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रविवार, 23 सितंबर, 2007 को 17:38 GMT तक के समाचार

कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार

अब अलग-अलग हैं शाहिद और करीना?

करीना कपूर और शाहिद कपूर के ब्रेक-अप की ख़बर सोलह आने सच है और उनकी नई फ़िल्म जब वी मेट के लिए पब्लिसिटी स्टंट नहीं है.

दरअसल जब शाहिद टिप्स की अज़ीज़ मिर्ज़ा निर्देशित फ़िल्म की शूटिंग करने के लिए कनाडा में थे तब करीना कपूर सैफ़ अली ख़ान के साथ जैसलमेर में यश चोपड़ा की टशन की शूटिंग कर रही थी.

वहीं पर सैफ़ और करीना का रोमांस शुरू हुआ और तब करीना ने शाहिद ने फ़ोन कॉल्स उठाने बंद कर दिए.

शाहिद कपूर के एसएमएस के जवाब भी करीना नहीं देती थी. तब शाहिद को भनक पड़ी कि मामला कुछ गड़बड़ है.

यानी कि पर्दे पर जब वी मेट आए, उससे पहले ही असली जीवन में 'जब हम जुदा हुए' हो गया.

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दो सितारों की प्रतियोगिता

बड़े बैनर, बड़ी फ़िल्में और बढ़िया किरदारों से अब बड़े कलाकारों का झगड़ा फ़िल्म के टाइटिल में भी नज़र आने लगा है.

जब से अक्षय कुमार की फ़िल्मों ने विदेश में अच्छा बिजनेस करना शुरू किया है तब से अक्षय कुमार की शाहरुख़ ख़ान की स्थिति तक पहुँचने की बहुत इच्छा है.

और होनी भी चाहिए. शाहरुख़ के साथ उनकी प्रतिद्वंद्विता इतनी बढ़ गई है कि अब तो फ़िल्मों के नाम से भी प्रतियोगिता की झलक नज़र आती है.

करण जौहर की शाहरुख़ ख़ान के साथ बन रही अगली फ़िल्म का टाइटिल है- माई नेम इज़ ख़ान. तो अक्षय कुमार पीछे कैसे रहते?

उनके सबसे प्रिय निर्माता-निर्देशक विपुल शाह की अक्षय कुमार के साथ बन रही अगली फ़िल्म का नाम है- सिंह इज़ किंग. इस फ़िल्म का निर्देशन कर रहे हैं अनीस बज़्मी.

इसकी शूटिंग बहुत जल्द शुरू होने वाली है और ये फ़िल्म अगले साल अप्रैल में रिलीज़ भी हो जाएगी. तब तक तो करण की माई नेम इज़ ख़ान की शूटिंग आधी भी ख़त्म नहीं होगी.

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ऋतिक रोशन हैं अब फ़्री

ऋतिक रोशन शायद अगले छह महीने के लिए फ़्री रहेंगे. उनकी जोधा अकबर का काम लगभग ख़त्म हो चुका है और इस फ़िल्म के अलावा ऋतिक ने और कोई फ़िल्म साइन नहीं की है.

कहानियाँ तो ऋतिक ख़ूब सुनते हैं लेकिन इन दिनों उन्होंने ऐसी कोई कहानी नहीं सुनी जिसे सुनकर वे झट से फ़िल्म साइन कर लें. उनके पिताजी राकेश रोशन दो कहानियों पर काम कर रहे हैं.

जिसमें एक कृष का सिक्वेल है. दोनों में से जो कहानी अच्छी बनती है, उसे पहले पूरा करेंगे. लेकिन उसमें भी कुछ महीने लगने वाले हैं.

वैसे भी राकेश रोशन ने तय कर लिया है कि जब तक उनके बैनर तले बन रही क्रेज़ी 4 ख़त्म होकर रिलीज़ नहीं हो जाती तब तक वो अपनी नई फ़िल्म शुरू नहीं करेंगे.

हालाँकि क्रेज़ी 4 का निर्देशन राकेश रोशन ख़ुद नहीं कर रहे हैं फिर भी उसके निर्माण में वे पूरी तरह जुटे हुए हैं. और हाँ, राकेश रोशन ने मीडिया में चल रहे इस ख़बर को ग़लत बताया है कि राकेश मेहरा कृष 2 का निर्देशन करेंगे.

राकेश ने कहा, "अगर राकेश मेहरा मुझसे किसी काम के सिलसिले में मिलने आते हैं तो इसका मतलब ये कैसे हुआ कि वे कृष 2 बनाएँगे. अभी तो ख़ुद मुझे पता नहीं कि कृष 2 बनेगी भी या नहीं."

