्रा की ड्रॉइंग में उनकी पसंदीदा हैरी पॉटर की किताब भी है, जो मन बहलाने का अच्छा तरीक़ा है.


उसके चित्रों में गर्म हवा का गुब्बारा और इंद्रधनुष भी है. इससे वो अपनी उस उम्मीद का इज़हार करती है, जिसे उसने दिल के एक कोने में बसा रखा है. और वो उम्मीद ये है कि आने वाला कल बेहतर होगा.
अलेसांद्रा कहती हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा भी कहूंगी. लेकिन मैं अब अपने स्कूल वापस जाना चाहती हूं."
लेकिन, अपने घर में क्वारंटीन रहने की वजह से अलेसांद्रा की ज़िंदगी में नए अवसर भी आए हैं. जिनमें से कई तो बहुत अच्छे हैं और कई उतने अच्छे नहीं हैं.
वो कहती है, "मुझे अपनी मम्मी के साथ खाना बनाने में मज़ा आ रहा है, मैं उनके साथ ज्यादा बात करती हूँ. लेकिन मुझे आजकल घर का काम भी करना पड़ जाता है."


जिया
भारत

जिया
भारत


जिया कहती है, "अपनी ड्रॉइंग से मैं ये कहना चाहती हूं कि हम इस महामारी के चलते साफ-सफाई की अहमियत समझ रहे हैं. प्रकृति के संरक्षण का महत्व जान रहे हैं. हम सीख रहे हैं कि अपने क़ुदरती संसाधनों का कम से कम दोहन करें."
जिया ये भी मानती है कि लॉकडाउन के चलते अब क़ुदरत को लेकर हमारी समझ बेहतर हुई है.
वो कहती है, "घर में रह कर हम, प्रकृति को फिर से सजने संवरने का मौक़ा दे रहे हैं. हम इस लॉकडाउन के कारण ही तो आज, सड़कों पर गाड़ियों के शोर के बजाय परिंदों की आवाज़ सुन पा रहे हैं."



जिया कहती हैं, "अपनी ड्रॉइंग से मैं ये कहना चाहती हूं कि हम इस महामारी के चलते साफ सफाई की अहमियत समझ रहे हैं. प्रकृति के संरक्षण का महत्व जान रहे हैं. हम सीख रहे हैं कि अपने क़ुदरती संसाधनों का कम से कम दोहन करें."
जिया ये भी मानती है कि लॉकडाउन के चलते अब क़ुदरत को लेकर हमारी समझ बेहतर हुई है.
वो कहती हैं, "घर में रह कर हम, प्रकृति को फिर से सजने संवरने का मौक़ा दे रहे हैं. हम इस लॉकडाउन के कारण ही तो आज, सड़कों पर गाड़ियों के शोर के बजाय परिंदों की आवाज़ सुन पा रहे हैं."


ओलिविया
ब्रिटेन


ब्रिटेन की ओलिविया ने जो चित्र बनाया है उसके बारे में समझाते हुए वो कहती है, "हम आज कल एक दूसरे से नहीं मिल पा रहे हैं न. तो हम एक दूसरे के संपर्क में भी नहीं हैं. इसीलिए आज हम आपस में प्यार से ज़्यादा क़रीब आ रहे हैं. आजकल हम दूसरों के बारे में अधिक सोच पा रहे हैं."

ओलिविया ने जो ड्रॉइंग बनाई है, उसमें धरती पर कुछ हरे हरे बिंदु भी दिख रहे हैं. वो कहती है कि "ये असल में कोरोना वायरस है और ये पूरी दुनिया में फैला है. और ये जो मैंने दिल बनाया है उसका मतलब है कि हर देश के लोगों में प्यार है. यहां तक कि समंदर में भी मोहब्बत है. दूसरे जानवर भी प्यार करते हैं."

आलेख और प्रोड्यूसर : लारा ओवेन
डिज़ाइनर : डेविस सूर्या
रिपोर्टर : जूली यूनयुंग ली और पद्मा मीनाक्षी
एडिटर: सारा बकली
22 अप्रैल 2020 को प्रकाशित