मंगलवार, 11 मार्च, 2008 को 15:49 GMT तक के समाचार
सेबेस्श्चियन अशर
बीबीसी संवाददाता
लंबे इंतज़ार के बाद ही सही, लेकिन बीबीसी के अरबी टेलिविज़न की शुरुआत हुई काफी ज़ोर शोर से. बीबीसी के जाने माने प्रसारक हसन मौवाद ने दर्शकों का स्वागत करते हुए इस चैनल की शुरुआत की.
फिलहाल ये चैनल 12 घंटे के प्रसारणों के साथ देखा जा सकेगा, लेकिन कुछ ही महीनों में 24 घंटों का प्रसारण शुरू हो जाएगा.
इस चैनल के समाचार चैनल पर पहली आवाज़ बीबीसी अरबी सेवा के जाने माने प्रसारक टोनी अल ख़ौरी की थी जिन्होंने चैनल का परिचय देते हुए कहा कि लंदन से रेडियो, ऑनलाइन, टेलीविज़न, पोर्टेबल कंप्यूटर और मोबाइल फ़ोन पर बीबीसी के सभी प्रसारण उपलब्ध हैं, और इस मीडिया सेवा का हिस्सा हैं टेलीविज़न के दर्शक भी जिन्हें अब अपनी राय ज़ाहिर करने का रुख़ और ज़रिया दिया जा रहा है.
पहली ख़बर बम धमाकों की
बीबीसी के अरबी चैनल पर पहला समाचार बुलेटिन दिया फिदा बसील ने और पहले ही प्रसारण में पहली ख़बर थी लाहौर बम धमाकों की.
1990 के दशक में बीबीसी ने सऊदी अरब के साथ अरबी टेलिविज़न शुरू किया था लेकिन समाचार प्रसारण को लेकर उभरे मतभेदों के कारण बंद कर दिया गया.
बीबीसी को उम्मीद है कि अपनी अरबी रेडियो और ऑन लाइन सेवाओं की तरह ये टेलिविज़न चैनल भी लोगों के बीच ख़ासा लोकप्रिय हो जाएगा.
पिछले कुछ सालों में सौ से भी ज्यादा अरबी चैनल जिस तरह से उभर कर आए हैं, उन्हें देखते हुए कुछ मीडिया विश्लेषकों को कुछ ऐसा लगने लगा है कि शायद बीबीसी ने मीडिया बाज़ार में अपना अरबी चैनल उतारने में कुछ देर कर दी लेकिन बीबीसी विश्व सेवा के प्रमुख नाइजल चैपमेन ने इन आशंकाओं को नकारते हुए अरबी चैनल के लांच को बीबीसी की एक अहं उपलब्धि माना है.
उनका कहना है कि पिछले दस सालों में मध्यपूर्व और पूरे अरब जगत के मीडिया का पूरा परिदृश्य ही बदल गया है. अरब जगत में सूचना और समाचार का प्रमुख माध्यम टेलिविज़न बन चुका है. ऐसे में किसी भी अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवा का टेलिविज़न पर न होना उसकी सफलता पर सवालिया निशान तो लगा ही देता है.
अरबी टीवी का बजट
अरबी चैनल के लिए लगभग पाँच करोड़ डॉलर प्रतिवर्ष के बजट के साथ बीबीसी ये उम्मीद कर रही है कि ये चैनल अपने प्रसारण में निष्पक्षता, पारदर्शिता और सटीक समाचार की परंपरा को बरकारार रख सकेगा.
भव्य सेट और विश्वास से भरे प्रेज़ेंटर्स को देख कर ऐसा लगता है कि पिछले दशक में बाज़ार में आए सौ से भी ज़्यादा अरबी टेलीविज़न चैनलों के बीच बीबीसी का अरबी में शुरू हुआ नया टेलीविज़न चैनल बिल्कुल फ़िट बैठेगा.
इस नए चैनल के पीछे काम कर रही बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के प्रमुख नाइजेल चैपमैन कहते हैं, "लगभग दो सौ लोग लंदन और दुनिया के अन्य जगहों से इस अरबी टीवी चैनल के लिए काम करेंगे."
"यरूशलम, काहिरा, वाशिंगटन और उत्तरी अफ़्रीका में बीबीसी अरबी चैनल के अपने संवाददाता होंगे. साथ ही बीबीसी के दुनिया भर में फैले संवाददाताओं का सहयोग भी इस चैनल को मिलेगा."
अरबी टीवी चैनल के प्रमुख होसाम अल-सोकारी कहते हैं कि इस चैनल को अरबी रेडियो की 70 साल पुरानी परंपरा से जीवन शक्ति मिलेगी.
वे कहते हैं, "बीबीसी अरबी टीवी उस सेवा का विस्तार है जो वर्ष 1938 से मौजूद हैं."
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में क़तर स्थित अल जज़ीरा टीवी चैनल ने अरबी मीडिया की छवि बदल दी है. अरबी के दर्शक अब तेज़ और पेशेवर अंदाज़ में ख़बरों की प्रस्तुति के आदी हो चले हैं.
1990 के दशक के मध्य में बीबीसी ने एक अरब टीवी स्टेशन के साथ एक नए अंदाज़ में चैनल की शुरूआत की थी लेकिन यह बहुत दिन तक नहीं चल सका.
तो क्या बीबीसी ने एक बार फिर बाज़ार में उतरने में देर तो नहीं की?
बेरूत में रहने वाले मीडिया विशेषज्ञ हबीब बताह ऐसा नहीं मानते. उनका कहना है, "अल-जज़ीरा और अल-अरबिया चैनलों पर कई विवादास्पद विषयों से संबंधित ख़बरें देखने को नहीं मिलतीं, इस वजह से अरबी में ख़बरों के बाज़ार में काफ़ी संभावनाएँ हैं."
बीबीसी अरबी टेलीविज़न चैनल पर एक इंटरव्यू कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रहे हसन मुवाद कहते हैं, "मुझे लगता है कि संभव है अन्य लोग हमसे सीख लें. हम अरब जगत में प्रेस स्वतंत्रता की चौहद्दी को और आगे ले जाएँगे. हमारे पास पहले से कोई ऐजेंडा नहीं है."