गुरुवार, 12 अप्रैल, 2007 को 18:11 GMT तक के समाचार
अमरीका में 11 सितंबर के हमले के बाद दक्षिण एशियाई भाषाओं ख़ासकर हिंदी और उर्दू को ज़्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके नतीजे भी देखने को आ रहे हैं.
अमरीका के सेंट लुईस स्थित वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के हिंदी भाषा और भाषा विज्ञान पढ़ाने वाले एमजे वारसी का मानना है कि दक्षिण एशियाई लोगों को उनकी भाषा सीखने के लिए बढ़ावा देने का मक़सद उन्हें उनकी भाषा में ही समझाना है.
अमरीकी सरकार का मानना है कि इस आधार पर वह दक्षिण एशियाई लोगों के साथ ज़्यादा मेल-मिलाप हो सकता है और वह अपनी बात आसानी से लोगों को समझा पाएगी.
रुचि
एमजे वारसी का मानना है कि अमरीकी नीतियों के कारण ही सही लेकिन विदेशों में रहने वाले लोगों में भी अपनी भाषा के प्रति रुचि बढ़ी है.
एमजे वारसी ने अमरीका में हिंदी पत्रकारिता भी पढ़ाई है और उनका मानना है कि अब लोग ज़्यादा से ज़्यादा भाषा जानने को लेकर काफ़ी उत्सुक हैं.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट और पश्चिम बंगाल उर्दू एकेडमी से पुरस्कार प्राप्त एमजे वारसी ने भाषा और संचार पर पुस्तक भी लिखी है जो अमरीका के साथ-साथ भारत के कई संस्थाओं में पढ़ाई भी जाती है.
बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "भाषा के प्रति लोगों का उत्साह इसी से पता चलता है कि पिछले वर्ष 4500 छात्रों को हिंदी और उर्दू में स्कॉलरशिप दी गई थी."
उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख के कारण भी अमरीका में हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार एक आर्थिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है और अमरीका अब भारत की अनदेखी नहीं कर सकता.