सोमवार, 16 अप्रैल, 2007 को 14:54 GMT तक के समाचार
पंकज प्रियदर्शी
बीबीसी संवाददाता
कैरेबियाई द्वीप समूहों में गयाना के बाद त्रिनिडाड में सबसे ज़्यादा संख्या में भारतीय बसते हैं. त्रिनिडाड की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन भारतीय लोगों के यहाँ आकर बसने और रम जाने का गवाह है.
मज़दूरी करने के लिए यहाँ लाने गए भारतवासी अब यहाँ भारतवंशी कहलाते हैं. भारतीय लोगों के रहन-सहन, पर्व-त्यौहार मनाने के तौर-तरीक़े और सामाजिक जीवन के बारे में जानने की ललक मुझे खींच ले गई पोर्ट ऑफ़ स्पेन के नरवानी परिवार के पास.
परिवार की मालकिन गीता नरवानी अपने दो बेटों और बहू के साथ समुद्र तट से लगी एक ख़ूबसूरत कॉलोनी में रहती हैं. पति की मृत्यु के बाद उन्होंने घर की ज़िम्मेदारी संभाली है.
सत्तर के दशक में त्रिनिडाड आया नरवानी परिवार भारतवंशियों और भारतीय परंपराओं के बीच पुल का काम करता है. मैं जब गीता नरवानी के घर पहुँचा, तो मुझे लगा जैसे मैं भारत के किसी कोने में हूँ और किसी धार्मिक परिवार के बीच बैठा हूँ.
गीता नरवानी ने समय के साथ पोर्ट ऑफ़ स्पेन में आए बदलाव को क़रीब से महसूस किया है. दूर-दूर तक फैले पोर्ट ऑफ़ स्पेन में रहते हुए उन्हें भारत की कमी नहीं महसूस होती. उनके शब्दों में यह उन्हें 'छोटा इंडिया' लगता है.
पोर्ट ऑफ़ स्पेन के सेंट जेम्स इलाक़े में भारत से मज़दूरी के लिए लाए गए लोग ज़्यादातर उत्तर भारत और उसमें भी बिहार और यूपी के ज़्यादा थे. इसकी कुछ झलक यहाँ के लोगों की भाषा में आपको मिल ही जाती है.
गीता नरवानी बताती हैं कि यहाँ पर्व-त्यौहार ख़ूब धूम-धाम से मनाते हैं और उनमें प्रमुख है फागवा. अब फागवा सुनकर आप चौंकिए मत. होली को यहाँ फागवा कहते हैं.
दरअसल बिहार में होली को फगुआ भी कहा जाता है. बिहार से आए यहाँ के लोगों ने फगुआ की परंपरा बचाए रखी लेकिन समय के साथ-साथ फगुआ शब्द बिगड़ कर फागवा हो गया है और अब यहाँ होली फागवा के रूप में ही जानी जाती है.
इसके अलावा दीपावली और कार्तिक नहान भी पोर्ट ऑफ़ स्पेन में बसे भारतीयों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है. गीता नरवानी बताती हैं, "यहाँ दीपावली की इतनी धूम होती है कि एक महीने पहले से ही लोग मांस-मछली खाना छोड़ देते हैं."
अच्छे पड़ोसी
पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते और सुख-दुख में उनके मदद करने की परंपरा यहाँ भी जारी है. गीता नरवानी कहती हैं, "यहाँ काफ़ी अच्छे लोग हैं. लोग दुख-सुख में काम आते हैं. शादी-व्याह में मदद भी करते हैं."
यहाँ के भारतवंशियों में शादी तीन दिनों तक चलती है. शादी के एक दिन पहले मटकोड़ यानी मिट्टी कोड़ने की रस्म. फिर शादी और शादी के एक दिन बाद भी समारोह का दिन होता है.
गीता नरवानी के छोटे बेटे संजू यहीं पैदा हुए हैं और यहाँ के माहौल में पूरी तरह रमे हुए हैं. मेरे ये पूछने पर कि भारत और वेस्टइंडीज़ के बीच मैच हो तो वे किस टीम को सपोर्ट करेंगे, संजू कहते हैं, "इस बात में मैं निष्पक्ष हूँ यानी भारत के प्रति उनका लगाव तो है लेकिन वेस्टइंडीज़ से भी उतना ही प्यार है."
संजू बताते हैं कि बड़ी संख्या में रहने वाले भारतीयों ने पोर्ट ऑफ़ स्पेन के सामाजिक जीवन में अपना दख़ल बढ़ाया है लेकिन वे दिल से भारतीय ही हैं.
गीता नरवानी के बड़े बेटे विनोद एक कम्युनिटी रेडियो से जुड़े हैं और भारतीय खाने के इतने शौकीन हैं कि पूछिए मत. बाज़ार में पनीर नहीं मिलता, लेकिन मम्मी से फ़रमाइश करके घर में पनीर बनवाते हैं क्योंकि उनके वेस्टइंडीज़ के सहकर्मियों को पनीर बहुत पसंद है.
इसी परिवार के साथ सोलोमन भी रहते हैं. सोलोमन ईसाई हैं लेकिन धार्मिक हिंदू परिवार के साथ ऐसे घुले-मिले हैं कि अंतर बिल्कुल नहीं होता. सोलोमन ने मुझे बताया, "मतभेद की बात तो छोड़िए. इस परिवार ने मुझे इतना कुछ दिया है कि मैं क्या-क्या बताऊँ. वे हमारे धर्म का सम्मान करता हैं और मैं उनके धर्म का. और ऐसे में साथ रहना कितना मधुर होता है ये मैं जानता हूँ."
सोलोमन यहाँ बैंकिंग सेक्टर से जुड़े हैं और नरवानी परिवार के साथ पेइंग गेस्ट की तरह रहते हैं. इस परिवार के साथ बातचीत के दौरान एक बात को पता चल ही गई कि भारत से इतनी दूर ऐसे परिवार ही भारत को ज़िंदा रखे हुए हैं.