गुरुवार, 06 मार्च, 2008 को 15:43 GMT तक के समाचार
वंदना
बीबसी संवाददाता, लंदन
महिला दिवस के मौके पर सिनेमा में एशियाई महिलाओं के योगदान को सलाम करता विशेष फ़िल्म उत्सव लंदन में मनाया जा रहा है.
उत्सव का नाम है-टंग्स ऑन फ़ायर जिममें सिने जगत में एशियाई मूल की महिलाओं के काम को दर्शाया गया है. ये उत्सव का 10वां संस्करण है.
आठ मार्च से शुरू होने वाले इस उत्सव का आगाज़ फ़िल्म निर्देशक तनुजा चंद्रा की आने वाली फ़िल्म ‘होप एंड ए लिटिल शूगर’ से हो रहा है. तनुजा चंद्रा बाद में फ़िल्म निर्देशन के बारे में एक विशेष कार्यशाला भी करेंगी.
करीब एक महीने तक चलने वाले इस फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ऐसी फ़िल्में दिखाई जाएँगी जिन्हें या तो महिला निर्देशकों ने बनाया है या फिर फ़िल्म का केंद्रीय किरदार महिला है.
पूर्व में शबाना आज़मी, गुरिंदर चड्ढा, मीरा नायर, नंदिता दास, आयशा धारकर और हेलन जैसी हस्तियाँ इस फ़ेस्टिवल का हिस्सा रह चुकी हैं.
सिनेमा, थिएटर और टेलीवीज़न में उनके योगदान के लिए इस बार फ़ेस्टिवल में भारतीय मूल की ब्रितानी लेखिका और अभिनेत्री मीरा सयाल को सम्मानित किया जा रहा है.
कई मुद्दे उठातीं फ़िल्में
उत्सव की निदेशक ने पुशपिंदर चौधरी ने बताया, "महिलाओं पर केंद्रित इस फ़िल्म उत्सव को हम आम लोगों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे उत्सवों के ज़रिए एशियाई महिलाओं की सकारात्मक छवि लोगों तक पहुँचाने में मदद मिलती है. इससे न सिर्फ़ उनका आत्मविश्ववास बढ़ता है बल्कि सांस्कृतिक मेलमिलाप को भी बढ़ावा मिलता है."
फ़ेस्टिवल में एक ओर जहाँ एड्स के विषय को उठाती फ़िल्म है तो दूसरी ओर धर्म और विवाहोत्तर संबंधों जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं.
एड्स पर लघु फ़िल्मों की श्रृंखला ‘एड्स जागो’ फ़ेस्टिवल में दिखाई जा रही है.एड्स जागो में मीरा नायर, विशाल भारद्ववाज, संतोष सिवान और फ़रहान अख़्तर की लघु फ़िल्में हैं.
एक ओर जहाँ धार्मिक कट्टरता और मानवीय भावनाओं पर सवाल उठाने वाली भारतीय निर्देशक भावना तलवार की फ़िल्म धर्म है, तो इसी विषय पर बनी पाकिस्तानी फ़िल्म ख़ुदा के लिए भी चुनी गई है जिसमें नसीरुद्दान शाह ने काम किया है.
पिछली बार बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में ‘पहली बार निर्देशित की गई फ़िल्म’ की श्रेणी में पुरस्कार जीतने वाली तेलगु फ़िल्म वनजा भी फ़ेस्टिवल में शामिल की गई है.
ब्रितानी लेखिका और निर्देशक शमीम शरीफ़ की फ़िल्म ‘द वर्ल्ड अनसीन’ रंगभेद के समय वाले दक्षिण अफ़्रीका में दो एशियाई महिलाओं की ज़िंदगी का गाथा बयां करती है.
इसके अलावा लघु फ़िल्मों की एक प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी जिसमें उभरते हुए फ़िल्मकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकेगा.
ये फ़िल्म उत्सव 25 मार्च तक चलेगा.