बुधवार, 14 मार्च, 2007 को 14:05 GMT तक के समाचार
यूँ तो स्त्रियों की चाल के बारे में कई गीत और कविताएँ लिखी जाती रही हैं लेकिन हाल के एक शोध ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि महिलाओं के प्रति आकर्षण का एक प्रमुख कारण उनके इठलाकर चलने की अदा भी होती है.
महिलाओं का वक्ष-कटि-नितंब अनुपात यानि छाती, कमर और कूल्हे का अनुपात पहले से ही आकर्षक होने का एक मानदंड रहा है.
और यदि काया रेतघड़ीनुमा हो तो वह आकर्षण के नज़रिए से आदर्श माना जाता है.
लेकिन न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं ने पाया है कि आकर्षक होने के लिए महिलाओं को एक ख़ास तरह से कूल्हों को मटकाकर चलना भी होता है.
यदि कमर पतली हो और कूल्हे बड़े तो कहने ही क्या!
उनका मानना है कि कमर का नाप कूल्हों से 70 प्रतिशत से ज़्यादा न हो तो सोने पर सुहागा है.
कभी मर्लिन मुनरो, और अब बियोन्से और ज़ेनिफ़र लोपेज़ इसके प्रसिद्ध उदाहरण रही हैं.
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्त्ताओं के मुताबिक पुरुष जब अपने कंधों को इठलाकर चलते हैं तो ज़्यादा आकर्षक लगते हैं.
पश्चिम में छरहरे बदन की लोकप्रियता मीडिया की गढ़ी छवि के चलते हो सकती है.
यह इसलिए भी हो सकता है कि पश्चिमी महिलाओं को विकासशील देशों की महिलाओं की तरह शारीरिक मेहनत नहीं करनी पड़ती और इसलिए उन्हें मजबूत और मांसल शरीर की ज़रूरत नहीं होती.
शोधकर्त्ता दल का यह भी कहना है कि उनके निष्कर्ष केवल पश्चिमी समाज की महिलाओं पर लागू होता है और दूसरे समाजों में पुरुष और स्त्री के आकर्षण के मापदंड अलग-अलग हो सकते हैं.
दिलचस्प यह है कि शोधकर्त्ताओं का ज़ोर कमर और नितंब के सही अनुपात से ज़्यादा चाल पर रहा.
यानि बात चाहे स्त्रियों की हो या पुरुषों की, उनके आकर्षण का राज छिपा है उनकी चाल में.