बुधवार, 06 सितंबर, 2006 को 13:22 GMT तक के समाचार
वेब सर्च की दुनिया में कामयाबी के नए झंडे गाड़ रहे गूगल सर्च इंजन पर आप जल्द ही दो सौ साल पुरानी ख़बरें पढ़ सकेंगे.
गूगल की नई योजना के तहत अब इस सर्च इंजन पर पुराने अख़बारों का संग्रह जारी किया जाएगा.
कुछ सुविधाएँ मुफ़्त मुहैया की जाएगी और कुछ ख़बरों के लिए शुल्क देना होगा. गूगल की इस योजना में अमरीकी अख़बार ‘न्यूयार्क टाइम्स’ और ब्रिटेन के ‘द गार्डियन’ की वेबसाइट भी शामिल हैं. इसके अलावा अन्य समाचार एजेंसियों और वेबसाइटों की मदद भी ली जाएगी.
गूगल के एक प्रमुख इंजीनियर और इस योजना के मुख्य कर्ताधर्ता अनुराग आचार्य का कहना है, “इस योजना के तहत गूगल इतिहास की नई पर्तें खोलेगा. यह जानना ख़ासा रोचक होगा कि वक़्त के साथ लोगों की भावनाओं और सोचने के तरीकों में किस तरह बदलाव आया है.”
सूचनाओं का खज़ाना
इस योजना के तहत गूगल की साइट पर जाने वाले लोगों को उनके सवालों का जवाब विभिन्न समाचार स्रोतों की मदद से मिल जाएगा. स्रोतों की संख्या कितनी है, इसे गुप्त रखा गया है.
इस सुविधा का लाभ उठाने का तरीका पुराने सर्च इंजन की तरह ही होगा जिसमें सवाल से जुड़े हुए सारे लेखों को एक साथ दिखाया जाएगा.
निशुल्क और शुल्क वाली ख़बरों को एक साथ दिखाया जाएगा. अब यह आप पर निर्भर है कि आप क्या पढ़ना चाहते हैं.
ख़बरों के साथ-साथ उनके प्रकाशन की तिथि भी बताई जाएगी जिसे आप की-बोर्ड की मदद से देख सकेंगे.
इस तरह चंद्रमा पर मानव किस दिन पहुँचा इस ख़बर के साथ-साथ यह भी देखा जा सकेगा कि इस संबंध में कब-कब क्या-क्या छपा है.
अनुराग आचार्य का कहना है कि अब एक क्लिक की मदद से आप ख़बरों का इतिहास, उनका आपस में जुड़ाव सब कुछ जान सकेंगे. वो कहते हैं, “गूगल पर आपको 17 वीं सदी के मध्य की ख़बरें भी मिल सकती है.”
गूगल के लिए चुनौती
गूगल से जुड़े लोगों का कहना है हर दौर में ख़बर प्रकाशित करने के तरीके अलग-अलग रहे हैं. ऐसे में इनकी सुलभ सूची बनाना गूगल के लिए ख़ासा मुश्किल था.
एक ऑनलाइन रिसर्च के अनुसार 2005 में तीन करोड़ 80 लाख लोगों ने गूगल सर्च इंजन का उपयोग हर महीने किया था. इसे देखते हुए गूगल ने अपनी सुविधाएँ विस्तृत करने की ठानी है.
इसी के तहत अगस्त माह में गूगल ने कालजयी उपन्यासों को गूगल पर पढ़ने और प्रिंट करने के घोषणा की थी.
अमरीका की जॉर्ज मिशन यूनिवर्सिटी के सेंटर आफ हिस्ट्री एंड न्यूज मीडिया के प्रोफ़ेसर रॉय रोसेनज़िग का कहना है, “गूगल की यह योजना रोमांचित तो करती है लेकिन देखना यह होगा कि गूगल पुराने दस्तावेजों के साथ कितना न्याय कर पाएगा."
वो कहते हैं, "एक इतिहासकार होने के कारण मैं हमेशा नई एतिहासिक जानकारियों की ख़ोज में लगा रहता हूँ. अब देखना यह होगा कि गूगल मुझे क्या नया दे पाता है.”