शनिवार, 14 अक्तूबर, 2006 को 17:25 GMT तक के समाचार
कोमल नाहटा
वरिष्ठ फ़िल्म पत्रकार
रामगोपाल वर्मा ने पंगा ले लिया है. आप सोचेंगे- कैसे. अपनी फ़िल्म शोले में अमिताभ बच्चन को गब्बर सिंह की भूमिका देकर.
शोले की कहानी में अच्छाई की जीत होती है और बुराई की हार. अब जब बुरा आदमी अमिताभ बच्चन हो तो दर्शक तो चाहेंगे कि अमिताभ जीतें.
इससे पहले बाज़ीगर, डर और सरकार जैसी फ़िल्मों में ही विलेन इतने मज़बूत रहे हैं. लेकिन ये सारी फ़िल्में निगेटिव हीरो की फ़िल्में थी.
शोले में अच्छे लोगों की बुरे लोगों पर विजय होती है. अब अमिताभ बच्चन को जब बुरा आदमी का किरदार कर रहे हैं तो उन्हें लेकर लोगों की प्रतिक्रिया देखने लायक होगी.
इस फ़िल्म में अजय देवगन और मोहित अहलावत जय और वीरू की भूमिका निभा रहे हैं. जबकि अमिताभ बने हैं गब्बर. अब आज के गब्बर कैसे लगेंगे- ये तो आप ज़रूर जानना चाहेंगे.
इसलिए रामगोपाल वर्मा ने मीडिया के लिए एक ख़ास पार्टी रखी और इस पार्टी में गब्बर... यानी अमिताभ बच्चन भी पधारे.
अब तो समय ही बताएगा कि गब्बर की भूमिका अमिताभ को देकर क्या अपने रामू ने वाकई पंगा ले लिया है.
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सुपरस्टार बाप का बड़प्पन
शाहरुख़ ख़ान अपने बच्चों की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ते. वो उन्हें सारे ऐशो-आराम तो देते ही हैं लेकिन जीवन की कठिनाइयों से भी दूर नहीं रखते.
पापा शाहरुख़ अपने दोनों बच्चों को हमेशा ये कहते हैं कि अच्छे को और अच्छा बनाओ और उसके बाद और भी अच्छा.
आर्यन और सुहाना के स्कूल में शाहरुख़ ख़ान पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में जाने की हरसंभव कोशिश भी करते हैं. इसके अलावा ऐसे भी वे अपने बच्चों के स्कूल जाने की चाह रखते हैं.
लेकिन उन्हें स्कूल का दरबान गेट पर ही रोक देता है क्योंकि किसी के माँ-बाप को स्कूल के अंदर नहीं आने दिया जाता.
लेकिन इससे सुपर स्टार को ग़ुस्सा नहीं आता बल्कि स्कूल का अनुशासन देखकर ख़ुशी होती है. अपने बच्चों के स्कूल से शाहरुख़ ख़ान का कैसा लगाव है, इसका अंदाज़ा इससे भी होता है कि जब स्कूल में बच्चों के माँ-बाप की रेस आयोजित होती है, तो शाहरुख़ उसमें भी हिस्सा लेते हैं.
ये सब इसलिए ताकि दोनों बच्चों को कभी ऐसा ना लगे कि उनके पापा निराले हैं या औरों से अलग हैं.
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'सलमान के बेटे का सीक्रेट'
अक्षय कुमार अपने और सलमान ख़ान के बीच तनाव और झगड़े की कहानियाँ अख़बारों में पढ़-पढ़कर इतने ऊब चुके हैं कि वो अब ऐसी बातों को नकारते भी नहीं.
हाल ही में एक मुलाक़ात के दौरान अक्षय कुमार ने बताया, "दरअसल मीडिया में जो ख़बरें आती हैं, वो अधूरी हैं. सलमान और मैं सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं लड़ते हैं, हम मेकअप वैन में जाकर हाथापाई पर उतरे जाते हैं. हम एक-दूसरे से इतनी नफ़रत करते हैं."
आप समझ ही गए होंगे कि अक्षय कुमार की मज़ाक करने की पुरानी आदत गई नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि सलमान उनके बेटे अरणव को बहुत प्यार करते हैं, तो अक्षय मुस्कुराए.
और कह दिया- तो क्या हुआ मैं भी तो सलमान के बेटे से बेहद प्यार करता हूँ. फिर उन्हें अहसास हुआ कि उन्होंने क्या कह दिया. अक्षय ने कहा- अरे यार ये बात मुँह से कैसे निकल गई. ये तो टॉप सीक्रेट था.
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बीमार बॉलीवुड
फ़िल्म इंडस्ट्री में बीमारी का सीज़न चल रहा है. अक्षय कुमार अभी-अभी वायरल बुख़ार से उठे हैं. तो संजय लीला भंसाली को भी निमोनिया हो गया था.
सुभाष घई भी निमोनिया से पीड़ित हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं. सुभाष घई तो बीमारी की वजह से अपनी फ़िल्म अपना सपना मनी मनी की म्यूज़िक रिलीज़ फ़ंक्शन पर नहीं आए.
ख़ैर उनकी कमी सलमान ख़ान ने पूरी करने की कोशिश की. सलमान ने पार्टी में आकर रौनक बढ़ा दी. पार्टी में हँसी-मज़ाक चल रहा था और घर पर घई साहब नींद ले रहे थे.
हो सकता है मनी-मनी के सपने देख रहे हों. वैसे इस फ़िल्म में रितेश देशमुख के इतने सारे गेट-अप हैं लेकिन सबसे अच्छे वे लगे हैं लड़की के गेट-अप में.
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तलवार से कटा केक
एकता कपूर कम ही किसी की पार्टी में जाती हैं. लेकिन 11 अक्तूबर को टेलीविज़न की दुनिया की महारानी अपने पूर्व किएटिव प्रमुख मुश्ताक़ शेख़ की किताब की रिलीज़ पर ज़रूर पहुँची.
मुश्ताक़ शेख़ ने शाहरुख़ ख़ान पर किताब लिखी है. इस मौक़े पर एकता ना सिर्फ़ आईं बल्कि काफ़ी वक़्त भी गुज़ारा.
मुश्ताक़ की किताब का नाम है- स्टिल रीडिंग ख़ान. किताब रिलीज़ के अवसर पर शाहरुख़ ने काफ़ी निर्देशक और कलाकार दोस्त भी आए.
जब केक काटने का वक़्त आया तो सुपरस्टार ते सारे निर्देशकों को स्टेज़ पर बुलाया गया और सबके हाथों में छोटी-छोटी तलवारें दी गई.
कार्यक्रम की एंकरिंग कर रहे साजिद ख़ान ने कहा- अरे बाप रे. मैंने सोचा केक को काटेंगे लेकिन यहाँ तो केक का क़त्ल करने की तैयारी हो रही है.
(कोमल नाहटा का फ़िल्म कॉलम आपको कैसा लग रहा है. अपनी राय से हमें अवगत कराना ना भूलें. पता है- hindi.letters@bbc.co.uk)