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गुरुवार, 28 सितंबर, 2006 को 15:32 GMT तक के समाचार

सलमा ज़ैदी
संपादक, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम

क्यूँ अलग होती है इंटरनेट पत्रिका..?

इंटरनेट पत्रिका के अपने फ़ायदे और नुक़सान हैं.

पहले नुक़सान. आप इसे बस या ट्रेन में सफ़र करते हुए नहीं पढ़ सकते.

हालाँकि लैपटॉप के ज़रिए यह भी मुमकिन है लेकिन मैं उन आम पाठकों की बात कर रही हूँ जो भारत के दूर-दराज़ इलाक़ों में बसे हुए हैं.

आप इसकी तस्वीरें या कतरनें काट कर नहीं रख सकते. और बहुत सारी जमा हो जाएँ तो रद्दी के भाव बेच नहीं सकते.

लेकिन फ़ायदों की सूची बहुत लंबी है. पहली तो यह कि यह निशुल्क है. हाँ, इंटरनेट का ख़र्चा तो ज़रूर है लेकिन उसका ताना तब दीजिएगा जब सिर्फ़ पत्रिका की वजह से इंटरनेट कनेक्शन लें.

खोज लीजिए लेख

दूसरा यह कि पत्रिकाओं का ढेर सहेज कर रखने की ज़रूरत नहीं है. सर्च इंजन में शब्द के रूप में कीवर्ड डालिए और पुराने से पुराने लेख ढूँढ निकालिए.

जो लेख चाहें मित्रों को ईमेल के ज़रिए आगे बढ़ा दीजिए. तस्वीरों की गैलरी पर क्लिक कीजिए और एक के बाद एक मनोरम चित्र देखते जाइए.

अलग-अलग रुचि वाले पाठकों को अपनी दिलचस्पी का सामान तलाश करने के लिए अलग-अलग पन्ने खंगालने की ज़रूरत नहीं है.

एक ही पन्ने पर सिनेमा, विज्ञान या कारोबार से जुड़ी ढेरों ख़बरें पढ़ लीजिए. और हर हफ़्ते नए स्तंभ तो मिलेंगे ही लेकिन पुराने खोएँगे नहीं.

लेकिन बस यही नहीं. अब हम आपसे सुनना चाहेंगे इंटरनेट पत्रिका के फ़ायदे और नुक़सान.

लिखिए hindi.letters@bbc.co.uk पर.