शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को 08:05 GMT तक के समाचार
(बिंदास बाबू की डायरी)
कीड़ों ने कीटनाशक महिमा का बखान ख़त्म किया ही था कि आकाशवाणी हुई.
हे बेवकूफ़ कीट. क्या तूने उस महापुराण को पढ़ा है जिसे 19वाँ पुराण कहते हैं. जिसका नाम 'कोला पुराण' हैं. जिसके पढ़ने से सारे कोला-क्लेश कट जाते हैं.
कलयुग में कोला अमृत हो उठता है. ज़ाहिर है तुमने उसे नहीं पढ़ा तभी कीटनाशक ढूँढ़ रहे हो. जाओ, कोला पुराण की वेबसाइट खोलो. बाँचो.
ऐसा सुनकर कीटों की सभा विसर्जित हो गई.
कीटों ने ज्यों ही डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट कोला डॉट काम खोला, पहली ख़बर देखते ही दंग रह गए.
'कोल्डवार ख़त्म हो गया, कोलावार शुरू हुआ' यह सुर्ख़ी देख आगे बाँचा तो पाया कि कोला कल्चर ने कॉमरेडों के बीच दो फाड़ कर दिया है.
केरलवासी कहते हैं नो कोला. बंगाल वाले कहते हैं जय कोला.
एक भूतपूर्व कॉमरेड कीट से रहा न गया. दर्द महसूस हुआ. एक कोला ने मार्क्सवाद को विचलित कर दिया. पूरी लाइन की लाइन गड़बड़ा रही है.
कोला की महिला अपरंपार है. कोला पुराण कहता है कि कोला 15वाँ रत्न है. समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे. लक्ष्मी जी को लेकर, फिर अमृत को लेकर देवों-दानवों में ग्लोबल फाइट हो गई. मंथन प्रोजेक्ट बीच में ही रह गया.
कोला पाताल नरेश अहिरावण के हाथ लगा. उसने उसे तुरंत मार्केट कर दिया. कोलेश्वर और पेप्सेश्वर नामक कंपनियों ने उसे अमृत बना दिया. लोग पानी की जगह कोला पान करने लगे.
कोला पान ने इस बात का संकेत भी दिया है कि कलिकाल में कोला को लेकर कॉमरेडों के बीच कोला फ़ाइट होकर रहेगी. एक कहेगा, कोला को बंद करो. दूजा कहेगा, कोला की जय-जय, भोला की जय-जय. पार्टी लाइन टूट-फूट जाएगी.
कोला पुराण 'हाई थियरी' वाला भी है. वह कंज्यूमर कल्चर का महालीला कोश है. कहता है कि कोला कलिकाल में दुर्जेय होगा. वह विचारधाराओं, व्यवस्थाओं से परे सर्वत्र सबको प्रिय होगा. वह कलि काल का अमृत कहलाएगा.
वह 15वाँ रत्न जो ठहरा. जहाँ कोई फ़ंक्शन नहीं करेगा, वहाँ कोला फ़ंक्शन करेगा. वह तमाम तरह की कट्टरताओं को तोड़ देगा. ठंडा मतलब कोका कोला.
'ये दिल मांगे मोर' राष्ट्रगान की तरह गाए जाएँगे. लोग कोला के आते ही शांत हो जाएंगे. जहाँ लड़ रहे होंगे वहाँ एक बोतल प्यार पैदा कर दिया करेगी.
वह एक ‘फुल डिस्कोर्स’ होगा. एक बोतल का झाग दुनिया को अपने बुलबुलों में डुबा लेगा.
कीट ने पढ़ा और सोचा इस पुराण में सारी बातें उसी तरह लिखी है जिस तरह इन दिनों हो रही है.
ऐसा सुन पुराण की शाख पर बैठे शुकदेव महाराज से रहा न गया.
वे कोला भगवान से पूछ ही बैठे. इस चराचर को चरने वाले कोलेश्वर महाराज भगवन, ये बताइए कि मार्क्सवाद और कोला का क्या संबंध है? क्या कम्युनिस्ट मैनिफ़ेस्टो में कोला आता है? क्या मार्क्सवाद एंगल्स, लेनिन, स्टालिन, माओ, हो ची मिन्ह, चे आदि ने कभी कोला चखा है?
कोलेश्वर भगवान बोले, हे कॉमरेड शुकदेव. ये लोग मूर्ख थे जो कोला से फ़ाइट करते रहे. फ़ाइट करने वाला गिर गया पर कोला फिर-फिर विजयी रहा. देखते नहीं कोला ने समाजवाद गिरा दिया.
लेकिन कॉमरेड फिदेल कास्त्रो?
जवाब मिला, वो अगर कोला पीते तो ऑपरेशन क्यों करवाना पड़ता.
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