सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क
जहाँ एक ओर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महासभा के 62वें अधिवेशन में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और राजनेता विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय सामने रखने के लिए भाषणबाज़ी कर रहे थे, वहीं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की इमारत के बाहर कुछ प्रदर्शनकारी भूख की समस्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.
इनमें दुनिया के कई देशों के मशहूर अभिनेता और कलाकार मौजूद थे जिनमें हॉलीवुड, बॉलीवुड और नाइजीरिया की नॉलीवुड के फ़िल्म सितारे भी शामिल थे.
इस प्रदर्शन में भारत का प्रतिनिधित्व फ़िल्म अभिनेत्री शबाना आज़मी कर रही थीं. हॉलीवुड अभिनेता टिम मेडोज़ और नाईजीरिया की अभिनेत्री हिल्डा डोकूबो भी प्रदर्शनकारियों में शामिल थे.
इन लोगों का मकसद यह है कि संयुक्त राष्ट्र भूख के बारे में और तेज़ी से काम करे और दुनिया भर में विभिन्न देशों में जो लोग भूखे रह जाते हैं उनको खाना नसीब हो.
भूख का शिकंजा
एक अंदाज़े के मुताबिक दुनिया भर में रोज़ाना करीब 80 करोड़ 54 लाख लोगों को भूखे पेट सोना पड़ता है.
और यह संख्या उस समय है कि जब संयुक्त राष्ट्र ने सन 2000 में विश्व भर से भूख की समस्या को सन 2015 तक खतम करने का वादा किया था. इसके बावजूद ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि भूख के मारों में 54 लाख लोग और बढ़ गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार विश्व में बच्चों की मृत्यु की कुल संख्या में से 53 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण कुपोषण होता है.
भूख का संबंध अशिक्षा से भी है क्योंकि माँ-बाप बच्चों को बजाए स्कूल भेजने के रोटी के जुगाड़ में लगा देते हैं.
भूख से जुड़ी हुई इन्हीं समस्याओं की ओर ध्यान खींचने के मकसद से ही ये कलाकार एक्शन एड नामक ग़ैरसरकारी संस्था के बैनर तले दुनिया भर में इस मुददे को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं.
शबाना आज़मी अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ संयुक्त राष्ट्र की इमारत के सामने भूख को विश्व से खत्म करने के लिए नारे लगा रही थीं. इन प्रदर्शनकारियों में बांग्लादेश, नेपाल, यूगांडा, नईजीरिया, ब्राज़ील समेत अफ़्रीका, एशिया और दक्षिण अमरीका के कई देशों के लोग शामिल थे.
प्रदर्शनकारियों के हाथ में तरह तरह के नारे लिखे हुए पोस्टर भी थे जिनपर भूख खत्म करने के लिए नारे लिखे थे और भूख और कुपोषण से करोड़ों लोगों की ज़िंदगियों को होने वाले खतरों का भी ज़िक्र था.
'शर्मनाक'
शबाना आज़मी का कहना था कि यह शर्मनाक बात है कि भूख जैसे प्रकोप से इस सदी में भी करोड़ों लोग जूझ रहे हैं. उनका कहना था, “हम आज इसीलिए यहाँ संयुक्त राष्ट्र के सामने खड़े हैं कि दुनिया भर से आए हुए नेतागण इस मुददे को अनदेखा न कर सकें.”
शबाना आज़मी ने खासतौर पर अमरीका पर भूख के इस मुददे पर काम में तेज़ी लाने के रास्ते में रोड़े अटकाने का इल्ज़ाम लगाया.
अमरीका पर निशाना साधते हुए शबाना आज़मी बोलीं, “मेरी समझ से बाहर है कि किस तरह से अमरीका संयुक्त राष्ट्र में लोगों के खाने के अधिकार के सिलसिले में लाए जाने वाले प्रस्ताव के रास्ते में रोड़े अटका रहा है. और यह एक ऐसे धनी देश की बात है जहाँ करोड़ों डॉलर तो सिर्फ़ आइस्क्रीम पर खर्च कर दिए जाते हैं. मुझे ऐसा लगता है कि इस मुददे पर जितना ग़ुस्सा सभी लोगों में आना चाहिए हमारे अंदर उतना ग़ुस्सा अभी आया नहीं है.”
संयुक्त राष्ट्र महा सभा में दुनिया भर के लोगों को खाना मुहैय्या होने के हक़ के बारे में लाए जाने वाले प्रस्ताव का सिर्फ़ अमरीका ही अकेला देश है जो विरोध कर रहा है.
अमरीका का मुख्य विरोध इस बात पर है कि इस प्रस्ताव में जो अंतरराष्ट्रीय कर की बात कही गई है वह न्यायसंगत नहीं हैं और उसको लागू करना भी बहुत मुश्किल होगा.
शबाना आज़मी का कहना था कि अब इस मुद्दे पर धीरे धीरे बात करने से बात बनेगी नहीं बल्कि अब भूख को लेकर शोर मचाना पड़ेगा तभी दुनिया भर के नेतागण कान धरेंगे.
भारत में भी भूख की मार झेल रहे लोगों का ज़िक्र करते हुए शबाना आज़मी कहती हैं, “भारत की अर्थव्यवस्था तो छलांगें मार रही है लेकिन इसमें गरीब लोगों का खास भला नहीं हो रहा है, और भारत में हर चार में से एक आदमी को रोज़ाना भूखा सोना पड़ता है.”
एक्शन एड द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को चाहिए कि वह महासभा में खाने के हक़ के बारे में लाए जाने वाले प्रस्ताव को पूरा समर्थन दें.