बुधवार, 12 सितंबर, 2007 को 11:05 GMT तक के समाचार
वी राधिका
टोरंटो फ़िल्म महोत्सव से
टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में एक सीधी-साधी कहानी पर आधारित भारतीय मूल के कनाडा निवासी रिची मेहता की पहली फ़िल्म 'अमाल' काफ़ी चर्चा में है.
रिची मेहता की 'अमाल' एक ईमानदार ऑटोरिक्शा चालक की कहानी है जो एक वास्तविक घटना से प्रेरित होकर लिखी गई लघु-कथा पर आधारित है.
फ़िल्म के लेखक रिची के भाई शॉन मेहता हैं. रिची ने दो साल पहले 'अमाल' को एक लघु-फ़िल्म के रूप में बनाया था. तब उस लघु-फ़िल्म को कई फ़िल्म महोत्सवों में सराहना मिली थी.
वहीं से उन्हें 'अमाल' को एक फ़ीचर-फ़िल्म के रुप में बड़े पर्दे पर लाने की प्रेरणा मिली.
इस फ़िल्म को दिल्ली में ही फ़िल्माया गया है. इसमें भारत के जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रौशन सेठ और सीमा बिस्वास ने काम किया है.
फ़िल्म में अमाल की भूमिका भारतीय मूल के कनाडा निवासी रूपिन्दर नागरा ने निभाई है लेकिन फ़िल्म में उनके बोलने के लहजे से यह बिल्कुल पता नहीं लगता कि वो दिल्ली से बाहर के हैं.
नागरा ने इस फ़िल्म के लिए ख़ासतौर पर स्थानीय भाषा और उच्चारण का प्रशिक्षण लिया.
कनाडा में पले-बढ़े रिची का कहना है कि वो हमेशा से निर्देशक ही बनना चाहते थे.
भारत-यात्रा
फ़िल्म 'अमाल' बनाने से पहले रिची मेहता सिर्फ़ दो ही बार भारत गए थे.
अपनी पहली भारत यात्रा उन्होंने मात्र तीन साल की उम्र में की और दूसरी 16 साल की उम्र में.
उसके बाद भारत न जा पाने की वजह बताते हुए वो कहते हैं, "मैं पर्यटक के रूप में भारत नहीं जाना चाहता था. मैंने मानसिक तौर पर यह निश्चय कर रखा था कि मैं वहाँ कुछ काम के सिलसिले में ही जाउँगा जिससे मुझे वहाँ कुछ समय रहने का भी समय मिले. फ़िल्म 'अमाल' ने मुझे वह मौक़ा दिया."
अपनी पहली ही फ़िल्म में नसीर, सीमा और रौशन सेठ के साथ काम करने पर रिची मेहता कहते हैं, "मैं जिन अभिनेताओं के साथ ज़िंदगी में काम करने की अभिलाषा रखता हूँ ये तीनों उनमें शामिल हैं और यह मेरा सौभाग्य है कि इन्होंने मेरे साथ काम किया."
'अमाल' की पूरी शूटिंग दिल्ली में ही हुई. इस दौरान फ़िल्मांकन से जुड़े सभी लोग महरौली में ही ठहरे जहॉँ अधिकतर दृश्य फ़िल्माए गए.
लघु-फ़िल्म से फ़ीचर फ़िल्म बनने की प्रक्रिया में कहानी में कुछ विस्तार किया गया. 'अमाल' में कुछ नए पहलुओं को जोड़ा गया. कुछ नए किरदारों को शामिल किया गया.
इसमें 'अमाल' के परिवार को दिखाया गया है और साथ ही उस 'सनकी-बिगड़ैल करोड़पति' बूढ़े आदमी का परिवार भी दिखाया गया है जो अपनी तमाम सम्पत्ति 'अमाल' के नाम कर गया है.
सदाबहार फ़िल्म
रिची मेहता के अनुसार 'अमाल' की कहानी बेहद सीधी और सरल होने के बावजूद हमें कई मूलभूत सवालों पर ध्यान देने को मजबूर करती है - जैसे सफलता की परिभाषा क्या है? आत्म-तृप्ति किसे कहते हैं?
इसी वजह से यह कहानी किसी भी देश-काल-परिस्थिति में घटित हो सकती है.
इस फ़िल्म को बनाने के दौरान रिची मेहता के अनुसार उनका भारत से सही मायनों में और भी गहरा संबंध स्थापित हो गया है.
वो अपनी अगली फ़िल्म 'चेस' भारत की पृष्ठभूमि में ही बना रहे हैं. उनका मानना है कि कनाडा के मुकाबले भारत में उनके मित्रों की संख्या कहीं अधिक हो गई है.
कनाडा की सड़कों पर चलते-चलते एकदम से उनके मानस पटल पर भारत की सड़कों की याद कौंध जाती है.
हम यह कह सकते हैं कि भारत में रहने और काम करने के अनुभव ने उनका सारा नज़रिया ही बदल दिया है.
वो कहते हैं, "चाहे मैं फ़िल्म यहाँ बनाऊँ या कहीं और, वो मेरे ख़ुद के अनुभवों पर आधारित होगी. कनाडावासी होना मेरे अनुभव का अभिन्न अंश है."
रिची मेहता कहते हैं कि उनकी कम्पनी की कोशिश है कि अपनी फ़िल्मों के माध्यम से वो 'कनेडियन' की परिभाषा को विस्तार दें.