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शुक्रवार, 04 अगस्त, 2006 को 20:09 GMT तक के समाचार

फ़िल्मों की समस्याएँ सुलझाएँगे कोर ग्रुप

भारत सरकार ने भारतीय सिनेमा उद्योग की विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के लिए उपाय सुझाने वाले पाँच कोर ग्रुप बनाने का फ़ैसला किया है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इन कोर ग्रुपों का गठन करेगा.

जिन प्रमुख समस्याओं या चिंताओं को दूर करने के लिए ग्रुप बनाने का निर्णय लिया गया है उनमें एक है फ़िल्मों का निर्यात, दूसरा पायरेसी यानी फ़िल्मों की अवैध नकल और मल्टीप्लेक्स और एक ही स्क्रीन वाले सिनेमा घरों में फ़िल्मों के प्रदर्शन का मामला, तीसरा है भारत और विदेशों में फ़िल्म समारोह.

इसके अलावा फ़िल्मों पर लगने वाले टैक्स का मसला है और पाँचवा है फ़िल्मों के विकास और संरक्षण से जुड़े सवालों पर.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि इस तरह के कोरग्रुप बनाने की पहल उन संसद सदस्यों ने की थी जो फ़िल्म इंडस्ट्री के सदस्य हैं.

इनमें जया बच्चन, जयाप्रदा, हेमामालिनी, धर्मेंद्र, राज बब्बर, गोविंदा, शत्रुघ्न सिन्हा और श्याम बेनेगल.

'पायरेसी कोर ग्रुप'

प्रियरंजन दासमुंशी ने फ़िल्मों की पायरेसी रोकने के लिए कोर ग्रुप की घोषणा करते हुए फ़िल्म अभिनेत्री और संसद की पूर्व सदस्य शबाना आज़मी को इसका नेतृत्व करेंगी.

दासमुंशी ने कहा है कि शबाना आज़मी ने ख़ुद ही किसी चुनौतीपूर्ण काम के प्रति रुचि ज़ाहिर की थी और इसलिए उन्हें इस कोर ग्रुप के लिए चुना गया है.

उल्लेखनीय है कि भारत में फ़िल्मों की नकली सीडी और डीवीडी बनाए जाने को लेकर काफ़ी पहले से चिंता जताई जाती रही है.

फ़िल्म उद्योग की शिकायत रही है कि इसकी वजह से उद्योग को काफ़ी नुक़सान होता है और दर्शक सिनेमाघरों तक भी नहीं जाते.

इसके अलावा ये कोर ग्रुप हाल ही में उत्पन्न एक और समस्या से निपटने के उपाय सुझाएगा. वह है मल्टीप्लेक्स में फ़िल्म रिलीज़ का.

मल्टीप्लेक्स यानी एक साथ कई सिनेमाघरों वाले कॉम्पलेक्स में फ़िल्म प्रदर्शन को लेकर पिछले दिनों कुछ विवाद हुए हैं.

फ़िल्म वितरकों का कहना है कि मल्टीप्लेक्स में कम प्रिंट लेकर मालिक ज़्यादा शो दिखा पाते हैं जबकि उनकी तुलना में एक ही पर्दे वाले सिनेमाघर मालिक को नुक़सान होता है.

इसके लिए फ़िल्म निर्माता और वितरक दो अलग-अलग तरह की रेटलिस्ट बनाने की माँग कर रहे हैं.

हाल ही में 'फ़ना' फ़िल्म के प्रदर्शन के समय मल्टीप्लेक्स मालिकों और वितरकों के बीच काफ़ी तकरार हुई थी.