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रविवार, 12 अगस्त, 2007 को 12:09 GMT तक के समाचार

कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार

दिल था हिंदुस्तान में...

शाहरुख़ ख़ान भले ही चक दे इंडिया की रिलीज़ के वक़्त लंदन और फिर उसके बाद लॉस एंजेलेस में थे लेकिन उनका दिल इंडिया में था.

फ़िल्म पब्लिक को कैसी लग रही है, क्या पसंद आ रहा है, फ़िल्म को ओपनिंग अच्छी मिल रही है या नहीं, कहाँ कितने कलेक्शन हुए- ये सब जानने को शाहरुख़ इतने उत्सुक थे कि वे लगातार मुंबई में अपने दोस्तों से संपर्क में थे.

अच्छी बात ये है कि फ़िल्म की ओपनिंग भले की शानदार ना रही तो लेकिन धीरे-धीरे फ़िल्म के कलेक्शन बढ़ रहे हैं.

लंदन में फ़िल्म का प्रीमियर नौ अगस्त को हुआ और लॉस एंजेलेस में 10 अगस्त को. 11 अगस्त को शाहरुख़ भारत लौट आए और उनकी मानें तो अब वे तीन महीने बिल्कुल फ़्री हैं.

लेकिन शाहरुख़ के फ़्री होने का मतलब ये है कि वे किसी फ़िल्म की शूटिंग नहीं करेंगे.

लेकिन विज्ञापन फ़िल्मों की शूटिंग, फ़िल्मों के निर्माण के लिए मीटिंग, विदेशी कंपनियों से मुलाक़ातें- ये सब और बहुत कुछ तो चलता ही रहेगा.

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बड़े पर्दे पर छोटे पर्दे की बहू

टेलीविज़न की सबसे चहेती बहू यानी स्मृति ईरानी अब फ़िल्मों की दुनिया में क़दम रखने के लिए तैयार हो रही हैं.

सुनते हैं कि स्मृति ने एक बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ हाथ मिलाए हैं और दोनों मिलकर छोटी-बड़ी फ़िल्में बनाएँगे.

शुरुआत छोटी फ़िल्मों से होगी लेकिन वो दिन दूर नहीं जब छोटे पर्दे की रानी बड़े पर्दे के लिए बड़ी फ़िल्मों का निर्माण भी करने लगे.

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कर्ज़ का सच

जब से सुपर कैसेट्स ने सुभाष घई की कर्ज़ की री-मेकिंग राइट्स ख़रीद लिए हैं तब से मीडिया तो मानों दीवानी हो गई है. हर अख़बार में, हर टीवी चैनल में, हर पत्रिका में ये लिखा और कहा जा रहा है कि टी-सिरीज़ अब हिमेश रेशमिया के साथ कर्ज़ दोबारा बनाएँगे.

ये बात बिल्कुल सही है. लेकिन कर्ज़ को सुपरहिट कहना बिल्कुल सही नहीं है. जी हाँ, जब 1980 में सुभाष घई की कर्ज़ रिलीज़ हुई थी तब उस फ़िल्म को समीक्षकों की सराहना ज़रूर मिली थी लेकिन बॉक्स ऑफ़िस पर पुनर्जन्म की ये फ़िल्म अच्छा कारोबार नहीं कर पाई थी.

मुंबई और दक्षिण के सर्किट में कर्ज़ थोड़ी बहुत चल गई लेकिन कुछ सर्किट में तो वो पूरा पैसा भी नहीं निकाल पाई. गाने हिट थे, 10-12 शहरों में ऋषि कपूर, टीना मुनीम, सिमी गरेवाल और राज किरण की इस फ़िल्म ने पैसे कमाए लेकिन बाक़ी भारत में ये फ़िल्म नहीं चल पाई.

इसका मतलब ये है कि टी-सिरीज़ ने हिट फ़िल्म नहीं बल्कि एक असफल फ़िल्म की री-मेकिंग राइट्स ख़रीदे हैं. और अब निर्देशक सतीश कौशिक को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी.

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ट्रेलर पर तालियाँ

लगता है माधुरी दीक्षित का बॉलीवुड में कमबैक सही रहेगा. उनकी कमबैक फ़िल्म आजा नचले का पहला ट्रेलर चक दे इंडिया के प्रिंट में हैं.

और माधुरी के डांस पर सिनेमाघरों में दर्शकों की तालियों की गूँज सुनाई देती है. वर्षों से माधुरी दीक्षित के सेक्रेटरी राकेशनाथ यानी रिक्कू पहले दिन चक दे इंडिया देखने सिनेमाघर पहुँचे.

ना, शाहरुख़ ख़ान की एक्टिंग कैसी है- ये पता करने नहीं बल्कि माधुरी की फ़िल्म के ट्रेलर पर दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी है- ये देखने के लिए.

वाह, सेक्रेटरी हो तो ऐसे. वैसे जब माधुरी दीक्षित इंडस्ट्री में नई आई थी तब एक-दो वर्षों तक रिक्कू ने बिना पैसे लिए उनका काम किया था. उन्हें माधुरी के स्टार बनने पर पूरा भरोसा था. शायद इसलिए भी माधुरी ने 20 वर्षों से अपना सेक्रेटरी नहीं बदला है.

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अपनों के लिए हैं सनी

सनी देओल अपने फ़ैमिली बैनर विजयेता फ़िल्म्स के लिए हर साल तीन-चार फ़िल्में बनाएँगे. एक्टिंग के अलावा सनी फ़िल्म निर्माण की दुनिया में दोबारा क़दम रख रहे हैं.

और इस बार दो-तीन साल में एक फ़िल्म की बजाए एक साल में तीन-चार फ़िल्में बनाएँगे. पहले साल में मास्टर्स, मैन और चमकू जैसी फ़िल्मों का निर्माण होगा.

मैन का निर्देशन सनी ख़ुद अपने लेखक दोस्त नीरज पाठक के साथ करेंगे. नीरज पाठक ने फ़िल्म अपने लिखी थी. उनकी अगली लिखी फ़िल्म राइट एंड रौंग में सनी देओल बतौर हीरो काम करेंगे.

ज़ाहिर है विजयेता फ़िल्म्स में बनने वाली फ़िल्मों में सनी या बॉबी या अभय तो होंगे ही, शायद तीनों साथ में भी काम करेंगे. एक फ़िल्म में पापा धर्मेंद्र के साथ तीनों भाइयों का होना मुमकिन सा लगता है. शायद सनी का यही सोचना है- अपने को अपने ही होते हैं.

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दलेर की दरिया-दिली

अतुल अग्निहोत्री की नई फ़िल्म हेलो का एक गाना रिकॉर्ड करने के बाद दलेर मेहंदी इतने ख़ुश थे कि उन्होंने पैसे लेने से इनकार कर दिया.

कहते हैं गाना बहुत ही बढ़िया हुआ और उसके हिट होने के पूरे चांस हैं. निर्माता-निर्देशक अतुल अग्निहोत्री ने भी अपनी दरिया-दिली दिखाई.

उन्होंने दलेर को गाने के रुपए नहीं दिए लेकिन तुरंत एक महंगी घड़ी भेंट कर दी.

अब शायद दलेर मेहंदी के पास अतुल अग्निहोत्री के लिए वक़्त ही वक़्त होगा.