सोमवार, 15 अक्तूबर, 2007 को 19:30 GMT तक के समाचार
भारत की ओर से ऑस्कर के लिए सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्मों की श्रेणी में एकलव्य: द रॉयल गार्ड को भेजने के फ़ैसले पर विवाद तूल पकड़ता जा रहा है. अब इस विवाद को और हवा दी है फ़िल्मों का चयन करने वाली जूरी के अध्यक्ष विनोद पांडे ने.
विनोद पांडे का कहना है कि ऑस्कर में एकलव्य को भेजने पर विचार नहीं किया जाना चाहिए था. उन्होंने स्वीकार किया कि चयन प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएँ थी.
एकलव्य को ऑस्कर में भेजने का मामला अदालत में भी चल रहा है. आरोप है कि जूरी ने पक्षपात किया.
इस मामले पर विवाद बढ़ता देख ऑस्कर के अधिकारियों ने भारत से कहा है कि वह बुधवार तक अपनी स्थिति स्पष्ट करे कि वे एकलव्य को ही भेजना चाहते हैं या नहीं.
जबकि मुंबई हाई कोर्ट इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई करने वाला है. इस बीच जूरी के अध्यक्ष विनोद पांडे ने कहा है कि हो सकता है कि इस बार भारत की ओर से कोई फ़िल्म भेजी ही ना जाए.
फ़ैसला
पाँच फ़िल्मों में से जूरी ने विधु विनोद चोपड़ा निर्देशित फ़िल्म द रॉयल गार्ड को ऑस्कर में भेजने का फ़ैसला किया था. इन पाँच फ़िल्मों में भावना तलवार की फ़िल्म धर्म भी शामिल थी.
भावना तलवार की ये पहली फ़िल्म है. एकलव्य को ऑस्कर में भेजने के लिए चुने जाने के बाद भावना तलवार ने मुंबई हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
उनका आरोप है कि जूरी के सदस्यों के विधु विनोद चोपड़ा के साथ क़रीबी संबंध हैं, जो दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है.
अब जूरी के अध्यक्ष विनोद पांडे ने बीबीसी से बातचीत में स्वीकार किया है कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएँ थी.
ऑस्कर एकेडमी और फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के दिशा निर्देशों के मुताबिक़ दौड़ में शामिल फ़िल्मों से संबंधित किसी भी व्यक्ति को जूरी से हट जाना चाहिए.
गड़बड़ी
अब विनोद पांडे ने कहा है कि जूरी में शामिल एक व्यक्ति ने स्वीकार किया है कि वो फ़िल्म एकलव्य से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि इससे तो यही लगता है कि चयन ठीक नहीं था.
एकलव्य में अमिताभ बच्चन ने अहम किरदार निभाया था. साथ में संजय दत्त, सैफ़ अली ख़ान और विद्या बालन ने भी इस फ़िल्म में भूमिका निभाई है.
फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई थी और कई फ़िल्म समीक्षकों ने भी फ़िल्म की आलोचना की थी.
दूसरी ओर भावना तलवार की फ़िल्म धर्म को काफ़ी सराहना मिली थी. धर्म फ़िल्म एक हिंदू पुजारी की कहानी है जो एक बच्चे को गोद लेता है लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि बच्चे के माता-पिता मुस्लिम हैं.
अगर मुंबई हाई कोर्ट ऑस्कर एकेडमी की दी गई समयसीमा के अंदर सुनवाई पूरी नहीं करता तो हो सकता है कि भारत की ओर से कोई फ़िल्म सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्मों की श्रेणी में भेजी ही ना जाए. विनोद पांडे ने भी यह बात स्वीकार की है.