रविवार, 08 जुलाई, 2007 को 11:44 GMT तक के समाचार
दुर्गेश उपाध्याय
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
मशहूर अभिनेता अनिल कपूर की फ़िल्म 'गांधी माई फ़ादर' भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नहीं, बल्कि हरिलाल और उनके पिता मोहनदास करमचंद गांधी की कहानी है.
'गांधी माई फ़ादर' की कहानी महात्मा गांधी के जीवन के बारे में कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर करती है. ये फ़िल्म बनकर तैयार है और आने वाले कुछ ही हफ़्तों में रिलीज़ होने वाली है.
महात्मा गांधी को लोग एक सफल राष्ट्रनेता और आज़ादी की लड़ाई के शिखर पुरुष के तौर पर भले ही जानते हों, लेकिन एक पिता के तौर पर उनके अपने पुत्र के साथ रिश्तों के बारे में शायद कम ही लोग जानते हैं. ये फ़िल्म कुछ ऐसे ही अनछुए पहलुओं को दर्शाती है.
जैसा कि हम सब जानते हैं महात्मा गांधी की अपने पुत्र हरिलाल से कभी नहीं पटी. जीवन भर 'बापू' ने अपने दिल में ही इस घाव को छुपाए रखा.
बेटे का विरोध
गांधी की इतनी बड़ी शख्सियत होने के बावजूद उनका खुद का बेटा हरिलाल जीवन भर इधर-उधर भटकता रहा.
एक ऐसा व्यक्ति जिसके पीछे करोड़ों लोग बिना कुछ सोचे समझे चल देते थे, ख़ुद उसका बेटा 'विद्रोही' हो गया और ये विरोध इतना बढ़ा कि उसने गुस्से में आकर अपने पिता को नीचा दिखाने के लिए धर्म परिवर्तन तक कर लिया.
गांधी जिन्होंने पूरे देश की आत्मा में परिवर्तन लाने का बीड़ा उठाया, जीवन भर अपने बेटे की सोच को बदलने में उन्हें कोई कामयाबी क्यों नहीं मिल सकी, 'गांधी माई फ़ादर' इसी बात को ही दिखाने की एक कोशिश है.
'गांधी माई फ़ादर' फ़िल्म का निर्देशन किया है फ़िरोज़ अब्बास ख़ान ने.
फिरोज़ पिछले दो दशकों से थिएटर और फ़िल्मों की दुनिया से सक्रिय रुप से जुड़े हैं.
'गांधी का प्रभाव'
फ़िरोज़ ने बीबीसी को बताया कि वो गांधी के व्यक्तित्व से काफ़ी प्रभावित हैं.
उनका कहना है कि गांधी ने जिस तरह से सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत तौर पर देश की सेवा की, उसकी दूसरी मिसाल हमारे पास नहीं है.
ख़ान कहते हैं, "यह कहानी ऐसे व्यक्ति की है जिसने अपने सिद्दांतों, देश और समाज के हित को हमेशा सबसे ऊपर रखा और जिसका उसे भारी खामियाज़ा भी चुकाना पड़ा."
वो कहते हैं, " हमने अपनी इस फ़िल्म के जरिए गांधी और उनके पुत्र हरिलाल के व्यक्तिगत रिश्ते को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश की है."
फ़िल्म में गांधी के पुत्र यानी हरिलाल की भूमिका में हैं अक्षय खन्ना और उनके साथ हैं भूमिका चावला, दर्शन ज़रीवाला और शेफाली शाह.