गुरुवार, 08 मार्च, 2007 को 10:00 GMT तक के समाचार
पीएम तिवारी
कोलकाता से
जाने-माने निर्माता-निर्देशक मणिरत्नम मानते हैं कि फ़िल्म उद्योग एक बड़े बदलाव के कगार पर खड़ा है. अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आ रहे हैं.
अब निर्माता व दर्शक के बीच का अंतर घटेगा. वे कहते हैं कि फ़िल्म उद्योग के लिए बीता साल काफी अच्छा रहा है और उम्मीद है कि यह साल और बेहतर होगा.
हाल में अपने कोलकाता दौरे के दौरान उन्होंने अपनी फ़िल्मों, फ़िल्म उद्योग की परिस्थिति और इससे जुड़े कई अन्य मुद्दों पर खुल कर बातचीत की.
'गुरू' के बाद उनकी अगली फ़िल्म 'लाजो' की शूटिंग इसी साल अक्तूबर में शुरू होगी. इस फ़िल्म में पहली बार आमिर खान व करीना कपूर की जोड़ी काम कर रही है. मणिरत्नम के साथ आमिर की यह पहली फ़िल्म होगी.
वे कहते हैं, " आमिर एक बेहतरीन अभिनेता हैं और मेरी तरह ही लीक से हट कर काम करने में यकीन करते हैं. हमारी जोड़ी खूब जमेगी. फिलहाल इसकी पटकथा लिखने का काम चल रहा है. "
मणिरत्नम बताते हैं कि यह फ़िल्म इस्मत चुगताई की लघु कहानी पर आधारित है.
अभिषेक और ऐश्वर्या
आपने अभिषेक व एश्वर्या की जोड़ी को ही दोबारा क्यों नहीं लिया?
इस सवाल पर मणिरत्नम कहते हैं " मैं एक ही कलाकार को बार-बार अपनी फिल्मों में नहीं लेना चाहता. इससे मुझे अलग-अलग कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिल जाता है. "
क्या आपको यह सवाल बार-बार पूछे जाने पर परेशानी नहीं होती कि गुरू स्व. धीरू भाई अंबानी की जीवनी पर आधारित है या नहीं?
वे कहते हैं " फ़िल्म निर्माता के तौर पर ऐसे सवालों का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ता है. इससे कोई परेशानी नहीं होती. "
वे गुरु में अभिषेक बच्चन के अभिनय की तारीफ़ करते हुए कहते हैं " फ़िल्म में उऩकी भूमिका काफी कठिन थी. लेकिन अभिषेक ने उसके साथ पूरा न्याय किया है. 'गुरू' इसके निर्माण से जुड़े हर व्यक्ति के लिए एक कड़ी चुनौती थी. लेकिन हम इसमें कामयाब रहे. "
'नायकन', 'रोज़ा', 'दिल से' व 'बांबे' जैसी हिट फ़िल्में बनाने वाले मणिरत्नम कल्कि कृष्णमूर्ति के ऐतिहासिक उपन्यास 'पोनीइन सेल्वन' पर फ़िल्म बनाना चाहते हैं. यह उपन्यास चोल शासनकाल की पृष्ठभूमि में लिखा गया है.
वे कहते हैं " मैंने कालेज के दिनों में यह उपन्यास पढ़ा था. इसका कथानक अद्भुत है. लेकिन इतनी बड़ी बजट की फ़िल्म बनाना काफी मुश्किल है. इसमें काफी कुछ दाव पर लगा होता है. "
असली संतुष्टि
मणिरत्नम की फ़िल्म 'नायकन' को टाइम पत्रिका ने वर्ष 2005 में सौ सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में शामिल किया था. वर्ष 1987 में इस फ़िल्म को अधिकृत तौर पर ऑस्कर के लिए मनोनीत किया गया था.
ऑस्कर के अंतिम दौर में भारतीय फ़िल्मों के पिछड़ने के सवाल पर वे कहते हैं " हमें हॉलीवुड के अनुमोदन की जरूरत नहीं है. जब हॉलीवुड़ हमारे पुरस्कारों को अहमियत दे तभी हमें ऑस्कर को अहमियत देनी चाहिए. हम न तो हॉलीवुड़ के लिए फ़िल्में बनाते हैं और न ही ऑस्कर जीतने के लिए. हम अपने दर्शकों के लिए फ़िल्में बनाते हैं. "
वे कहते हैं कि कोई भी अवार्ड सिर्फ पीठ थपथपाने का काम करता है. असली संतुष्टि तो अपने काम से ही मिलती है.
लेकिन तमाम हिट फ़िल्में बनाने के बावजूद मणिरत्नम रिलीज़ होने के बाद कभी अपनी फ़िल्म नहीं देखते. आखिर ऐसा क्यों?
वे कहते हैं, " फ़िल्म देखने के बाद मुझे उसमें तमाम गलतियां नजर आती हैं. इसलिए मैं रिलीज होने के बाद अपनी फ़िल्म देखने नहीं जाता. "
मणिरत्नम इस साल अपनी दो सुपरहिट तमिल फिल्मों 'ईरुवर' और 'थिरुदा थिरुदा' को हिंदी में डब करने की भी योजना बना रहे हैं.