शनिवार, 30 अगस्त, 2008 को 16:22 GMT तक के समाचार
'रामगोपाल वर्मा की आग' से बुरी तरह झुलसे फ़िल्म निर्माता-निर्देशक के करियर में नई जान फूंकने का काम 'फूंक' नाम की उनकी नई फ़िल्म कर रही है.
'सरकार' और 'सरकार राज' के बीच तीन साल के अंतराल में उनकी क़रीब दस फ़िल्में पिट चुकी थीं, जिनमें 'रामगोपाल वर्मा की आग' के अलावा 'निशब्द', 'दरवाज़ा बंद रखो', 'शिवा', 'डरना ज़रूरी है', 'मिस्टर या मिस', 'गो' जैसी फ़िल्में शामिल हैं.
रामू के नाम से मशहूर निर्माता-निर्देशक का कहना है कि उन्हें फूंक का आइडिया एक हिंदी न्यूज़ चैनल से मिला जिस पर रात-दिन काला जादू के बारे में ख़बरें दिखाई जाती हैं.
उनकी ताज़ा फ़िल्म पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई है और बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाब बताई जा रही है, कम बजट वाली इस फ़िल्म से रामू की 'फैक्टरी' की हालत सुधर सकती है.
रामू कहते हैं, "फ़िल्म हॉरर और थ्रिल अहम है, मैंने जान-बूझकर बड़ी स्टारकास्ट नहीं रखी है."
इस फ़िल्म में कोई जाना-पहचाना चेहरा नहीं है और उन्होंने कई नए कलाकारों को पहला मौक़ा दिया है.
फूंक में रामगोपाल वर्मा ने 'भूत' वाला करिश्मा दोहराने की कोशिश की है, फिल्म में मुख्य भूमिकाएँ अमृता खानविलकर और सुदीप ने निभाई हैं.
फ़िल्म की प्रीमियर के मौक़े पर रामगोपाल वर्मा ने कहा, "मैं टीवी पर कार्यक्रम देखकर दंग रह गया, मैंने देखा कि लोगों की बहुत रुचि है इसलिए मैंने काला जादू पर फिल्म बनाने का फ़ैसला किया."
रामगोपाल वर्मा का कहना है कि उनकी फ़िल्म ऐसे समय में आई है जब बॉलीवुड को अलग तरह की फ़िल्मों की तलाश है.
रामू का कहना है कि "मैंने ऐसी फ़िल्म बनाई है जो अब तक सिर्फ़ हॉलीवुड में बनती रही है, अब फूंक से साबित हो गया है कि बॉलीवुड में भी ऐसी फ़िल्में बन सकती हैं".
सत्या, रंगीला, सरकार, कंपनी और रोड जैसे सफल फ़िल्मों के पीछे रहे रामू के करियर को लेकर तरह-तरह की बातें कही जाने लगी थीं लेकिन लगता है कि फूंक का काला जादू चल गया है.