सोमवार, 21 अगस्त, 2006 को 00:21 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी उत्तर प्रदेश संवाददाता
भारत के मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान को राजकीय सम्मान के साथ दफ़ना दिया गया है. केंद्र ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.
सोमवार की सुबह बिस्मिल्ला ख़ान का वाराणसी में निधन हो गया. वे 91 वर्ष के थे.
उनके निधन पर केंद्र सरकार ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है यानि सोमवार सभी सरकारी कार्यालय और स्कूल व कॉलेज बंद रहें.
उनके सचिव जावेद अहमद ने बीबीसी को बताया कि उनके गृह नगर वाराणसी में एक अस्पताल में सोमवार तड़के उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनका निधन हुआ.
कुछ दिन पहले तबीयत ख़राब होने की वजह से उन्हें वाराणसी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उनके सचिव के अनुसार रविवार को वे अच्छे 'मूड' में थे और उन्होंने दिल्ली में इंडिया गेट पर शहनाई बजाने की इच्छा व्यक्त की थी.
उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया गया था.
गंगा-जमुनी तहज़ीब
अपनी शहनाई बजाने की कला के लिए उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान दुनिया भर में मशहूर थे.
जहाँ शहनाई परंपरागत तौर पर शादी-ब्याह और मंदिरों में प्रार्थना के समय बजाई जाती रही है, वहीं उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान ने उसे शास्त्रीय संगीत की एक विधा के रुप में दुनिया के पटल पर पहचान दिलाई.
उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान को भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब के एक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में जाना जाता है.
शायद इसीलिए जो लोग उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान की सेहत के लिए दुआएँ कर रहे थे उनमें हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों के लोग शामिल थे.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टी राजेश्वर प्रसाद और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के अलावा अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान के स्वास्थ्य के बारे पूछताछ की थी.
इतनी ख्याति के बावजूद उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान वाराणसी में अपने घर में सादा जीवन व्यतीत करते थे.
कुछ महीने पहले जब वाराणसी में बम धमाके हुए थे तो उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान ने कड़े शब्दों में उसकी निंदा की थी.