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शनिवार, 15 सितंबर, 2007 को 10:36 GMT तक के समाचार

पहले सेहत का प्रमाण, फिर कैटवॉक

लंदन फ़ैशन वीक में रैंप पर कैटवॉक करने से पहले मॉडलों को यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि वे खाने-पीने की अनियमितता का शिकार नहीं हैं.

दरअसल, फ़ैशन मॉडलों को आदर्श बनाकर नवयुवतियाँ दुबली रहने का प्रयास करती हैं और इसके चक्कर में खाने-पीने की अनियमितता से जुड़ी बीमारी 'ब्यूलिमिया' का शिकार हो जाती हैं.

मॉडलों की स्वास्थ्य समिति ने कहा है कि वह 'साइज़ ज़ीरो गर्ल्स' को कैटवॉक की इजाज़त देने की सिफ़ारिश नहीं करेगी.

साइज़ ज़ीरो का मतलब उन छरहरी मॉडलों से है जो बेहद दुबली-पतली हैं और जिनकी कमर 22 इंच की होती है.

कमर का ये आकार आमतौर पर आठ साल की लड़कियों का होता है, यही वजह है कि फ़ैशन की दुनिया में इसे 'ज़ीरो साइज़ गर्ल्स' कहा जाता है.

प्रतिबंध

समिति ने फिर दोहराया है कि वह चाहेगी कि 16 साल से कम उम्र की मॉडलों पर प्रतिबंध लगे.

समिति ने कहा है कि लंदन फ़ैशन वीक में मॉडलों को अपनी सेहत के संबंध में खाने-पीने की अनियमितता वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए.

समिति का गठन करने वाले ब्रितानी फ़ैशन परिषद ने कहा है कि वह समिति की 14 सिफ़ारिशों पर विचार करेगी.

समिति की प्रमुख बैरोनेस किंग्समिल ने कहा कि किशोरियों को वयस्क युवतियों के रूप में पेश करना 'बहुत गलत' है.

मॉडलों की स्वास्थ्य समस्याओं की जाँच कर रहे दल ने 17 और 18 साल तक की मॉडलों की सेहत का भी ख़ास ख़्याल रखने को कहा है.

लेकिन विशेष दल ने सभी मॉडलों का वज़न करने की सलाह को इस आधार पर ख़ारिज़ कर दिया है कि दुनिया के किसी भी देश में इस तरह का प्रावधान नहीं है.

सिफारिशें

समिति ने कहा है कि 16 साल से कम उम्र की मॉडलों के साथ काम कर रहे लोगों की जाँच क्रिमिनल रिकॉर्ड ब्यूरो से कराना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.

मॉडलों के लिए स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए.

समिति ने ये भी कहा है कि मॉडलों के कामकाज की परिस्थितियों की विस्तृत जाँच होनी चाहिए और इस बारे में लगातार शोध होना चाहिए.