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ढोल के निर्माता को नोटिस

प्रियदर्शन की ढोल के सिलसिले में निर्माता परसेप्ट पिक्टर कंपनी को क़ानूनी नोटिस मिला है. ये प्रियदर्शन की दूसरी फ़िल्म है जिसके निर्माता को कॉपीराइट के सिलसिले में क़ानूनी तौर पर लड़ना पड़ेगा.

इससे पहले भागमभाग के निर्माता पर ये आरोप था कि उनकी फ़िल्म में प्रियदर्शन ने मराठी फ़िल्म के सीन चुराए थे. अब ढोल के मामले में किसी ने ये दावा किया है कि ये फ़िल्म उनकी फ़िल्म की कॉपी है.

ढोल एक मलयाली फ़िल्म इन हरिहरनगर से मिलती-जुलती कहानी है. इस मलयाली फ़िल्म के हिंदी रीमेकिंग राइट्स ख़रीद कर वर्षों पहले चंकी पांडे के साथ के बाप्पैया के निर्देशन में पर्दा है पर्दा बनी थी.

ख़ैर ऐसा चलता रहा तो प्रियदर्शन को बहुत जल्द या तो कोर्ट में फ़िल्में बनानी पड़ेंगी क्योंकि उनका काफ़ी समय कोर्ट में बीतेगा और या फिर वे कोर्ट रूम ड्रामा बनाने में माहिर हो जाएँगे.

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फ़्लॉप फ़िल्म का तर्क

जब कोई फ़िल्म फ़्लॉप होती है तब उस फ़िल्म से जुड़ा हर इंसान फ़्लॉप का कारण किसी और के कंधे पर रखने की कोशिश में लग जाता है.

नन्हे जैसलमेर की बॉक्स ऑफ़िस पर पिटाई के बाद बॉबी देओल कहते फिर रहे हैं कि निर्माता ने उस फ़िल्म की पब्लिसिटी बराबर नहीं की थी. इस वजह से फ़िल्म फ़्लॉप हो गई.

तुषार कपूर का भी फ़िल्म अगर के लिए ऐसा ही कहना है. और फ़्लॉप अगर के निर्देशक अनंत नारायण महादेवन उनकी फ़िल्म की असफलता क्रिकेट मैच और बरसात जैसी चीज़ों पर थोप रही हैं.

कोई ये नहीं कहता है कि फ़िल्म अच्छी नहीं थी, इसलिए नहीं चली. पर सच बात तो यही होती है कि फ़िल्म तभी फ़्लॉप होती है जब वो दर्शकों को पसंद नहीं आती है.

लेकिन सबसे बड़ा सच तो यही होता है कि फ़िल्म तभी फ़्लॉप होती है जब वो दर्शकों को पसंद नहीं आती है. लेकिन सबसे बड़ा सच तो ये है कि सच बोलने की शक्ति ज़्यादा लोगों में नहीं होती.

इसलिए झूठ का सहारा लेकर फ़िल्म की असफलता की वजह किसी और के सिर रख देते हैं. क्योंकि अगर कोई ये कह देता है कि फ़िल्म अच्छी नहीं थी तो सबसे पहला सवाल ये उठता है कि अगर अच्छी नहीं थी तो आपने उस फ़िल्म में काम क्यों किया.

और इसका सीधा-सादा जवाब है- सिर्फ़ पैसे के लिए.

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ओम शांति ओम में आँसू नहीं

संजय लीला भंसाली की साँवरिया के बाद फ़रहा ख़ान ने अपनी फ़िल्म ओम शांति ओम का संगीत रिलीज़ किया तो समारोह शुरू होने से पहले ऐलान कर दिया गया- आज यहाँ कोई रोएगा नहीं.

जी हाँ, उनका इशारा साँवरिया की तरफ़ था. दरअसल साँवरिया के म्यूज़िक समारोह के दौरान अनिल कपूर और उनकी बेटी सोनम कपूर की आँखें भर आईं थी.

इसी कारण ओम शांति ओम की म्यूज़िक रिलीज़ के दौरान ऐसी घोषणा की गई. और रोता भी कोई कैसे. फ़नी मैन साइरस ब्रोचा जो शो की एंकरिंग कर रहे थे.

वैसे साइरस के फ़ंक्शन में भी सिर्फ़ आँसू नहीं थे. वहाँ पर सलमान ख़ान ने अतिथियों को चुटकुले सुना-सुना कर ख़ुश कर दिया.