शनिवार, 14 अप्रैल, 2007 को 13:48 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के एक मशहूर पॉप गुट ने एक नया गीत बनाया है जिसका संदेश मुसलमानों की नकारात्मक छवि को चुनौती देते हुए इस्लाम की उदारवादी तस्वीर उभारना है.
इस गीत का एक वीडियो इन दिनों पाकिस्तान में ख़ासा लोकप्रिय है और इसका नाम है - ये हम नहीं.
यह गीत इस संदेश के साथ शुरू होता है - आतंकवाद हत्या का दूसरा नाम है और हत्या हराम है. ग़ौरतलब है कि इस्लाम में हराम किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
इस वीडियो में इस संदेश के बाद एक युवा पाकिस्तानी लड़की की तस्वीर दिखाई जाती है जो हाल ही में हुए एक बम धमाके में ज़ख़्मी हो गई थी.
इस गीत को पाकिस्तान के कुछ मशहूर पॉप गायकों ने गाया है जिनमें अली हैदर और हदीक़ा कियानी जैसे नाम भी हैं.
गीत में आधुनिकता और उदारवाद अपनाने की दलील दी गई है और युवा मुसलमानों को अतिवाद को नकारने का आहवान भी किया गया है.
इस गीत को वजूद में लाने का विचार ब्रिटेन में रहने वाले एक लेखक वसीम महमूद का रहा है.
वसीम महमूद कहते हैं, "यह गीत दरअसल पाकिस्तान में युवाओं के लिए एक पुकार है. यह उन अनगिनत लोगों को आवाज़ देने के लिए है जो यह मानते हैं कि इस्लाम शांति और सहिष्णुता का मज़हब है."
पाकिस्तान में इस वीडियो की लोकप्रियता को देखते हुए इस पश्चिमी देशों में भी दिखाने की योजना बनाई जा रही है ताकि बड़े पैमाने पर लोग इसे देख और समझ सकें.
इस गीत के गायकों ने इसे मुस्लिम समुदाय के बहुमत की ख़ामोश आवाज़ क़रार दिया है.
गायकों ने उम्मीद जताई है कि वे अपनी इस रचना के ज़रिए मुसलमानों और ग़ैर-मुसलमानों के बीच की खाई को दूर करने में कुछ योगदान कर सकेंगे.
यह पहला मौक़ा नहीं है जब पाकिस्तान के कुछ कलाकारों ने इस तरह की कोशिश की है. वर्ष 2001 में भी पॉप गुट जुनून ने एक गीत जारी किया था जिसे 11 सितंबर को अमरीका पर हुए हमलों के प्रभावितों को समर्पित किया गया था. उस गीत में भी कुछ इसी तरह का संदेश था.