सोमवार, 01 दिसंबर, 2008 को 23:02 GMT तक के समाचार
कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार, मुंबई
कैलाश खेर ने वो कर दिखाया जो शायद बहुत कम लोग करते. 21 नवंबर को कैलाश को दिल्ली में एक निजी समारोह में गाना था. उन्होंने पार्टी से एडवांस पैसे भी ले लिए थे.
क्योंकि दिल्ली में उनके माता-पिता रहते थे और क्योंकि उनके पिताजी की तबीयत ठीक नहीं थी, कैलाश ने सोचा दिल्ली एक दिन पहले चला जाए.
20 तारीख़ को कैलाश राजधानी पहुँच गए. माता-पिता से मिल लिए. 21 तारीख़ की सुबह अचानक उनके पिताजी का देहांत हो गया.
बजाए कि कैलाश अपना कार्यक्रम रद्द करें, वो शाम को कार्यक्रम में गए, वहाँ पर गाने गाए, अतिथियों का मनोरंजन किया और वापस अपने पिताजी की मौत का शोक मना घर चले आएँ.
कैलाश को ये महसूस हुआ कि सात-आठ घंटों में उनकी जगह दूसरा कोई गायक दिल्ली नहीं आ सकेगा. इसलिए कार्यक्रम रद्द करने की जगह उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाई.
वो कहते हैं न- ज़िंदगी फिर भी चलती रहती है.
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बिग बी की सलाह
दूसरे सितारों और आम लोगों की तरह अमिताभ बच्चन भी चरमपंथियों की गोलियों से बहुत डर गए थे.
जब किसी टीवी चैनल ने उनसे कैमरा के सामने आकर लोगों को कुछ संदेश देने को कहा तो बच्चन साहब ने बड़ी नम्रता से चैनल को टाल दिया.
अमिताभ ने कहा- मेरे संदेश से आपकी टीआरपी भले ही बढ़ जाए और कोई मतलब नहीं पूरा होगा. कृपा करके ऐसे मौक़े पर अपनी टीआरपी के बारे में मत सोचो.
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रद्द हुआ कार्यक्रम
निर्माता-निर्देशक निखिल आडवाणी ने अक्षय कुमार के साथ मीडियाकर्मियों को पराठे खिलाने का कार्यक्रम रखा था.
दो दिसंबर को ये कार्यक्रम होना था लेकिन मुंबई में हमलों के कारण ये कार्यक्रम टाल दिया गया है.
निखिल ने तो इस कार्यक्रम के लिए लोगों को कार्ड भी बाँट दिए थे. दरअसल निखिल अपनी आने वाली फ़िल्म चांदनी चौक टू चाइना के तीन गाने मीडियावालों को दिखाना चाहते थे.
इसके लिए उन्होंने दो दिसंबर की तारीख़ और सुबह 10 बजे का समय रखा था. वैसे तो इंडस्ट्री में लोगों को देर से उठने की आदत है, इसलिए निखिल ने कहा था कि सब लोग उठकर तैयार होकर सीधे कार्यक्रम में आ जाएँ क्योंकि कार्यक्रम में नाश्ते का बंदोबस्त किया गया है.
नाश्ते में निखिल आडवाणी गरम-गरम पराठे देने वाले थे. लेकिन मुंबई में हुए हमलों के कारण अब ये कार्यक्रम नौ दिसंबर को होगा.
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सुभाष घई और क्रिकेटर
सुभाष घई और क्रिकेट का कोई न कोई रिश्ता ज़रूर है. नहीं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के नाम वाली वो तीन फ़िल्में नहीं बनाते.
नहीं समझे, अरे घई साब ने तीन फ़िल्में बनाई हैं जिनके टाइटिल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के नाम हैं.
पहली दो विश्वनाथ और कालीचरण थी और तीसरी हाल ही में रिलीज़ हुई युवराज है.
उनकी इक़बाल तो क्रिकेट के गेम पर ही आधारित थी.
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युवराज का असर
सलमान ख़ान की फ़िल्म युवराज क्या फ़्लॉप हुई, उनकी आगे आने वाली फ़िल्मों के फ़ाइनेंसर लोग डर गए हैं. सलमान की निर्माणाधीन फ़िल्म वीर के फ़ाइनेंसर ने अपनी मुट्ठी कस ली है.
फ़ाइनेंसर इस फ़िल्म के सभी कलाकारों और निर्देशक अनिल शर्मा से बजट कम करने की बात कर रहे हैं. अगर कलाकारों और तकनीकी कर्मचारियों ने अपनी फ़ीस कम नहीं की, तो शायद फ़िल्म की शूटिंग रोक दी जाएगी.
वैसे फ़िल्म युवराज सलमान की लगातार पाँचवीं फ़्लॉप फ़िल्म है. इससे पहले साँवरिया, गॉड तुसी ग्रेट हो, हैलो, हीरोज़ बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई थी.
हालाँकि हैलो में सलमान की स्पेशल भूमिका थी लेकिन ये स्पेशल भूमिका काफ़ी लंबी थी.
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बीजेपी की बसंती
पिछले सप्ताह हेमा मालिनी राजस्थान के जोधपुर, पाली और जालौर पहुँची.
वहाँ हेमा भारतीय जनता पार्टी के लिए वोट मांगने गई थी.
वहाँ एक रैली में जब हेमा मालिनी बीजेपी के दिग्गज नेताओं का नाम लेने लगीं, तो जनता में से आवाज़ आई- वीरू (धर्मेंद्र) भी तो हैं.
इस पर हमारी ड्रीम गर्ल ने कहा- बसंती भी है. हेमा मालिनी की इस हाज़िर जवाबी पर लोगों ने ख़ूब तालियाँ पीटी.