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मंगलवार, 03 अप्रैल, 2007 को 13:57 GMT तक के समाचार

निष्ठा चुघ
बीबीसी हिंदी, लंदन से

असली शाहरुख़ मिले नक़ली शाहरुख़ से

अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्य राय के बाद आज शाहरुख़ खान ने भी दुनिया के जानेमाने मैडम तुसॉद संग्रहालय में अपनी जगह बना ली है.

खुद शाहरुख़ खान ने मंगलवार सुबह लंदन के संग्रहालय में अपनी मूर्ति का अनावरण किया.

पत्रकारों और फिल्म प्रेमियों से खचाखच भरे मुख्य हाल में शाहरुख़ खान और उनकी पत्नी गौरी खान का स्वागत ढोल के साथ किया गया.

जैसे ही मूर्ति का अनावरण हुआ, शाहरुख़ और उनकी पत्नी गौरी मूर्ति को कुछ देर निहारते ही रह गए.

शाहरुख खान ने अपने गले में पहना फूलों का हार अपने पुतले को पहना दिया.

मोम की मूर्ति इतनी सजीव लगती है कि थोड़ी दूरी से देखने पर पहचानना मुश्किल था कि कौन असली है और कौन नकली.

ये पूछने पर कि उन्हें अपना पुतला देखकर कैसा महसूस हो रहा है.. शाहरुख ख़ान भावुक हो गए.

"मैं बचपन में आया था यहां अपनी मां के साथ.. तब मन में आया था कि यहां मेरा भी पुतला हो.. ये मेरी मां की भी ख्वाहिश थी.. काश आज वो ये पुतला देख पाती."

लेकिन उन्हें अपना पुतला पसंद आया या नहीं... इस पर वे तपाक से बोले... "मुझे हमेशा से लगता है कि मेरा कद छोटा है.. लेकिन मोम की मूर्ति कद में छोटी न लगे. मैं अपनी मूर्ति से काफी संतुष्ट हूँ."

मेहनत

अगर मुख्य मूर्तिकार स्टीफन मैनफील्ड की मानें तो शाहरुख खान सबसे ज़्यादा अपने बालों के स्टाइल को लेकर चिंतित थे.

वे बताते हैं, "उनके बालों पर काफी मेहनत करनी पड़ी. वे अंत तक अपने बालों के स्टाइल पर ही जोर देते रहे. मेरे लिये ये बहुत ज़रुरी था कि वे अपने स्टाइल से संतुष्ट हों."

शाहरुख़ खान की मोम की मूर्ति चार महीने में बन कर तैयार हुई. इस पर तीन शिल्पकारों और उनके सहयोगियों ने काम किया, स्टीफन के मुताबिक सबसे मुश्किल चुनौती थी शाहरुख़ के आकर्षण को पुतले में उतारने की.

स्टीफ़न इस संग्रहालय के लिए कई पुतले तैयार कर चुके हैं जिनमें प्रिंस विलियम, ब्रिटनी स्पीयर्स, पेरिस हिल्टन और डेविम बेख़म जैसी हस्तियाँ शामिल हैं.

इसके लिए उन्हें अच्छी ख़ासी मेहनत करनी पड़ी. उनकी भाव भंगिमाओं को सही तरह से उतारने के लिए उन्होंने शाहरुख़ की देवदास और डॉन फिल्में भी देखीं.

शाहरुख़ खान की मोम की मूर्ति चार महीने में बनकर तैयार हुई है, संग्रहालय जाने वाले दर्शक अब इसे देख सकेंगे.