शनिवार, 09 सितंबर, 2006 को 10:43 GMT तक के समाचार
फ़िल्म निर्माता और निर्देशक रामगोपाल वर्मा कहते हैं कि वे 'शोले' का रीमेक बनाते हुए इसमें बदले हुए समय के साथ आए परिवर्तनों को शामिल करेंगे.
वे मानते हैं कि ऐसा करना ज़रुरी भी है.
ऐसे परिवर्तन वे अपनी ही फ़िल्म 'शिवा' को फिर से बनाते हुए ला रहे हैं.
मुंबई में बीबीसी के लिए दुर्गेश उपाध्याय ने उनसे बात की.
नई फ़िल्म ‘शिवा’ आपकी पुरानी ‘शिवा’ से कितनी अलग है?
पुरानी ‘शिवा’ मैंने 17 साल पहले बनाई थी. वो फ़िल्म छात्र राजनीति पर आधारित थी जबकि नई फ़िल्म उससे बिल्कुल अलग है. ये कहानी है एक ऐसे शख्स की जो पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए आता है और वहां के भ्रष्ट सिस्टम के ख़िलाफ़ खड़ा होता है. इस फ़िल्म का ट्रीटमेंट काफ़ी अलग है.
इससे पहले भी आपने पुलिस सिस्टम पर कई फ़िल्में बनाई हैं, जैसे ‘शूल’, ‘अब तल छप्पन’, ये फ़िल्म इन फ़िल्मों से किस मायने में अलग है?
देखिए, ‘शूल’, ‘अब तक छप्पन’, इन फ़िल्मों में भी मैंने पुलिस सिस्टम की खामियों को दिखाने की कोशिश की थी. लेकिन मेरा कहना ये है कि अब हम ‘जंजीर’ जैसी फ़िल्म नहीं बना सकते, जिसमें एक ही हीरो हो और पूरी फ़िल्म उसी के इर्द-गिर्द घूमती है. हमें अब फ़िल्मों के स्वरूप को बदलना पड़ेगा, बदलते समय के साथ, बदलती तकनीक के साथ हमें फ़िल्में बनानी होंगी. मेरा नई फ़िल्म ‘शिवा’ में हम अलग तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश कर रहे हैं.
आपकी फ़िल्मों में अंडरवर्ल्ड पर काफ़ी फोकस किया जाता है ऐसा क्यों?
ऐसा नहीं है, मेरी फ़िल्में ‘सत्या’, ‘कंपनी’ के काफ़ी ज़्यादा सफल रहने की वजह से लोगों को ऐसा लगता है कि मैं अंडरवर्ल्ड पर ज़्यादा फोकस करता हूं. जबकि मैंने कॉमेडी, हॉरर जैसे कई विषयों पर भी कई फ़िल्में बनाई हैं.
आपकी फ़िल्मों में ‘डर’ को दिखाने का ढंग बिल्कुल अलग होता है? क्या आप ये मानते हैं कि इस तरह की फ़िल्में लोगों को अपील करती हैं?
क्यों नहीं? लोग इस तरह की फ़िल्में पसंद करते हैं. लोगों को ऐसी फ़िल्में अच्छी लगती हैं. हाँ, ये बात सही है कि मेरी फ़िल्में ‘डर’ को थोड़ा अलग अंदाज में पेश ज़रूर करती हैं.
रामगोपाल वर्मा की ‘शोले’ के बारे में कुछ बताएं?
ये फ़िल्म पुरानी फ़िल्म ‘शोले’ से एकदम अलग होगी. इस कहानी को बदले हुए समय के साथ नए ढंग से कहने की कोशिश करेंगे.
इस फ़िल्म में आपने अमिताभ बच्चन को गब्बर सिंह की भूमिका के लिए चुना है?
अमिताभ बच्चन एक बड़े कलाकार हैं. किसी भी भूमिका में वे आसानी से फिट हो जाते हैं. उनके साथ मैंने ‘सरकार’ में काम भी किया है. अगर गब्बर सिंह की बात करें तो ‘शोले’ की बात करनें पर गब्बर सिंह का नाम सबसे पहले आता है. फ़िल्म रीलीज होने के बाद गब्बर ही असली हीरो के रूप में लोगों को याद रह गया. तो मेरी कोशिश होगी कि मैं एक अच्छी फ़िल्म बना सकूं.
क्या आपकी आने वाली फ़िल्मों में उर्मिला मातोंडकर भी दिखेंगी?
हम कुछ प्लान कर रहे हैं. पूरी उम्मीद है कि उर्मिला के साथ हम जल्द ही कोई फ़िल्म करेंगे.
आने वाली फ़िल्मों के बारे में बताएं?
सरकार पार्ट-2, निशब्द वगैरह कुछ फ़िल्मों पर काम चल रहा है.