शनिवार, 20 जनवरी, 2007 को 17:15 GMT तक के समाचार
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी की साझा प्रस्तुति है आँगन के पार. एक कार्यक्रम जिसमें ग्रामीण महिलाओं के सरोकारों पर चर्चा होती है.
यह कार्यक्रम बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट और बीबीसी हिंदी सेवा के सौजन्य से प्रस्तुत किया गया है.
संपादन और संचालन की ज़िम्मेदारी संभाली रूपा झा ने.
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आँगन के पार: पाँचवीं कड़ी
आँगन के पार की पाँचवीं कड़ी में चर्चा घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ बने क़ानून की. महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएँ बदलते समय के साथ कम नहीं हो रही है.
भारत सरकार के अनुसार लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार हैं.
लेकिन पिछले 25 अक्तूबर 2006 से घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ बने क़ानून को लागू कर दिया गया है लेकिन क्या इससे तस्वीर बदलेगी. क्या गाँव-देहातों में रहने वाली महिलाएँ इस क़ानून की मदद लेने की हिम्मत जुटा पाएँगी.
इतने सारे क़ानून जो पहले से ही मौजूद हैं उसकी फ़ेहरिस्त मे जुड़ा एक और क़ानून क्या उम्मीद लेकर आया है. इस चर्चा मे भाग लिया है राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजा व्यास और सामाजिक कार्यकर्ता कमला भसीन ने.
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आँगन के पार: छठी कड़ी
कला यूँ तो हमारी जिदगी के हर लम्हे मे शामिल है. लेकिन क्या ये केवल मनोरंजन का साधन है या फिर ये समुदायों को और खासकर औरतों को सशक्त भी करती है.
इन सवालो पर एक दिलचस्प बातचीत हो रही है आंगन के पार की इस कड़ी में.
चर्चा मे भाग लिया है राजनीतिज्ञ और बरसो से हस्तकला कारीगरो के लिए काम कर रही संस्था दस्तकारी हाट समिति की अध्यक्षा जया जेटली, जानी मानी लोक संगीत गायिका पदमश्री शारदा सिन्हा और रंगमंच से जुड़े नाट्य निर्देशक परेवज अख्तर ने.
प्रस्तुत कर रही हैं रूपा झा...
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