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सोमवार, 10 नवंबर, 2008 को 05:03 GMT तक के समाचार

अब्दुल वाहिद आज़ाद
हैदराबाद से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

'चरमपंथियों का कोई मज़हब नहीं होता'

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि पिछले आठ-नौ महीने के दौरान भारतीय मुसलमानों की तरफ़ से चरमपंथी गतिविधियों के ख़िलाफ़ कई बड़े सम्मेलन आयोजित किए लेकिन इसके बाद भी चरमपंथी घटनाएँ कम नहीं हुईं हैं.

ग़ौर करनेवाली बात ये है कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ होने वाले इन सम्मेलनों में हिंदू और दूसरे मज़हब के धार्मिक नेता भी शरीक होते रहे हैं. लेकिन चरमपंथ की आग फैल ही रही है.

आख़िर इसकी वजह क्या हैं और कहीं ऐसा तो नहीं कि धार्मिक नेता अपना असर खो चुके हैं.

इन्ही सवालों को जानने की कोशिश की हैदराबाद में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के 29वें वार्षिक अधिवेशन में शामिल होने के लिए आए हिंदू धर्म गुरू श्री श्री रविशंकर से. पेश है बातचीत के मुख्य अंश.

आप ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि ग़लतफ़हमी को दूर कर आगे बढ़ना चाहिए, साथ ही इस्लाम शांति प्रिय धर्म है. तो क्या ऐसी बातें आप सिर्फ़ मुसलमानों की सभाओं में कहते हैं या अपनी सभा में भी कहते हैं?

शांति और अमन का पैग़ाम मैं पूरी दुनिया को देता हूँ, सभा कोई भी हो, धर्म या संप्रदाय कोई भी हो, हमारा उद्देश्य दुनिया में शांति का संदेश देना है. जीवन क्षणिक है ऐसे में नफ़रत की बात कैसे हो सकती है.

दुनिया में आप के अनुयाइयों की बड़ी संख्या है, आप चरमपंथ के ख़िलाफ़ बात भी हर जगह कर रहे हैं, सभी धर्मों के लोगों से कर रहे हैं, ऐसे में क्या कहा जाए कि धार्मिक नेताओं की बातों का असर कम हो रहा है, इसलिए चरमपंथी गतिविधियाँ रुक नहीं रहीं हैं.

देखिए ‘आतंकवादी गतिविधियां’ पूरे समाज में से कुछ लोग करते हैं, उनकी संख्या न के बराबर हैं. ऐसे में धार्मिक नेताओं के उपदेशों के असर कम होने की बात करना सही नहीं है क्योंकि समाज का अधिकतर व्यक्ति सही रास्ते पर हैं.

भारत में अक्सर मुसलमान ये शिकायत करते हैं कि देश में उनके साथ सरकारी स्तर पर भेदभाव किया जाता है, क्या आप इससे सहमत हैं?

ये बात सही है कि भारत में कुछ मुसलमान ये समझते हैं कि उनके साथ भेदभाव किया जाता है. हमारी ये कोशिश होनी चाहिए कि किसी भी समुदाय के बीच ऐसी भावनाएं न पनपे. इसके लिए हमें निरंतर प्रयास करना पड़ेगा. इस काम को करना आवश्यक भी है क्योंकि अमन और शांति के लिए ये ज़रूरी भी है.

चरमपंथी कार्रवाई करनेवालों से लड़ाई कैसे लड़ी जा सकती हैं?

हम सबको मिलकर आतंकवादियों को अलग करना चाहिए, क्योंकि आतंकवादियों का कोई मज़हब नहीं होता. साथ ही साथ मोहब्बत की लहर पूरी दुनिया में छेड़ी जाए. शांति और अमन ख़ुद ब ख़ुद आ जाएगा.