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मंगलवार, 30 सितंबर, 2008 को 22:54 GMT तक के समाचार

कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार, मुंबई

मिलो न तुम तो हम घबराएँ....

रणबीर कपूर और दीपिका पादूकोण अब भी साथ-साथ ऐसे घूमते हैं जैसे उन्हें अभी-अभी प्यार हुआ है. किसी पार्टी में हो या किसी ट्रायल शो में या फिर कोई फ़ंक्शन, जहाँ तक हो सके वो दोनों साथ ही आते हैं और साथ ही घर जाते हैं. किसके घर ये तो पता नहीं.

मज़ाक दूर, हक़ीकत ये है कि दोनों का तालमेल इतना सही है कि वो सिर्फ़ एक दूसरे के लिए बने हैं ऐसा लगता है.

संजय दत्त और मान्यता भी आजकल वैसे ही पेश आते हैं. एक-दूसरे के बिना वो कहीं आते-जाते नहीं और न ही कोई फ़ैसला लेते हैं.

और तीसरी तरफ़ सैफ़ अली खान और करीना कपूर हैं जो अपनी मोहब्बत पब्लिक में ऐसे ज़ाहिर करते हैं जैसे कि उनका ये पहला-पहला प्यार है. पता नहीं ये सारे अच्छे एक्टर हैं या सच-मुच ये एक दूसरे के प्यार में डूबे हैं.

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बिपाशा का अजब किरदार

संजय गुप्ता की आने वाली फ़िल्म पंख में बिपाशा बासु हैं भी और नहीं भी. नहीं समझे?

वैसे तो कहानी में बिपाशा का कोई रोल नहीं है लेकिन फ़िल्म में एक किरदार है जिसके ज़हन में बिपाशा आती रहती है.

कहने का मतलब है कि बिपाशा बाकी किसी को नहीं दिखती है सिर्फ़ एक किरदार के दिमाग़ में वो रहती है.

बिपाशा का रोल ऐसा है कि जिस किरदार को वो नज़र आती है उन्हें चिढ़ाती हैं, लुभाती हैं और एक समय ऐसा आता है जब वो किरदार अपनी मर्दानगी पर शक़ करने लगता है.

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लम्हा की शूटिंग

बिपाशा बासु से ही याद आया. वे एक ऐसी अभिनेत्री हैं जो अपनी सेक्सी छवि को बरकरार रखने के साथ-साथ दूसरी किस्म की फ़िल्में भी करने में विश्वास रखती हैं.

कुछ साल पहले विपाशा ने मधुर भंडारकर की कॉर्पोरेट में काम किया था. अब उन्होंने परज़ानिया जैसी संवेदनशील फ़िल्म के निर्देशक राहुल ढोलकिया के साथ एक फ़िल्म साइन की है जिसका नाम लम्हा है.

लम्हा में बिपाशा के हीरो संजय दत्त हैं. साथ में हैं कुणाल कपूर. इस फ़िल्म का एक लंबा शूटिंग शेड्यूल जम्मू कश्मीर में होने जा रहा है. उसके बाद यूनिट लंदन जाएगा जहाँ पर विदेशी तकनीशियनों के साथ एक्शन सीन लिए जाएँगे.

फ़िल्म अक्तूबर में शुरु होगी और दिसंबर में ख़त्म हो जाएगी. कुणाल कपूर का इसमें बड़ा रोल है- बचना ए हसीनों और वेल्कम टू सज्जनपुर में उन्होंने मेहमान कलाकार की भूमिका निभाई थी.

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मसरूफ़ हैं लारा

लारा दत्ता आजकल इतनी व्यस्त हैं कि आप अंदाज़ा नहीं लगा सकते. शूटिंग में उनका इतना समय चला जाता है कि नई फ़िल्मों के ट्रायल शो में भी वो लेट पहुँचती हैं. हाल ही में एक फ़िल्म के प्रीव्यू शो में लारा इंटरवल के बाद पहुँची.

फ़िल्म के निर्देशक को वे ज़बान दे चुकी थीं कि वो उनकी फ़िल्म का शो रात नौ बजे देखने ज़रूर आएँगी. लेकिन उस शाम उनकी शूटिंग दस बजे तक चली. फिर भी अपना वादा निभाया और वो इंटरवल में ट्रायल हॉल में पहुंच गई.

वो फ़िल्म थी किडनैप. फ़िल्म के निर्देशक संजय गढ़वी ने मज़ाक में कहा, किड तो तुमने मिस कर दिया, अब नैप देख लो. शुक्र है, लारा ने फ़िल्म देखते-देखते नैप नहीं ले लिया (नींद की झपकी). वैसे ये एक थ्रिलर फ़िल्म है और कहा जा रहा है कि दर्शकों को बाँध कर रखती है.

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देव आनंद की कमाई

देव आनंद ने बुढ़ापे में जा कर 50 कोरड़ रुपए कमाएँ हैं. इतना सारा पैसा शायद उन्होंने अपने पूरे करियर में भी नहीं कमाया होगा. किसी ने उनकी पुरानी फ़िल्मों की लाइब्रेरी नहीं ख़रीदी है और न ही किसी निर्माता ने देव आनंद को पाँच-दस फ़िल्मों में एक्टिंग करने के लिए या फ़िल्में बनाने के लिए साइन किया है.

हुआ यूँ कि बॉम्बे के पाली हिल इलाक़े में जिस ज़मीन पर देव साहब का आनंद रिकॉर्डिंग थिएटर खड़ा था वो ज़मीन उन्होंने बिल्डर को बेच डाली और उसके लिए देव आनंद को मिले हैं पूरे 50 करोड़ रुपए. आनंद स्टूडियो तोड़कर उसकी जगह एक हाई-राइज़ इमारत बनेगी और उस इमारत में रहने के लिए दो फ़्लैट देव आनंद को मिलेंगे.

देव साहब के लाखों फ़ैन्स ये ख़बर जानकर ख़ुश होंगे लेकिन वो फ़ैन्स ये भी चाहेंगे कि देव आनंद ये पैसा ऐसी फ़्लॉप फ़िल्में बनाकर उड़ा न दें जैसे वो पिछले 20-25 सालों से बना रहे हैं.