सोमवार, 09 फ़रवरी, 2009 को 15:35 GMT तक के समाचार
कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार, मुंबई
हाल ही में गोविंदा एक फ़िल्म की शूटिंग करने लंदन गए. लंदन में पहले दिन की शूटिंग बकिंघम पैलेस के सामने थी.
जब यूनिट लोकेशन पर पहुँची तो चीची भैया ने वहाँ शूटिंग करने से मना कर दिया.
भला क्यों? क्योंकि उस जगह पर एक गाना फ़िल्माया जाने वाला था और गोविंदा का कहना था कि क्योंकि वे कांग्रेस पार्टी के सांसद हैं, इसलिए उनका इंग्लैंड की महारानी के सामने नाचना उचित नहीं होगा.
जब निर्देशक तिगमांशु धूलिया ने उन्हें समझाया कि महारानी साहिबा उनका नृत्य नहीं देखेंगी, तो हमारे नायक ने जवाब दिया- ये हम कैसे बोल सकते हैं. हो सकता है रानी साहिबा चुपके से मेरा डांस देखें.
अंत में लोकेशन बदलना पड़ा.
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अरबाज़ और विपासना
अरबाज़ ख़ान आजकल विपासना में विश्वास करने लगे हैं. इसमें लोग घंटों तक मौन धारण करते हैं.
अरबाज़ को विपासना में बहुत दिलचस्पी हो गई है. इसलिए वे इसका पालन करने लगे हैं.
शायद विपासना करने के बाद ही अरबाज़ कुछ शांत मिजाज़ के हो गए हैं. लगता है अरबाज़ को अब बड़े भैया सलमान को भी विपासना से परिचित करना चाहिए.
क्योंकि सलमान को भी अपने ग़ुस्से पर नियंत्रण करने की आवश्यकता है.
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रिलीज़ के लिए तैयार आशाएँ
जॉन अब्राहम की आशाएँ अब रिलीज़ हो सकती है. नागेश कुकनूर निर्देशित इस फ़िल्म की रिलीज़ के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दे दिया है.
इस फ़िल्म के वितरण अधिकार रिलायंस बिग इंटरटेन्मेंट ने निर्माता परसेप्ट पिक्चर कंपनी से ख़रीदे थे. जब रिलायंस के लोगों ने फ़िल्म की ट्रायल देखी तो उन्हें फ़िल्म पसंद नहीं आई.
उन लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट में मुक़दमा दर्ज कर दिया और आरोप लगाया कि जब उन्होंने फ़िल्म ख़रीदी थी, तब उन्हें कोई और फ़िल्म देने का वादा किया गया था.
लेकिन जब उन्होंने फ़िल्म की ट्रायल देखी तो उन्हें कहानी बिल्कुल अलग लगी. रिलायंस ने कोर्ट से कहा कि परसेप्ट को ये आदेश दिया जाए कि उनके चार करोड़ रुपए ब्याज सहित लौटा दें क्योंकि उन्हें इस फ़िल्म का वितरण करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.
रिलायंस ने कोर्ट से यह भी आदेश देने की विनती की कि उससे पहले परसेप्ट ये फ़िल्म रिलीज़ न करे. लेकिन कोर्ट ने अपने आदेश में परसेप्ट को सिर्फ़ चार करोड़ रुपए का एक तिहाई कोर्ट में जमा कराने को कहा और परसेप्ट को फ़िल्म रिलीज़ करने की छूट दे दी.
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रिलायंस और रौशन
तीन साल पहले अनिल अंबानी की कंपनी ऐडलैब्स (अब इसका नाम है बिग इंटरटेन्मेंट) ने ऋतिक रौशन को तीन फ़िल्मों के लिए 30 करोड़ रुपए में साइन किया था.
उस समय इतनी क़ीमत किसी स्टार को नहीं मिली थी. उन तीन फ़िल्मों में से एक भी फ़िल्म अभी तक नहीं बनी है.
अब बिग इंटरटेन्मेंट ने ऋतिक के पापा निर्माता राकेश रौशन की फ़िल्म काइट्स के दुनियाभर के राइट्स के लिए 100 करोड़ रुपए दिए हैं.
इससे पहले किसी और फ़िल्म की इतनी क़ीमत नहीं लगी. आमिर ख़ान की गजनी आज तक सबसे ज़्यादा क़ीमत में बिकी थी. उसकी क़ीमत भी 90 करोड़ रुपए से ज़्यादा नहीं थी.
लगता है रिलायंस और रौशन परिवार का पिछले जन्म का कोई रिश्ता है. वैसे काइट्स में ऋतिक के साथ कंगना रानावत और मैक्सिको की अभिनेत्री बारबारा मोरी हैं.
शायद काइट्स को हिंदी और अंग्रेज़ी के साथ जर्मन, फ़्रेंच और रसियन में भी रिलीज़ किया जाएगा. हिंदी और अंग्रेज़ी में तो फ़िल्म बनाई जा रही है, बाक़ी भाषाओं में इसे डब किया जाएगा.
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आँसू से पसीज गए शाहरुख़
पता है, शाहरुख़ ख़ान ने अपनी नई फ़िल्म बिल्लू बार्बर का नाम सिर्फ़ बिल्लू क्यों कर दिया? हेयर ड्रेसर और सैलून एसोसिएशन के लोगों ने उनसे विनती की कि उन लोगों को बार्बर (नाई) बुलाना उनकी तौहीन है.
कुछ लोग तो शाहरुख़ के सामने रोने लगे और कहा कि उनके परिवार को बार्बर शब्द से नीचा महसूस होता है. शाहरुख़ ख़ान से उनके आँसू नहीं देखे गए.
उन्होंने एसोसिएशन के लोगों से कह दिया कि जो हो चुका, उसका तो आगे कुछ नहीं हो सकता है लेकिन आगे से वे फ़िल्म की पहचान सिर्फ़ बिल्लू के नाम से ही कराएँगे.
मुंबई में तो फ़िल्म के पोस्टरों पर बार्बर शब्द पर सफ़ेद पेंट लगा दिया गया है, जिसके कारण लोगों को फ़िल्म का टाइटिल सिर्फ़ बिल्लू नज़र आ रहा है.
नाम बदलने के बाद शाहरुख़ ने कहा- मेरी फ़िल्म ख़ुशी और मोहब्बत के बारे में है. इस फ़िल्म को लेकर नाराज़ या दुख़ी करना उचित नहीं होगा.
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तर्क या कुतर्क
कई लोगों का कहना है कि अनुराग कश्यप की नई फ़िल्म देव डी में बहुत सारे अश्लील डायलॉग और सीन हैं. अब इस पर ख़ुद अनुराग का क्या कहना है, ये आप सुनेंगे तो चौंक जाएँगे.
जिस दृश्य में नायिका माही गिल अभय देओल का इंतज़ार करती हैं, वो सीन अनुराग ने अपनी मम्मी से पूछ कर लिखा.
यही नहीं जिस सीन में शादी-शुदा माही अभय से मिलने आती हैं, उस सीन के लिखने में भी अनुराग ने अपनी मम्मी की मदद ली.
बस डायलॉग लिखते वक़्त अपनी मम्मी को नहीं सुनाया. शायद उनकी मम्मी ये संवाद सुन लेती तो उन्हें सीन लिखने में भी सहायता नहीं करती.