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मंगलवार, 14 नवंबर, 2006 को 16:50 GMT तक के समाचार

विनोद वर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

'अब प्यार अफ़ोर्ड नहीं कर पाता'

कैलाश खेर अब एक जाना-पहचाना नाम है. हिंदी फ़िल्मों में वे अपने अलग अंदाज़ के गानों के साथ पैर जमा चुके हैं और अपना एक एलबम भी जारी कर चुके हैं.

'अल्ला के बंदे....' से शुरआत करने वाले कैलाश खेर अब अपने दूसरे एल्बम की तैयारी में लगे हैं और अक्सर देश-विदेश में अपने शो में व्यस्त रहते हैं.

लेकिन मेरठ में रहने वाली उनकी माँ अब भी पूछती हैं कि वह क्या करते हैं और उनके घर के लोगों के लिए वे अब भी 'नामाकूल से कैलाश' हैं.

कैलाश स्वीकार करते हैं कि उन्हें कई बार प्रेम हुआ है और वे अपने नाज़ुक मिज़ाज की वजह से असफल प्रेमी रहे हैं और जैसा कि वे कहते हैं व्यस्तता इतनी हो गई है कि प्रेम अफ़ोर्डे नहीं कर पाते.

दिल्ली प्रवास पर आए कैलाश खेर बीबीसी कार्यालय आए और खुलकर बातें कीं. पेश हैं प्रमुख अंश-

अंधेरी के स्टेशन से शुरु करने के बाद अमरीका में गायकी का अवार्ड पाने तक लंबा सफर बीत गया, अब कैसा लगता है?

अब थोड़ा सरल सुगम दिखता है. पहले तो बड़ा दुर्गम दिखता था. लेकिन जिस तरह से मैं बड़ा हुआ हूँ उसने मुझे बहुत परिपक्व कर दिया है. मैं 32 साल की उम्र में ही 60 साल के बूढ़े की तरह अनुभवी हो गया हूँ.

स्टेशन पर रात-रातभर जागते हुए जो आप गाया करते थे वो क्या अब भी याद आता है?

मैं वहाँ प्रोफ़ेशनली-कमर्शियली तो गाता नहीं था. जब मैं वहाँ गया था तो यह भी नहीं पता था कि मैं क्या करना चाहता हूँ, या गायक बनना चाहता हूँ. सोचता था कि पहले कुछ हासिल करूँगा और अपनी आवाज़ में वज़न पैदा करुँगा तब लोगों को बताउँगा कि मैं गाना भी गाता हूँ. लेकिन परमेश्लर को कुछ और ही मंज़ूर था और सब कुछ बहुत जल्दी हासिल हो गया.

आप सूफ़ी गायक बनना चाहते थे लेकिन अब लोग आपको पॉप गायक की तरह जानते हैं तो यह कैसा लगता है?

जो कुछ लोग कहते हैं उसे सुनकर मैं ख़ुद भी हैरान होता हूँ. जब कोई कहता है कि आप पॉप गायक हो तो मैं आश्चर्य से पूछता हूँ कि अच्छा क्या मैं पॉप गायक हूँ?. फिर कोई कहता है कि आप को सूफ़ी गायक हो, तो मैं उसे भी सुनता हूँ. मैं तो सोचता था कि धीरे-धीरे सीखने के बाद बताउँगा कि मैं गायक हूँ. मैं चाहता था कि मैं अपने मयार में ही रहूँ और कैलाश खेर बना रहूँ. सोनू निगम या और कोई न हो जाऊँ. नकल न करने लगूँ.

आपने अभी एक गाना गाया 'ये दुनिया ऊटपटांगा...कित्थे हाथ त कित्थे टाँगा...' तो आप क्या इससे सहमत होते हैं?

बिल्कुल मानता हूँ. जब मैं किसी विचार से मत होता हूँ तो उसमें डूबकर गाता हूँ. तन्मय होकर गाता हूँ.

इस ऊटपटाँग दुनिया में अब आपका भी एक नाम है, एक मकाम है तो अब घर वाले इस प्रसिद्धी को किस तरह देखते हैं?

उनके लिए तो मैं आज भी वैसा ही हूँ नामाकूल सा. वे बहुत प्रभावित नहीं हैं.

आपने कहीं कहा कि आपकी माँ अब भी पूछती हैं कि आप क्या करते हैं?

हाँ. माँ अभी पिछले साल ही पूछ रहीं थीं कि मैं क्या करता हूँ. जब मुझे बहुत सारे अवार्ड मिल गए और प्रसिद्धी मिल गई तब. वैसे तो सभी की माँ भोली होती हैं लेकिन मेरी माँ दुनिया की सबसे भोली माँ हैं. उनको ये भी नहीं पता कि संसार में चालाकी क्या होती है, बदमाशी क्या होती है. तो उन्होंने जब पूछा कि बेटे क्या करता है आजकल तो मैंने बताया कि माँ आजकल फिर से गाना गाने लगा हूँ तो उन्होंने फिर पूछा, वो तो ठीक है लेकिन तू वैसे क्या करता है. दरअसल उन्होंने मुझे जीवन में इतना कुछ करते हुए देखा है कि उनको लगता नहीं कि गाना भी कोई काम हो सकता है.

कहते हैं कि हर सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री होती है तो इस समय जहाँ पर आप हैं वहाँ पहुँचने के बाद आप किसे श्रेय देते हैं?

मैं अगर श्रेय देना चाहूँ तो बहुत से लोगों को श्रेय देना होगा. अपनी बाल्यावस्था से लेकर आज तक मैं जितनी भी महिलाओं से मिला हूँ, अपनी माँ और बहनों से लेकर और भी महिलाओं तक, सभी को मै सबसे पहले एक मनुष्य मानता हूँ. दरअसल वे आत्माएँ हैं बाद में वे पुरुष और स्त्री हैं. क्योंकि मैं सूफ़ी विचारधारा में विचार करता हूँ इसलिए लगता है कि सभी का कोई न कोई योगदान है मेरे जीवन में.

एक दो बार प्यार भी हुआ मुझे. लेकिन ज़िम्मेदारियाँ ऐसी थीं कि प्यार पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया. तो मैं असफल प्रेमी बना. प्यार हो तो जाता है. मुझे भी हूआ, दूसरों को भी मुझसे हुआ. अब तो और थोड़ा ज़्यादा होने लगा है.

दोनों तरफ़ से?

हाँ....नहीं...मेरी तरफ़ से कम दूसरी तरफ़ से ज़्यादा. लेकिन मेरी तरफ़ से अब व्यावहारिकता बहुत बढ़ गई है. अब में समय नहीं दे पाता और प्यार हमेशा समय माँगता है. यह सफलता की क़ीमत है जो मैं चुका रहा हूँ.

क्या कैलाश खेर इस समय किसी के प्रेम में हैं?

इस वक़्त नहीं है क्योंकि अब मैं प्यार को अफ़ोर्ड नहीं कर पाता.