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शुक्रवार, 29 सितंबर, 2006 को 16:01 GMT तक के समाचार

शालिनी जोशी
ऋषिकेश से

कैटरीना कैफ़ निकलीं तीर्थयात्रा पर!

चौंकिए मत, कैटरीना कैफ रूपहले पर्दे से संन्यास लेकर तीर्थयात्रा पर नहीं निकली हैं बल्कि अपनी फिल्म 'नमस्ते लंदन' की शूटिंग के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थानों की यात्रा कर रही हैं और उन्हें भ्रमण करा रहे हैं ऋषि कपूर.

दरअसल, 'नमस्ते लंदन' विदेश में बसे भारतीयों के जीवन पर बन रही फ़िल्म है.

फिल्म में ऋषि कपूर पिता हैं जो अपनी बेटी कैटरीना कैफ को भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से परिचित कराना चाहते हैं.

“बचपन में मैं लक्ष्मण झूला को यूँ ही समझता था जैसे कोई झूला होगा जिसमें बच्चे झूलते होंगे लेकिन जब देखा तो हैरान रह गया ये तो गंगा पर बना एक पुल है", ऋषि कपूर (मनमोहन) कुछ इस अंदाज में कैटरीना कैफ (जैज) और पत्नी बनीं नीना वाडिया (बेबो) को लक्ष्मण झूला के बारे में बताते हैं.

अगले एक दृश्य में पिता-पुत्री हरिद्वार में हर की पैड़ी पर हैं जिसे देखकर जैज का मन श्रद्धा और आस्था से भर जाता है.

भारतीय पिता और विदेशी माँ की संतान कैटरीना कहती हैं, “ये फिल्म मेरे वास्तविक जीवन के करीब है. मेरा बचपन भी यूरोप में बीता है और मेरे लिए भारतीय संस्कृति को जानने का इससे बेहतर मौका शायद नहीं हो सकता था.”

एनआरआई फ़ार्मूला

ब्लॉकबस्टर मूवी इंटरटेनमेंट के बैनर तले बन रही इस फिल्म के निर्देशक हैं विपुल शाह.

अपनी फिल्म यूनिट के साथ वो करीब एक महीने यहाँ रहेंगे.

वास्तव में पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड में एनआरआई लोगों के जीवन की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों की बाढ़ सी आ गई है या कहें कि बॉलीवुड को कहानी का एक नया प्लॉट और सफलता का एक नया फार्मूला हाथ लगा है.

'सलाम नमस्ते', 'कल हो न हो', 'हम-तुम' और अभी हाल में आई 'कभी अलविदा न कहना' इस फॉर्मूले पर बनी कुछ सुपरहिट फिल्में हैं.

विपुल शाह कहते हैं ये शायद समय की भी माँग है,"आखिर विदेशों में हमारी फिल्मों के दर्शक बढ़ रहे हैं."

लेकिन उनका दावा है कि 'नमस्ते लंदन' में सिर्फ विदेशी जीवन की चमक-दमक ही नहीं होगी बल्कि ये अप्रवासी भारतीयों पर बनी दूसरी फिल्मों से अलग होगी.

कैसे? ये पूछे जाने पर वो मुस्कुरा देते हैं,” ये तो आप फिल्म देखने के बाद ही समझ पाएँगे.”