गुरुवार, 06 नवंबर, 2008 को 20:37 GMT तक के समाचार
कश्मीर के कवि रहमान राही को भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान दिया गया है.
राही को 40वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया है.
गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नई दिल्ली में 40वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के समारोह में कश्मीरी कवि रहमान राही को यह सम्मान दिया.
ऐसा पहली बार हुआ है जब कश्मीरी भाषा के किसी कवि या साहित्यकार को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है.
रहमान पिछले पाँच दशकों से कश्मीरी भाषा में अपना साहित्यिक सृजन करते आए हैं और इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और विशिष्ट रचनाएं लिखी हैं.
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर रहमान राही के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि रहमान को मिला यह पुरस्कार भारतीय साहित्य को उनके योगदान के लिए दिया गया है.
कश्मीरी कवि
रहमान राही लगभग 700 वर्ष पुरानी कश्मीरी भाषा में अपना साहित्यिक योगदान देते रहे हैं. रहमान कवि हैं और अपनी कविताओं के माध्यम से भाषा और साहित्य को आगे बढ़ाते रहे हैं.
मनमोहन सिंह ने कहा कि इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि जिन लोगों के काम को ज्ञानपीठ पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है, उनके काम की पहुँच अन्य भारतीय भाषाओं के लोगों तक भी हो ताकि ज़्यादा लोग उनके साहित्यिक योगदान से परिचित हों और उसका लाभ उठा सकें.
ज्ञानपीठ पुरस्कारों की शुरुआत टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह के मालिक साहू शांति प्रसाद जैन और रमा जैन ने 1960 के दशक में की थी.
इस ट्रस्ट ने 1965 से ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की परंपरा की शुरुआत की. भारत में भारतीय भाषाओं के ज़रिए साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है.