रविवार, 16 सितंबर, 2007 को 13:21 GMT तक के समाचार
कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार
रणबीर कपूर और सोनम कपूर की पहली फ़िल्म साँवरिया का म्यूज़िक 15 सितंबर को भारी तामझाम के बीच रिलीज़ हुआ.
उसी दिन निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली ने रणबीर और सोनम को पहली बार मीडिया के सामने पेश भी किया.
सोनम उस दिन ख़ुश तो थीं लेकिन उन्हें थोड़ा दुख भी हुआ. दुख इसलिए कि उनके बड़े पापा यानी बोनी कपूर और बड़ी मम्मी यानी श्रीदेवी म्यूज़िक रिलीज़ की पार्टी में शामिल नहीं हो पाए.
उस दिन वो दोनों चेन्नई में थे और मुंबई नहीं आ सके. दरअसल श्रीदेवी की बहन की ससुराल में शादी थी जिसमें श्रीदेवी की उपस्थिति बहुत ज़रूरी थी.
और जहाँ बीवी वहाँ शौहर. ख़ैर चेन्नई जाने से पहले 15 सितंबर की सुबह बोनी कपूर सोनम के घर गए और वहाँ अपनी भतीजी को आशीर्वाद दिया और ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ भी दी.
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जवानी ज़िंदाबाद..
लगता है अगला साल भी सलमान ख़ान के लिए अच्छा जाएगा. उनकी हाल ही में बन रही फ़िल्म वांटेड (ये टाइटिल अभी फ़ाइनल नहीं है) के गाने इतने अच्छे हैं कि जब अगले साल ये फ़िल्म रिलीज़ होगी, तो ओपनिंग तो ज़बरदस्त लेगी.
पार्टनर के संगीतकार साजिद-वाजिद ने तमिल और तेलुगू सुपरहिट पोक्किरी के इस इस रीमेक के गानों को संगीत दिया है.
जो गाने रिकॉर्ड हो कर फ़िल्माए गए हैं, उनमें से एक- योर ममा टोल्ड यू लव मी, योर डैडी टोल्ड यू लव मी, तो इतना बढ़िया है कि सुपरहिट गाना हो सकता है.
इस में फ़िल्म के निर्देशक और डांस डायरेक्टर प्रभु देवा ने सलमान को जो नचाया है, उसका तो क्या कहने.
सलमान लगे भी ख़ूबसूरत हैं. पता नहीं, वो किस चक्की का आटा खाते हैं, दिनों-दिन वे जवान होते जा रहे हैं.
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गुलाब जामुन से कुछ कुछ होता है..
इस हफ़्ते की रिलीज़ हुई फ़िल्म अगर के दोनों नायकों को गुलाब जामुन के नाम से कुछ कुछ होता है. जहाँ श्रेयस तलपड़े को ये मिठाई बहुत पसंद है, वहीं तुषार कपूर को गुलाब जामुन से नफ़रत है.
तुषार ने एक बार बचपन में एक साथ सात गुलाब जामुन खा लिए थे जिसके बाद वे बीमार पड़ गए. बस होना क्या था? उस दिन के बाद हमारे तुषार भैया की पसंदीदा चीज़ों में से इस मिठाई का नाम हट गया.
श्रेयस को ऐसा कुछ नहीं हुआ. वो सात नहीं सत्रह गुलाब जामुन भी एक साथ खा सकते हैं. बस शर्त ये है कि उन्हें साथ में दही मिल जाए. दही? जी हाँ, हमारे इक़बाल मियाँ गुलाब जामुन को दही के साथ खाते हैं.
मुँह मत बनाइए. खाकर देखिए. लेकिन अच्छा ना लगे तो हमें मत कोसिएगा. झगड़ा कीजिएगा 'अगर' के दिमाग़ के डॉक्टर आदित्य मर्चेंट से. श्रेयस की तरह कॉमेडियन विनय पाठक भी गुलाब जामुन दही के साथ लेते हैं.
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जर्मनी में जलवा
ब्रिटेन, अमरीका, मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर बॉलीवुड का बोलबाला तो है ही, पर जर्मनी में भी हिंदी फ़िल्मों के आशिक़ों की कमी नहीं है.
यूरोप के इस देश में बॉलीवुड को लोग फ़िल्म लगान के बाद जानने लगे. लगान के कारण जर्मन आमिर ख़ान से प्यार करने लगे. लेकिन वहाँ के लोग शाहरुख़ ख़ान को पूजते हैं.
कहते हैं कि जर्मनी की सड़कों पर अगर हिंदी फ़िल्मों की बातें करें और वहाँ के रहने वालों को अपने चहेती हिंदी फ़िल्म के हीरो का नाम लेने को कहें तो शाहरुख़ ख़ान ही बाज़ी मार लेंगे.
ऐसे ही थोड़े ना शाहरुख़ ख़ान को किंग ख़ान का ख़िताब दिया गया है.
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सारिका के पद चिह्नों पर...
सारिका और कमल हासन की बेटी श्रुति भी अब फ़िल्मों में आने के लिए तैयार हैं.
ज़ाहिर है उन पर एक अच्छी अभिनेत्री बनने का दबाव होगा क्योंकि उनकी मम्मी और पापा, दोनों ही बेहतरीन कलाकार हैं.
इस शुक्रवार को ही सारिका को वर्ष 2006 के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. ये पुरस्कार उन्हें परज़ानिया के लिए मिला है.
अब श्रुति हिंदी फ़िल्मों से अपना करियर शुरू करती हैं या तमिल फ़िल्म से- ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा.
लेकिन ये बात तो सच है कि फ़िल्म इंडस्ट्री को जल्द ही एक और ख़ूबसूरत नायिका मिलने वाली है.
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करोड़ों के शाइनी
भूल भुलैया के अभिनेताओं के नाम पढ़कर ऐसा लगता है कि हे बेबी के बाद इस फ़िल्म में एक बार फिर अक्षय कुमार और विद्या बालन की जोड़ी देखने को मिलेगी.
लेकिन असलियत और ही है. भूल भुलैया में निर्देशक प्रियदर्शन ने विद्या की जोड़ी अक्षय के साथ नहीं शाइनी आहूजा के साथ बनाई है. अक्षय इस फ़िल्म में काफ़ी लेट आते हैं.
यही तो वजह है कि शाइनी ने टी-सिरीज़ की ये फ़िल्म सस्ते में कर ली. एक तो निर्माता इतना बड़ा, दूसरा प्रियदर्शन कामयाब निर्देशकों में से एक हैं और तीसरी बात ये कि विद्या के साथ काम करने का ये पहला मौक़ा था.
नहीं तो शाइनी एक करोड़ रुपए से कम में फ़िल्म साइन भी नहीं करते. एक समय था जब सिर्फ़ अमिताभ बच्चन को करोड़ रुपए मिलते थे. और अब शाइनी आहूजा जैसे कलाकार भी करोड़ों की बातें करते हैं.