शुक्रवार, 11 अगस्त, 2006 को 06:40 GMT तक के समाचार
आरिफ़ वक़ार
भारत के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता स्वर्गीय सोहराब मोदी को मिले दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की नीलामी की तैयारी चल रही है.
उनकी फ़िल्म ‘पुकार’ और ‘जेलर’ के असली पोस्टर, फ़िल्म ‘कुंदन’ की ब्लैक एण्ड व्हाइट तस्वीरें, कुछ दूसरी फ़िल्मों के फ़ोटो सेट, फ़िल्म में प्रयोग होने वाला क्लीपर बोर्ड, कई फ़िल्मों में प्रयुक्त चीनी मिट्टी के बर्तन, सोहराब मोदी के कुछ सूट और टाइयाँ और फ़िल्मी गीतों की कुछ पुरानी पुस्तकें भी बोली लगाने वालों की प्रतीक्षा में हैं.
मुंबई के दुर्लभ और अनमोल वस्तुओं के बाज़ार के एक डीलर का दावा है कि यह सब दुर्लभ वस्तुएं उसने सोहराब मोदी के बेटे से उस समय ख़रीदीं थीं जब पिछले बरस वह भारत को अलविदा कह कर दुबई चले गए थे.
नीलामी की चीज़ों में सबसे महत्वपूर्ण दादासाहेब फाल्के पुरस्कार है जो कि भारत के सबसे पहले फ़िल्म निर्माता दादासाहेब के नाम पर शुरू किया गया था.
दादासाहेब ने 1913 में भारत की पहली फ़िल्म बनाई थी. सोहराब मोदी इस पुरस्कार को पाने वाले दस पहले व्यक्तियों में से एक हैं.
लंबा अनुभव
1897 में भारत के गुजरात राज्य में पैदा होने वाले सोहराब मोदी थिएटर में अपने लंबे अनुभव को 1935 में स्क्रीन पर प्रयोग में लाए थे और शेक्सपियर के सुप्रसिद्ध नाटक ‘हैमलेट’ पर आधारित फ़िल्म ‘ख़ून का ख़ून’ का निर्देशन किया और हैमलेट का पात्र ख़ुद ही निभाया.
1938 में उनकी फ़िल्म ‘जेलर’ सामने आई लेकिन उन्हें वास्तविक प्रसिद्धि फ़िल्म ‘पुकार’ से मिली जो कि मुग़ल बादशाह जहांगीर के इंसाफ़ के विषय पर बनने वाली अपने ज़माने की सबसे लोकप्रिय फ़िल्म थी.
1941 में सोहराब मोदी ने फ़िल्म ‘सिकंदर’ में पृथ्वीराज कपूर के विरूद्ध राजा पोरस का यादगार पात्र निभाया था और 1955 में विक्टर ह्यूगो के मशहूर उपन्यास ‘लॉ-मिज़्रेबल’ पर आधारित फ़िल्म ‘कुंदन’ पेश की थी.
दिलीप कुमार के विरूद्ध फ़िल्म यहूदी में एक कट्टर यहूदी का पात्र भी उनका कारनामा है.
एक अभिनेता के तौर पर उनकी आख़िरी फ़िल्म ‘रज़िया सुल्तान’ थी जो कि 1983 में प्रदर्शित हुई.
सोहराब मोदी का निधन 28 जनवरी, 1984 को मुंबई में हुआ था.