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रविवार, 19 अगस्त, 2007 को 21:29 GMT तक के समाचार

सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से

अमरीका में चला 'बिग बी' का जादू

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन का जादू अमरीका में भी सर चढ़ कर बोल रहा है.

शनिवार की शाम न्यूयॉर्क में अपने पिता के सम्मान में आयोजित समारोह में आए अमिताभ बच्चन को देखने और सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी.

अमिताभ बच्चन अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की सौवीं वर्षगाँठ मनाने के लिए एक सांस्कृतिक और साहित्यिक समारोह में अपने परिवार समेत पधारे थे. उनके साथ उनके बेटे अभिषेक बच्चन और नई नवेली वधू ऐश्वर्या बच्चन भी स्टेज पर मौजूद थीं. फिर क्या था, लोगों का ताँता लग गया.

अमरीका भर के विभिन्न शहरों से अमिताभ बच्चन, अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन के प्रशंसक अपने चहेते सितारों का दीदार करने न्यूयॉर्क पहुँचे.

आयोजन मशहूर लिंकन सेंटर में हुआ. इस समारोह में ख़ासकर अमिताभ बच्चन ने अपने पिता की हिंदी की कविताएं पढ़कर सुनाईं.

ख़ासकर हरिवंश राय बच्चन की मशहूर कृति मधुशाला से जब उन्होंने कुछ अंश पढ़े तो दर्शक गद-गद हो गए.

ज़ोरदार अभिनंदन

कविताओं को पढ़ने से पहले ही अमिताभ बच्चन ने यह साफ़ कर दिया कि वह अपने पिता की कविताओं का सही रंग रूप तो उजागर नहीं कर पाएंगे.

लेकिन उनके ख़ास अंदाज़ के दीवाने लोगों को उनका शुद्व हिंदी में कविताएं पढ़ना ही काफ़ी था. लोग बार-बार तालियाँ बजा कर उन्हे दाद दे रहे थे.

सफ़ेद रंग का कोट पहने अमिताभ पूरे सुर में नज़र आ रहे थे. और जब एक बार उन्होंने कविता पाठ शुरू की तो जैसे लोग उन्हीं की कविताओं में खो गए.

हज़ारों लोगों से भरा हॉल और उसमें सिर्फ़ अमिताभ बच्चन की आवाज़ गूँज रही थी और स्वर में जो शब्द निकल रहे थे वह थे उनके पिता हरिवंश राय बच्चन के जिनकी अधिकतर कविताएँ 1930 के दशक में लिखी गईं थीं.

अपने पिता की विभिन्न कविताओं जैसे, खून के निशान, बुद्व और नाचघर, भारत के साँप और बहुचर्चित मधुशाला के अंशों को अपने ख़ास अंदाज़ में पढ़ने का सिलसिला अमिताभ बच्चन ने कोई दो घंटे जारी रखा.

जब मधुशाला का ज़िक्र छिड़ा तो अमिताभ बच्चन ने यह भी सफ़ाई पेश की कि उनके पिता ने अपने जीवन में बहुत कम मदिरापान किया था जबकि आम धारणा यह रही है कि चूँकि उनके पिता ने मधुशाला जैसी कविता लिखी है तो वह बहुत पीयक्कड़ किस्म के इंसान रहे होंगे.

परिवार पर फ़िल्म

इस मौके पर उन्होंने यह भी बताया कि अब वह अपने पिता की कविताओं के ऑडियो कैसेट और सीडी की शक्ल में संग्रह भी बनाने का इरादा रखते हैं.

अमिताभ बच्चन का कहना था कि लोगों की फ़रमाईश पर बच्चन परिवार इस बात पर भी विचार कर रहा है कि हरिवंश राय बच्चन से शुरू होकर बच्चन परिवार पर ही आधारित एक फ़िल्म भी बनाई जाए.

हरिवंश राय बच्चन के सम्मान में आयोजित इस साहित्यिक समारोह में पुस्तक की शक्ल में उनकी एक जीवनी का भी विमोचन किया गया. साहित्यकार पुष्पा भारती ने इस पुस्तक का संपादन किया है जिसमें हरिवंश राय बच्चन के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है.

इस समारोह में हरिवंश राय बच्चन के जीवन पर आधारित ही एक कथक नृत्य नाटिका भी पेश की गई.

समारोह से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि उन्हें अपने भारतीय होने पर गर्व है. उनका कहना था कि भारत ने आज़ादी के बाद से सिर्फ़ 60 सालों में ही विभिन्न क्षेत्रों में काफ़ी प्रगति की है.