मंगलवार, 26 फ़रवरी, 2008 को 11:08 GMT तक के समाचार
संदीप साहू
भुवनेश्वर, उड़ीसा से
भारत के उड़ीसा राज्य में एक अनोखी शादी में दुल्हन को पाँच मीटर लंबी साड़ी में सजाया गया और उसे देखने के लिए लगभग तीन हज़ार ग्रामीण इकट्ठा हुए, लेकिन ऐसा क्या ख़ास था इस शादी में...
दरअसल ये शादी थी दो बंदरों के बीच थी जिनका विवाह बाक़ायदा हिंदू रीति-रिवाज़ के अनुसार किया गया. पिछले गुरूवार को उड़ीसा के घंटेस्वरा गाँव में हुए इस विवाह में दुल्हन पर तो फूलों की बरसात हुई लेकिन दूल्हा भी कुछ कम ख़ुश नहीं था.
भारत के पूर्वी राज्य उड़ीसा में हिंदू रीति रिवाज़ों के साथ हुई दो बंदरों की इस शादी के आयोजन में क़रीब तीन हज़ार लोग शामिल हुए.
शादी का यह आयोजन उड़ीसा के घंटेश्वर गाँव में पिछले बृहस्पतिवार को हुआ.
इस शादी में मेहमानों को चावल, दाल, सब्जियाँ, मछली और मिठाई की दावत दी गई.
हिंदुओं की पौराणिक कथाओं में बंदरों का बहुत महत्व है, हिंदू धर्म में बंदरों को हनुमान का अवतार मान कर पूजा जाता है लेकिन उड़ीसा में इन बंदरों को पालने और इनकी शादी करवाने वाले दंपत्ति का कहना है कि वे इन्हें पालतू जानवरों की तरह प्यार करते हैं.
धूमधाम से निकली बारात
यह शादी उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से क़रीब 200 किलोमीटर दूर संपन्न हुई.
'मनु' नाम के तीन साल के दूल्हे बंदर को एक बारात के रूप में सैकड़ों तमाशबीनों के साथ एक मंदिर में ले जाया गया. इस बीच तेज़ संगीत और पटाखों के साथ लोगों ने नृत्य भी किया.
महिलाओं ने दूल्हे का स्वागत हिंदू विवाह उत्सव की ही तरह तेज़ सुर वाले गीतों से किया जिसके साथ-साथ पुजारी ने पवित्र मंत्रों का उच्चारण किया.
पुजारी दैतारी दाश कहते हैं, "यह मेरे लिए एक अनोखा अनुभव था. मैंने पहली बार जानवरों की शादी करवाई है लेकिन मैंने सभी रीति रिवाज़ों को ठीक उसी तरह संपन्न करवाया जैसे मनुष्यों में करवाया जाता है."
महिलाओं ने 'झुमरी' नाम की मादा बंदर को ठीक उसी तरह से सजाया जैसे मनुष्यों में सजाया जाता है.
उसे सुर्ख़ रंग की साड़ी पहनाई गई और उसके बदन पर चंदन का उबटन लगाया.
शादी के साथ आज़ादी
शादी में आरए मेहमानों ने इन बंदरों को उपहारों से लाद दिया. एक स्थानीय व्यवसाई ने दुल्हन झुमरी को सोने का हार भी भेंट किया.
झुमरी को पालने वाली महिला मामिना ने कहा, "मुझे लग रहा है कि जैसे मेरी अपनी बेटी की शादी हुई हो. मैं तो यह सोच भी नहीं पा रही हूँ कि अब यह हमारे साथ नहीं रहेगी."
मामिना के पति को झुमरी एक स्थानीय मंदिर में मिली थी, तब से वह उसे पाल रही है.
बंदर ‘मनु’ उसे पालने वाले दंपत्ति को पास के गाँव में आम के एक बाग में मिला जिन्होंने उसे लाड-प्यार से पाल-पोसकर बड़ा किया.
दोनों बंदरों को शादी से पहले तक ज़ंजीर से बाँध कर रखा गया लेकिन शादी के बाद उन्हें मुक्त कर दिया गया.
इसके बाद उन्हें उस मंदिर की दीवारों पर उछल-कूद करते हुए देखा गया जहाँ उनकी शादी हुई थी.
एक स्थानीय ग्रामीण मित्रभानु दत्ता ने कहा, "यह आयोजन बंदरों को अपनी क़ैद से आज़ाद करने का एक अच्छा तरीका था."