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शुक्रवार, 16 मई, 2008 को 16:22 GMT तक के समाचार

'कचरा कविताओं' से मोटी कमाई

जिस शख़्स को कभी 'दुनिया का सबसे घटिया कवि' कहा गया था, अब उनकी कविताओं की बोली लग रही है. उम्मीद है कि ये 5.20 लाख रुपए तक बटोर लेगी.

विलियम मैकगोनागल की 35 कविताएँ शुक्रवार को नीलामी की बेदी पर चढ़ेंगी. इनमें कुछ कविताओं पर कवि के हस्ताक्षर भी हैं.

'टेसाइड ट्रेज़िडियन' नाम से प्रसिद्ध इस कवि की इन छोटी-छोटी कविताओं और गीतों को वैसे ही आँका गया है जैसे जेके रॉलिंग के दस्तख़त वाले 'हैरी पॉटर' के पहले संस्करण को देखा गया था.

मैकगोनागल का वर्ष 1902 में निधन हो गया था. लोग उनका उपहास उड़ाते थे. एक बार तो डुंडी में कविता पढ़ने के दौरान उन पर खाने-पीने के सामान तक फेंके गए थे.

एडिनबर्ग में 1825 में पैदा हुए मैकगोनागल ने अपनी ज़िंदगी के ज़्यादातर समय डुंडी में बिताए जहाँ वे एक जूट मिल में बुनकर का काम करते थे.

उनकी कविताओं के विषय वस्तु में स्कॉटलैंड युद्ध और महारानी विक्टोरिया की पचासवीं सालगिरह तक जैसी बातें शामिल रहीं.

मौत और आपदा कविताएँ लिखने में उनकी कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी थी. वर्ष 1879 में टे नदी पर बने एक पुल पर हुई ट्रेन दुर्घटना पर लिखी गई उनकी कविता सबसे चर्चित रही है.

उस कविता की कुछ पंक्तियाँ....

टे पुल पर आगे धीरे-धीरे बढ़ी
जब यह बीच रास्ते में थी
तो बीच के पाया ने टूटकर रास्ता दे दिया
और ट्रेन के साथ-साथ यात्री भी टे में गिर गए

कविता पर टमाटर

नीलामी कर रही कंपनी 'ल्यॉन एंड टर्नबुल' के एलेक्स डोव कहते हैं, "मुझे लगता है कि 47 साल की उम्र तक उनमें कविताई नहीं आई थी. इसके बाद ही उनके दिमाग में आया कि उनमें दम है और वे कविताएँ लिख सकते हैं."

एलेक्स कहते हैं कि मैकगोनागल को लगा होगा कि वे बड़े शानदार कवि हैं और वो जो लिख रहे हैं वो सबसे अच्छा है.

डोव बताते हैं, "उन्होंने ये कविताएँ डंडी शहर की गलियों में घूमते-टहलते लिखीं. उन्हें लोगों ने जानबूझकर उकसाया ताकि वो मंच पर कविताएँ पढ़ें और लोग उनका मज़ाक उड़ा सकें."

एलेक्स कहते हैं, "कवियों पर सब्ज़ी वग़ैरह फेंकना आम बात हो गई थी. श्रोता मैकगोनागल पर इस तरह की चीज़ें फेंका करते थे."

कविताओं के इस संग्रह की नीलामी में जितने रुपए मिलेंगे उससे कम में ही जेम्स बांड के उपन्यास के संस्करण की पहली किताब बिकी थी.

उम्मीद की जा रही है कि ये कविताएँ 5.20 लाख रुपए से ज़्यादा में बिकेंगी जो रक़म 1931 में आई मिकी माउस की किताब से भी ज़्यादा होगी.

डोव कहते हैं, "मेरे ख़्याल से सबसे बुरे होने के कारण वे आज भी लोकप्रिय हैं."

मैकगोनागल ने ज़िंदगी भर शराब के ख़तरों के बारे में लोगों को चेताने के लिए कविताएँ लिखीं और उसे हास-उपहास के बीच सुनाते रहे.